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देशपढ़ने में समय: 5 मिनट

सावधान! डेंगू-मलेरिया का खतरनाक हमला: मरीजों के खून में प्लेटलेट्स घटकर पहुंची महज 10 हजार तक, ये लक्षण हैं जानलेवा

मानसून के बाद जगह-जगह हुए जलभराव और गंदगी के कारण डेंगू और मलेरिया का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है। संक्रमण की चपेट में आने वाले मरीजों की प्लेटलेट्स काउंट खतरनाक रूप से गिरकर 10 हजार तक पहुंच गई है, जिससे डॉक्टरों की चिंता बढ़ गई है।
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नेशनल डेस्क, द फ्रीलांस
राष्ट्रीय संपादकीय ब्यूरो•5 अक्टूबर 2026 • अपडेटेड•34
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सावधान! डेंगू-मलेरिया का खतरनाक हमला: मरीजों के खून में प्लेटलेट्स घटकर पहुंची महज 10 हजार तक, ये लक्षण हैं जानलेवा
📷 सावधान! डेंगू-मलेरिया का खतरनाक हमला: मरीजों के खून में प्लेटलेट्स घटकर पहुंची महज 10 हजार तक, ये लक्षण हैं जानलेवा — मुख्य घटनाक्रमफोटो साभार: रॉयटर्स / एजेंसीज़ / सोशल मीडिया

खबर की बड़ी बातें (Key Highlights)

  • बारिश के बाद जगह-जगह हुए जलभराव से डेंगू और मलेरिया फैलाने वाले एडीज मच्छरों की तादाद तेजी से बढ़ रही है।
  • संक्रमण के गंभीर मामलों में मरीजों की प्लेटलेट्स संख्या ढाई-चार लाख से लुढ़क कर महज 10 हजार तक पहुंच रही है।
  • त्वचा पर लाल चकत्ते, मसूड़ों से खून आना और अत्यधिक कमजोरी जैसे लक्षणों को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है।

मानसून के बाद जलभराव बना जी का जंजाल

देश के कई हिस्सों में मानसून की विदाई और उसके बाद हुई झमाझम बारिश के चलते गंभीर स्वास्थ्य संकट खड़ा हो गया है। मौसम के बदलते मिजाज और जगह-जगह जमा हुए गंदे पानी ने मच्छरों के पनपने के लिए अनुकूल माहौल तैयार कर दिया है। इसका सीधा असर आम जनता की सेहत पर पड़ रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि जलभराव वाली जगहों पर डेंगू और मलेरिया के वेक्टर तेजी से पनप रहे हैं, जिससे संक्रमण के मामलों में भारी उछाल दर्ज किया जा रहा है।

हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ग्रामीण और शहरी दोनों ही इलाकों में बुखार के मरीजों की संख्या में अचानक बढ़ोतरी हुई है। लोग इसे मामूली वायरल समझकर नजरअंदाज कर रहे हैं, जो बाद में जानलेवा साबित हो सकता है। चिकित्सा जानकारों का कहना है कि यदि शुरुआती दौर में ही बुखार की सही जांच न कराई जाए, तो स्थिति तेजी से नियंत्रण से बाहर हो जाती है। घरों के आसपास जरा सा भी पानी जमा होना इस बड़ी आफत की मुख्य वजह बन रहा है।

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प्लेटलेट्स काउंट में भारी गिरावट से डॉक्टरों की बढ़ी चिंता

डेंगू और मलेरिया के मौजूदा मामलों में सबसे डराने वाली बात मरीजों के खून में प्लेटलेट्स की संख्या का तेजी से कम होना है। आमतौर पर एक स्वस्थ मनुष्य के शरीर में प्लेटलेट्स का सामान्य काउंट ढाई लाख से चार लाख के बीच होता है। हालांकि, मौजूदा दौर में सामने आ रहे मामलों में यह संख्या गिरकर सीधे दस हजार तक आ गई है। प्लेटलेट्स का इस स्तर तक लुढ़कना शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को पूरी तरह तोड़ देता है और मरीज की जान पर बन आती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी कम प्लेटलेट्स वाले मरीजों को फौरन अस्पताल में भर्ती कर प्लेटलेट्स चढ़ाने की आवश्यकता पड़ रही है। यदि समय रहते उचित कदम न उठाए जाएं, तो यह स्थिति आंतरिक रक्तस्राव और अन्य अंगों के फेल होने का कारण बन सकती है। चिकित्सकों ने साफ किया है कि इस बार संक्रमण का असर सीधे तौर पर रक्त कोशिकाओं पर पड़ रहा है, जिससे रिकवरी में भी अधिक समय लग रहा है।

