बदलते मौसम में डेंगू का बढ़ता प्रकोप और स्वास्थ्य विभाग की चिंता
मानसून के जाने के बाद और मौसम में बदलाव के साथ ही देश के कई इलाकों में मच्छरों का आतंक तेजी से बढ़ गया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों और डॉक्टरों का कहना है कि इस मौसम में जलजमाव के कारण पनपने वाले एडीज मच्छर डेंगू और मलेरिया जैसी गंभीर बीमारियों का बड़ा कारण बन रहे हैं। ग्रामीण और शहरी दोनों ही क्षेत्रों में बुखार के मामलों में लगातार उछाल देखा जा रहा है। सरकारी और निजी अस्पतालों में मरीजों की लंबी कतारें इस बात का सबूत हैं कि जरा सी लापरवाही व्यक्ति को गंभीर स्वास्थ्य संकट में डाल सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, डेंगू का संक्रमण किसी एक इंसान से दूसरे इंसान में नहीं फैलता, बल्कि यह विशेष रूप से एडीज एजिप्टी मच्छर के काटने से होता है। यह मच्छर मुख्य रूप से दिन के समय काटता है और किसी संक्रमित व्यक्ति को काटने के बाद स्वस्थ इंसान को अपना शिकार बनाता है। जैसे-जैसे तापमान में उतार-चढ़ाव आता है, इस मच्छर के पनपने के अनुकूल माहौल बन जाता है, जिससे संक्रमण का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो सितंबर और अक्टूबर का महीना इस बीमारी के लिहाज से सबसे संवेदनशील और पीक सीजन माना जाता है। देश के विभिन्न हिस्सों से लगातार डेंगू के संभावित मरीजों के मिलने की खबरें आ रही हैं। ऐसे में आम जनता के लिए यह बेहद जरूरी हो जाता है कि वे इस बीमारी के शुरुआती लक्षणों को समझें और समय रहते सतर्क हो जाएं, ताकि किसी भी अनहोनी से बचा जा सके।
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पहचानिए डेंगू के 9 प्रमुख लक्षण, जो बनते हैं शरीर के लिए बड़ी आफत
डेंगू के संक्रमण की चपेट में आने पर शरीर में कई तरह के स्पष्ट बदलाव और असहनीय कष्ट महसूस होने लगते हैं। चिकित्सा विशेषज्ञों ने मरीजों में दिखने वाले 9 सबसे प्रमुख और सामान्य लक्षणों को सूचीबद्ध किया है, जिन्हें भूलकर भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। इनमें सबसे पहला और मुख्य लक्षण माथे के आसपास या पूरे सिर में होने वाला गंभीर और असहनीय दर्द है। इसके अलावा, आंखों को हिलाने पर या उनके पिछले हिस्से में चुभन जैसा तेज दर्द महसूस होना भी डेंगू का एक प्रमुख संकेत है।
तीसरा सबसे बड़ा लक्षण मांसपेशियों और जोड़ों में होने वाला भयंकर दर्द है, जिसकी वजह से इस बीमारी को 'ब्रेकबोन्स फीवर' यानी हड्डी तोड़ बुखार के नाम से भी जाना जाता है। इस दर्द के कारण मरीज का उठना-बैठना तक मुश्किल हो जाता है। बुखार शुरू होने के दो से पांच दिन बाद शरीर की त्वचा पर लाल चकत्ते यानी रैश उभरने लगते हैं। इसके साथ ही लगातार जी मिचलाना, उल्टी होना और किसी भी तरह के भोजन को देखने पर खाने की इच्छा बिल्कुल खत्म हो जाना भी इसके आम लक्षणों में शामिल है।
शरीर में अत्यधिक थकान और भारी कमजोरी महसूस होना डेंगू के बाद लंबे समय तक रहने वाली समस्याओं में से एक है। कुछ गंभीर मामलों में नाक या मसूड़ों से हल्का खून आना या शरीर पर आसानी से चोट के नीले-लाल निशान बन जाना भी देखा जाता है। इसके अलावा, पेट में लगातार दर्द या संवेदनशीलता होना इस बात का संकेत है कि संक्रमण शरीर के भीतर अपनी पकड़ मजबूत कर चुका है। इन सभी लक्षणों में से कोई भी संकेत दिखने पर तुरंत चिकित्सीय परामर्श लेना अनिवार्य हो जाता है।
प्लेटलेट्स की गिरावट और हेल्थ इमरजेंसी: कब बन जाती है जानलेवा स्थिति
