नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — सऊदी अरब की राजधानी रियाद और उसके आसपास के इलाकों में हूती विद्रोहियों के लगातार हमलों ने मध्य पूर्व की स्थिति को बेहद गंभीर बना दिया है। सऊदी के कई प्रमुख हवाई अड्डों पर ड्रोन और मिसाइल दागे जाने की खबर है, जिसके बाद सुरक्षा कारणों से दो बड़े एयरपोर्ट्स को अस्थायी तौर पर बंद करना पड़ा है। इस ताजा खतरे का सीधा असर भारत और खाड़ी देशों के बीच यात्रा करने वाले यात्रियों पर पड़ा है। भारत से सऊदी अरब जाने वाली कई उड़ानों को अचानक रद्द करना पड़ा है, जिससे हजारों यात्री हवाई अड्डों पर फंस गए हैं और अनिश्चितता का माहौल बन गया है।
इन हमलों की चपेट में आने के डर से एयरलाइंस कंपनियों ने तुरंत कड़े कदम उठाए हैं। दिल्ली से रियाद के लिए उड़ान भरने वाली एअर इंडिया की एक फ्लाइट को आसमान से ही वापस दिल्ली लौटना पड़ा। विमान के अचानक लौटने से यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई और एयरलाइन स्टाफ ने स्थिति को संभालते हुए यात्रियों को जरूरी सहायता प्रदान की। इसके अलावा, एयर इंडिया एक्सप्रेस और इंडिगो जैसी प्रमुख विमानन कंपनियों ने भी आगामी 10 अक्टूबर तक रियाद के लिए अपनी सभी उड़ानों को रद्द करने का बड़ा फैसला लिया है। अधिकारियों का कहना है कि यात्रियों की जान की सुरक्षा सर्वोपरि है और हालात सुधरने तक उड़ानें बहाल नहीं की जाएंगी।
रियाद एयरपोर्ट बंद होने से बढ़ी यात्रियों की मुश्किलें
सऊदी अरब के रक्षा सूत्रों के अनुसार, हूती विद्रोहियों द्वारा दागे गए ड्रोन और मिसाइलों को रोकने के लिए एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय किए गए थे, लेकिन कुछ हमलों ने हवाई अड्डों के बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाया है। शुरुआती रिपोर्ट्स में तीन विदेशी नागरिकों की मौत की भी पुष्टि हुई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हड़कंप मच गया है। रियाद जाने वाले मार्गों पर लगातार मंडरा रहे खतरे को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय विमानन एजेंसियों ने भी एयरस्पेस को लेकर नई गाइडलाइंस जारी की हैं। भारत के नागर विमानन मंत्रालय और विदेश मंत्रालय पूरे घटनाक्रम पर पैनी नजर बनाए हुए हैं ताकि समय रहते भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाला जा सके।
दूसरी ओर, इस तनाव के बीच एक तरफ जहां उड़ानों को रद्द किया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश से रियाद के लिए नई लो बजट फ्लाइट शुरू करने की हालिया घोषणा पर भी संकट के बादल मंडराने लगे हैं। इस नई कनेक्टिविटी से दोनों देशों के बीच व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद थी, लेकिन मौजूदा सैन्य संघर्ष ने इन योजनाओं पर ब्रेक लगा दिया है। यात्रा उद्योग से जुड़े जानकारों का मानना है कि यदि यह तनाव जल्द नहीं थमा, तो खाड़ी देशों के लिए विमान किराए आसमान छू सकते हैं और एयरलाइंस कंपनियों को भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ सकता है।
भारतीय दूतावास की एडवाइजरी और सुरक्षा के कड़े इंतजाम
रियाद में बढ़ते सुरक्षा संकट को देखते हुए भारतीय दूतावास ने वहां रह रहे सभी भारतीय नागरिकों के लिए एक सख्त एडवाइजरी जारी की है। दूतावास ने लोगों से अपील की है कि वे अनावश्यक रूप से घरों से बाहर न निकलें और स्थानीय प्रशासन द्वारा दिए जा रहे सुरक्षा निर्देशों का पूरी तरह से पालन करें। भारत सरकार लगातार सऊदी प्रशासन के संपर्क में है ताकि किसी भी आपात स्थिति में वहां फंसे भारतीयों को सुरक्षित ठिकानों पर पहुंचाया जा सके। जिन यात्रियों के टिकट बुक थे, उन्हें एयरलाइंस की वेबसाइट के जरिए रिफंड या फ्लाइट रिशेड्यूल कराने की सलाह दी जा रही है।
जमीनी हकीकत यह है कि रियाद और अन्य प्रमुख शहरों में इस समय डर और एहतियात का माहौल है। बाजार और सार्वजनिक स्थल सूने पड़ने लगे हैं और लोग केवल बेहद जरूरी कामों के लिए ही बाहर आ रहे हैं। हूती हमलों के इस नए दौर ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि खाड़ी देशों की सुरक्षा स्थिति कितनी नाजुक है। 'द फ्रीलान्स' की टीम इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर रखे हुए है और जैसे ही आधिकारिक स्तर पर कोई नया अपडेट आएगा, पाठकों तक सबसे पहले पहुंचाया जाएगा।
अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और आगे की राह
इस पूरे सैन्य घटनाक्रम के बाद वैश्विक स्तर पर कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है। संयुक्त राष्ट्र और कई बड़े देशों ने हूती हमलों की कड़ी निंदा की है और क्षेत्र में शांति बहाल करने की अपील की है। सऊदी अरब अपनी रक्षात्मक तैयारियों को और मजबूत कर रहा है ताकि नागरिकों और विदेशी मेहमानों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। भारत के यात्रियों और उनके परिजनों के लिए यह समय बेहद चिंताजनक है, लेकिन सरकार के शुरुआती और त्वरित कदमों से लोगों को थोड़ी राहत जरूर मिली है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि विमानन कंपनियां उड़ानों को दोबारा कब से शुरू करने का फैसला लेती हैं।