चिकित्सकों की चेतावनी: इन खतरनाक लक्षणों को न करें नजरअंदाज

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, डेंगू और मलेरिया के शुरुआती लक्षणों को पहचानना बेहद जरूरी है। कई बार लोग सामान्य बुखार समझकर घरेलू नुस्खे अपनाते रहते हैं, जिससे बीमारी अंदर ही अंदर गंभीर रूप ले लेती है। यदि किसी व्यक्ति को तेज बुखार के साथ शरीर में भयंकर दर्द, अत्यधिक सुस्ती और चक्कर आने की शिकायत हो, तो उसे तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

"डेंगू के मरीज के खून में प्लेटलेट्स काउंट का दस हजार तक पहुंच जाना बेहद गंभीर और चिंताजनक स्थिति है। ऐसे मामलों में मरीजों को तत्काल प्लेटलेट्स चढ़ाने की जरूरत पड़ रही है और समय पर इलाज न मिलना जानलेवा हो सकता है।" — डॉ. सीपी सिंह, आईएमए के पूर्व अध्यक्ष एवं जिज्ञासा अस्पताल के चेयरमैन

विशेषज्ञों ने यह भी चेताया है कि केवल बुखार उतर जाने से यह नहीं मान लेना चाहिए कि खतरा टल गया है। प्लेटलेट्स का गिरना और शरीर का टूटना बुखार उतरने के बाद भी जारी रह सकता है, इसलिए पूरी तरह सतर्क रहने की आवश्यकता है।

त्वचा पर चकत्ते और ब्लीडिंग जैसे संकेत हैं हेल्थ इमरजेंसी

जब शरीर में डेंगू या मलेरिया का संक्रमण खतरनाक स्तर पर पहुंच जाता है, तो शरीर कई तरह के चेतावनी भरे संकेत देने लगता है। इनमें त्वचा पर लाल रंग के चकत्ते उभरना, शरीर पर आसानी से नील पड़ जाना, मसूड़ों या नाक से खून आना प्रमुख हैं। इसके अलावा कुछ मामलों में मल या पेशाब के साथ खून आने की शिकायत भी दर्ज की जा रही है, जो एक स्पष्ट हेल्थ इमरजेंसी का संकेत है।

फिजीशियन डॉ. नितिन बत्रा का कहना है कि अगले कुछ दिनों तक यदि किसी को भी लगातार बुखार बना रहता है, तो उसे अपनी मर्जी से कोई भी दवा खाने के बजाय चिकित्सकीय परामर्श ही लेना चाहिए। गलत दवाइयों का सेवन प्लेटलेट्स को और तेजी से गिरा सकता है। समय रहते संक्रमण का पता चल जाने से खून में प्लेटलेट्स के खतरनाक स्तर तक गिरने को रोका जा सकता है।

साफ-सफाई और बचाव ही इस संकट का एकमात्र उपाय

इस गंभीर स्वास्थ्य संकट से निपटने के लिए प्रशासनिक और व्यक्तिगत दोनों स्तरों पर ठोस कदम उठाने की जरूरत है। घरों में रखे कूलर, गमलों की प्लेट, पुरानी बाल्टियों और खुले बर्तनों में पानी को इकट्ठा न होने दें। विश्व स्वास्थ्य संगठन के दिशा-निर्देशों के मुताबिक, डेंगू फैलाने वाला एडीज मच्छर सिर्फ रात में नहीं बल्कि दिन के समय भी काटता है, इसलिए दिन के वक्त भी मच्छरों से बचाव के उपाय अपनाना अनिवार्य है।

स्थानीय स्तर पर जलभराव की समस्या का समाधान न होना भी इस बीमारी के फैलने में बड़ा कारक बना हुआ है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में स्थानीय प्रशासन द्वारा नियमित रूप से फॉगिंग और एंटी-লার्वा का छिड़काव किया जाना चाहिए। आम नागरिकों को भी यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके आसपास गंदगी या पानी का जमाव न हो, ताकि इस जानलेवा बीमारी के चक्र को तोड़ा जा सके।

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