मौसम के बदलते ही बढ़ा बीमारियों का शिकंजा
देशभर में मौसम के मिजाज में लगातार आ रहे बदलाव ने आम जनजीवन को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। ठंड और गर्मी के इस लुकाछिपी वाले मौसम में वायरल संक्रमण, सर्दी-जुकाम, गले में खराश और सूखी खांसी जैसी समस्याएं आम हो गई हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के मौसम परिवर्तन के दौरान शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्युनिटी पर असर पड़ता है, जिससे लोग बहुत जल्दी मौसमी बीमारियों की चपेट में आ जाते हैं। खासकर छोटे बच्चे और बुजुर्ग इस बदलते मौसम में सबसे ज्यादा संवेदनशील होते हैं।
हाल के दिनों में विभिन्न अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों की ओपीडी में मरीजों की लंबी कतारें देखी जा रही हैं। लोग तेज बुखार, बदन दर्द और जोड़ों में दर्द की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि यह समय लापरवाही बरतने का नहीं है, बल्कि थोड़ी सी भी सुस्ती भारी पड़ सकती है। यदि समय रहते वायरल लक्षणों की पहचान कर उचित इलाज न लिया जाए, तो स्थिति गंभीर हो सकती है।
बदलते मौसम के इस दौर में केवल सामान्य वायरल फीवर ही नहीं, बल्कि डेंगू और मलेरिया जैसे गंभीर मच्छर जनित रोग भी सिर उठाने लगे हैं। हालिया मेडिकल रिपोर्ट्स के अनुसार, कई इलाकों में बुखार के मरीजों की जब गहराई से जांच की गई, तो चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं, जिससे स्वास्थ्य महकमे की नींद उड़ गई है।
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स्वास्थ्य मेलों में उमड़ी मरीजों की भारी भीड़
आम जनता तक स्वास्थ्य सेवाएं आसानी से पहुंचाने के लिए रविवार को देश के विभिन्न हिस्सों में विशेष स्वास्थ्य मेलों और आरोग्य शिविरों का आयोजन किया गया। इन मेलों में सुबह से ही मरीजों का तांता लग गया था। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और सामुदायिक केंद्रों पर डॉक्टरों की विशेष टीमें तैनात की गई थीं, जिन्होंने आने वाले हर मरीज का बारीकी से परीक्षण किया।
आंकड़ों के मुताबिक, इन विशेष मेलों में चौदह सौ से अधिक मरीजों ने पहुंचकर स्वास्थ्य लाभ लिया। इनमें बड़ी संख्या में पुरुष, महिलाएं और मासूम बच्चे शामिल थे। मरीजों को सर्दी, जुकाम, बुखार के अलावा सांस लेने में तकलीफ और जोड़ों के दर्द की समस्या के लिए दवाइयां दी गईं। इसके साथ ही, कई जगहों पर गर्भवती महिलाओं और बच्चों के नियमित टीकाकरण का काम भी सुचारू रूप से पूरा किया गया।
स्वास्थ्य शिविरों में केवल ओपीडी सेवाएं ही नहीं दी गईं, बल्कि हेपेटाइटिस, टीबी और नेत्र रोगों की जांच के लिए भी विशेष काउंटर बनाए गए थे। आयुष्मान भारत योजना के तहत पात्र लाभार्थियों के गोल्डन कार्ड भी मौके पर ही बनाकर वितरित किए गए, जिससे जरूरतमंदों को बड़ी राहत मिली।
पांच बुखार पीड़ितों में डेंगू की पुष्टि
स्वास्थ्य मेलों और अस्पतालों में आने वाले मरीजों की जब प्रयोगशाला में जांच कराई गई, तो कुछ मामलों ने डॉक्टरों और अधिकारियों को चिंता में डाल दिया। रुटीन जांच के दौरान पांच गंभीर बुखार पीड़ितों में डेंगू संक्रमण की पुष्टि हुई है। डेंगू की पुष्टि होते ही स्वास्थ्य विभाग की लोकल यूनिट एक्टिव हो गई है और संबंधित इलाकों में सैनिटाइजेशन व एंटी-लार्वा छिड़काव का काम शुरू कर दिया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस मौसम में घरों के आसपास पानी जमा होने के कारण मच्छरों का पनपना बहुत आम हो जाता है। यही कारण है कि डेंगू और चिकनगुनिया जैसे रोग तेजी से फैलते हैं। जिन मरीजों में डेंगू की पुष्टि हुई है, उनका विशेष उपचार शुरू कर दिया गया है और डॉक्टरों की एक टीम लगातार उनके स्वास्थ्य पर नजर बनाए हुए है।
"मौसम में आ रहे बदलाव के कारण वायरल संक्रमण के मामलों में तेजी आई है। हालांकि हमारी टीमें पूरी तरह मुस्तैद हैं और हर संदिग्ध मरीज की समय पर जांच व इलाज सुनिश्चित किया जा रहा है। डेंगू के मामलों को देखते हुए फॉगिंग और साफ-सफाई के निर्देश दे दिए गए हैं।" — मुख्य चिकित्सा अधिकारी, स्वास्थ्य विभाग
स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की ओर से एडवायजरी जारी
बढ़ते मामलों को देखते हुए जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने आम जनता के लिए एक विस्तृत एडवायजरी जारी की है। लोगों से अपील की गई है कि वे अपने घरों के आसपास पानी जमा न होने दें और कूलर, गमलों या टंकियों की नियमित सफाई करें। रात को सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें और पूरी बांह के कपड़े पहनें ताकि मच्छरों के काटने का जोखिम कम किया जा सके।
डॉक्टरों की सलाह है कि यदि किसी को भी तीन दिन से ज्यादा समय तक लगातार बुखार रहता है, शरीर में तेज दर्द महसूस होता है या कमजोरी लगती है, तो वे तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर जाकर डॉक्टर से परामर्श लें। अपनी मर्जी से मेडिकल स्टोर से दवा लेकर खाने से बचें, क्योंकि कई बार यह खतरनाक साबित हो सकता है।
कुल मिलाकर, मौसम की यह करवट जहां एक ओर सुहावना अहसास करा रही है, वहीं दूसरी ओर स्वास्थ्य मोर्चे पर चुनौती भी खड़ी कर रही है। ऐसे में सतर्कता और एहतियात ही बचाव का सबसे बड़ा हथियार है। प्रशासन की ओर से लगातार निगरानी रखी जा रही है ताकि किसी भी बीमारी को महामारी बनने से रोका जा सके।