डेंगू बुखार के दौरान सबसे बड़ा खतरा शरीर में तेजी से घटने वाली प्लेटलेट्स की संख्या होती है। डॉक्टरों के मुताबिक, जैसे-जैसे बुखार आगे बढ़ता है, रक्त में प्लेटलेट्स का स्तर गिरने लगता है, जिससे मरीज की हालत गंभीर हो सकती है। क्रिटिकल केयर विशेषज्ञों का कहना है कि यदि बुखार के साथ-साथ सांस लेने में भारी परेशानी, सीने में लगातार दर्द, अत्यधिक कमजोरी या बेहोशी जैसी स्थिति पैदा हो जाए, तो इसे सामान्य वायरल समझकर घर पर बिल्कुल नहीं बैठना चाहिए। यह सीधे तौर पर एक हेल्थ इमरजेंसी का संकेत होता है।
बुखार के दौरान लगातार उल्टी या दस्त होने के कारण शरीर में पानी की गंभीर कमी यानी डिहाइड्रेशन हो सकता है। बहुत कम पेशाब आना, मुंह का सूखना, चक्कर आना, खड़े होने पर आंखों के आगे अंधेरा छाना या हर वक्त सुस्ती बने रहना शरीर में फ्लूइड्स की खतरनाक कमी को दर्शाता है। ऐसी स्थिति में तुरंत अस्पताल का रुख करना चाहिए। इसके अलावा, उल्टी या मल में खून आना, शरीर पर अचानक गहरे नीले चकत्ते पड़ना, तेज सिरदर्द के साथ गर्दन में अकड़न होना या दौरे पड़ना अत्यंत खतरनाक लक्षण माने जाते हैं।
"बुखार के दौरान यदि मरीज को सांस लेने में दिक्कत, लगातार उल्टी या शरीर पर चकत्ते जैसे गंभीर लक्षण दिखें, तो घर पर इलाज करने के बजाय तुरंत अस्पताल में भर्ती होना चाहिए। थोड़ी सी भी देरी मरीज की जान पर भारी पड़ सकती है।" — डॉ. आशुतोष तिवारी, सीनियर क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ
बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं के लिए अतिरिक्त सावधानी की जरूरत
यूं तो डेंगू और वायरल बुखार किसी भी उम्र के व्यक्ति को अपनी चपेट में ले सकता है, लेकिन कुछ विशेष वर्ग ऐसे हैं जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने के कारण उन्हें अत्यधिक सतर्क रहने की आवश्यकता होती है। इनमें छोटे बच्चे, बुजुर्ग और गर्भवती महिलाएं सबसे ऊपर आते हैं। इन विशेष समूहों में संक्रमण के गंभीर रूप धारण करने की आशंका आम स्वस्थ वयस्कों की तुलना में काफी ज्यादा होती है।
डॉक्टरों की सलाह है कि बदलते मौसम में यदि घर के किसी बच्चे या बुजुर्ग को अचानक तेज बुखार आता है और उनके शरीर में कमजोरी या चकत्ते जैसे लक्षण दिखाई देते हैं, तो स्व-चिकित्सा यानी खुद से मेडिकल स्टोर से दवा लाकर खाने की भूल बिल्कुल न करें। गर्भवती महिलाओं के मामले में थोड़ी सी भी लापरवाही गर्भस्थ शिशु और माता दोनों के स्वास्थ्य के लिए जोखिम भरी साबित हो सकती है। इसलिए किसी भी प्रकार के बुखार को हल्के में न लेते हुए तुरंत योग्य चिकित्सक से परामर्श करना ही एकमात्र सुरक्षित विकल्प है।
एलाइजा टेस्ट की महत्ता और प्लेटलेट्स बढ़ाने के घरेलू व प्राकृतिक उपाय
आम तौर पर लोग बाजार की प्राइवेट लैबोरेटरीज से कार्ड टेस्ट करवाकर प्लेटलेट्स की गिनती के आधार पर डेंगू की पुष्टि कर लेते हैं, लेकिन स्वास्थ्य अधिकारियों का मानना है कि यह तरीका पूरी तरह सटीक नहीं होता। डेंगू के सही और पुख्ता संक्रमण की पहचान के लिए 'एलाइजा टेस्ट' (ELISA Test) को ही सबसे भरोसेमंद और मानक पैमाना माना गया है। इसलिए डॉक्टरों की सलाह है कि बुखार के शुरुआती दिनों में घबराने के बजाय डॉक्टर की देखरेख में सही जांच करवाएं।
रोग से उबरने की प्रक्रिया के दौरान शरीर को भरपूर आराम और पौष्टिक आहार की सख्त जरूरत होती है। डेंगू के इलाज के दौरान पारंपरिक रूप से पपीते के पत्तों का जूस पीने की सलाह दी जाती है, जो प्लेटलेट्स की गिरने वाली रफ्तार को थामने में मददगार माना जाता है। इसके साथ ही प्रचुर मात्रा में तरल पदार्थ, नारियल पानी, जूस और संतुलित भोजन का सेवन करने से शरीर बहुत जल्द अपनी खोई हुई ऊर्जा वापस पा लेता है और रिकवरी तेजी से होती है।








