नई दिल्ली/तेहरान: वैश्विक भू-राजनीति में एक बार फिर तनाव का पारा सातवें आसमान पर है। दुनिया की तेल धमनियों में शुमार होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) को लेकर ईरान ने एक ऐसा दांव खेला है जिसने व्हाइट हाउस से लेकर पेंटागन तक हलचल मचा दी है। 'द फ्रीलान्स' के फील्ड डेस्क को अंतरराष्ट्रीय खुफिया और कूटनीतिक सूत्रों से मिले इनपुट के मुताबिक, तेहरान ने इस बेहद संवेदनशील समुद्री मार्ग को खोलने के लिए सात कड़ी शर्तें रखी हैं। साथ ही, अमेरिका की तरफ से किसी भी संभावित सैन्य कार्रवाई (Military Action) का ईंट का जवाब पत्थर से देने का ऐलान कर दिया है।
होर्मुज स्ट्रेट का सामरिक महत्व और ताजा संकट
फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी को जोड़ने वाला होर्मुज स्ट्रेट दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल गलियारा है। वैश्विक कच्चे तेल के व्यापार का एक बड़ा हिस्सा इसी संकरे रास्ते से गुजरता है। पिछले कुछ हफ्तों से लगातार बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच तीखे बयानों के बाद से इस रास्ते की सुरक्षा पर बड़ा संकट मंडरा रहा है। ईरान के इस नए सात-सूत्रीय प्रस्ताव ने इस वैश्विक संकट को एक नए मोड़ पर ला खड़ा किया है, जहां एक तरफ कूटनीति के दरवाजे खुले रखने की बात है, तो दूसरी तरफ युद्ध के बादल भी घने होते जा रहे हैं।
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ईरान की '7 शर्तें और 7 दिन' वाला प्लान
हमारी पड़ताल के अनुसार, तेहरान ने मध्यस्थ देशों के जरिए अमेरिका और उसके पश्चिमी सहयोगियों के सामने एक हफ्ते (7 दिन) की समयसीमा के साथ अपनी शर्तें रखी हैं। इन शर्तों में मुख्य रूप से आर्थिक प्रतिबंधों को हटाने, ईरानी संपत्तियों की जब्ती पर रोक, और इस क्षेत्र में अमेरिकी नौसेना की आक्रामक गश्त को सीमित करने जैसी मांगें शामिल हैं। तेहरान का स्पष्ट संदेश है कि यदि इन सात दिनों के भीतर उसकी शर्तों पर सकारात्मक रुख नहीं अपनाया गया, तो होर्मुज स्ट्रेट पूरी तरह बंद या अत्यधिक जोखिम भरा बना रहेगा।
परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंध और वाशिंगटन की प्रतिक्रिया
इस पूरे घटनाक्रम के पीछे केवल समुद्री मार्ग का नियंत्रण ही नहीं, बल्कि ईरान का विवादित परमाणु कार्यक्रम और उस पर लादे गए कर्ष प्रतिबंध भी हैं। अमेरिकी प्रशासन इन शर्तों के सामने झुकने से साफ इंकार कर रहा है। पेंटागन के वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि इस तरह के अल्टीमेटम के आगे झुकने से अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में अमेरिका की साख को धक्का लगेगा। यही वजह है कि अमेरिकी सेना क्षेत्र में अपने युद्धपोतों और सैन्य साजो-सामान को लगातार पुख्ता कर रही है, जिससे टकराव की आशंका और गहरी हो गई है।
क्या कहते हैं अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ?
"होर्मुज पर ईरान का यह कदम एक साथ कूटनीतिक दबाव बनाने और अपनी सैन्य तैयारियों को परखने की रणनीति है। यदि अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता असफल रहती है, तो कच्चे तेल की कीमतों में बेतहाशा उछाल आ सकता है जिसका सीधा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।" - वरिष्ठ भू-राजनीतिक विश्लेषक
भविष्य के प्रभावों की बात करें तो अगले कुछ दिन यह तय करने में निर्णायक साबित होंगे कि दुनिया एक बड़े ऊर्जा संकट या युद्ध की ओर बढ़ती है या फिर कूटनीतिक मेज पर कोई समाधान निकलता है। 'द फ्रीलान्स' इस भू-राजनीतिक उथल-पुथल पर लगातार अपनी पैनी नजर बनाए रखेगा।







