मौसम बदलते ही मंडराने लगा डेंगू का खतरा और प्लेटलेट्स घटने का डर
हर साल जब भी मौसम करवट बदलता है, अस्पतालों की ओपीडी में बुखार और कमजोरी के मरीजों की संख्या अचानक बढ़ने लगती है। वर्तमान समय में भी विभिन्न वायरल संक्रमणों के साथ-साथ डेंगू के मामलों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। एडीज मच्छर के काटने से फैलने वाला यह वायरल बुखार शरीर को अंदर से तोड़ देता है। इसके शुरुआती लक्षणों में अचानक तेज सिरदर्द, आंखों के पीछे खिंचाव, जोड़ों में दर्द और अत्यधिक थकान शामिल हैं। सबसे डराने वाली बात यह होती है कि इस बीमारी के दौरान मरीज के खून में प्लेटलेट्स का स्तर बहुत तेजी से नीचे गिरने लगता है, जिसे देखकर मरीज और उनके परिवार वाले घबरा जाते हैं।
प्लेटलेट्स गिरने की इस खबर के साथ ही बाजार और सोशल मीडिया पर कई तरह के घरेलू नुस्खे और दावे तैरने लगते हैं। कोई कहता है कि फलां जूस पीने से रातों-रात प्लेटलेट्स आसमान छूने लगेंगे, तो कोई किसी खास दूध को रामबाण इलाज बता देता है। लेकिन चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि इनमें से कई बातें सिर्फ भ्रम हैं और लोग बिना पूरी सच्चाई जाने इनका अंधाधुंध इस्तेमाल करने लगते हैं। यह जानना बेहद जरूरी है कि डेंगू के इलाज में कौन से नुस्खे वाकई काम करते हैं और किन बातों से सिर्फ भ्रम फैलता है।
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पपीते के पत्तों के जूस का सच: क्या वाकई तेजी से बढ़ाता है प्लेटलेट्स?
डेंगू के नाम पर सबसे ज्यादा जिस घरेलू उपाय की चर्चा होती है, वह है पपीते के पत्तों का रस। ऐसा माना जाता है कि इसका जूस पीते ही प्लेटलेट्स का ग्राफ ऊपर उठने लगता है। विशेषज्ञों के अनुसार, पपीते के पत्तों में पपेन और चाइमोपपेन जैसे शक्तिशाली एंजाइम और एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं। ये तत्व शरीर में प्लेटलेट्स को तेजी से टूटने से रोकने और उनके निर्माण में कुछ हद तक मदद जरूर करते हैं। इसके अलावा यह डेंगू के दौरान होने वाले बदन दर्द और मांसपेशियों की जकड़न से भी राहत दिलाता है।
हालांकि, डॉक्टरों का यह भी साफ कहना है कि पपीते के पत्तों का रस कोई जादुई सिरप नहीं है जो प्लेटलेट्स की कमी को अकेले चुटकियों में ठीक कर दे। इसे एक सहायक आहार के रूप में देखा जाना चाहिए, न कि किसी मेडिकल ट्रीटमेंट का विकल्प। यदि किसी मरीज की स्थिति ज्यादा गंभीर है और प्लेटलेट्स खतरनाक स्तर तक गिर चुके हैं, तो केवल पपीते के पत्तों के भरोसे रहना भारी भूल साबित हो सकता है। इसके सेवन से पहले हमेशा अपने डॉक्टर से परामर्श करना चाहिए, खासकर यदि मरीज पहले से ही अन्य दवाइयां ले रहा हो.
बकरी के दूध और कीवी की सच्चाई: पाचन और रिकवरी में कैसे हैं मददगार?
डेंगू के बुखार के दौरान शरीर का पाचन तंत्र बेहद कमजोर हो जाता है। ऐसे में सामान्य गाय या भैंस का भारी दूध पचने में मुश्किल पैदा कर सकता है। यही वजह है कि पारंपरिक रूप से बकरी के दूध को बेहतर विकल्प माना जाता है। बकरी का दूध आसानी से पच जाता है और इसमें मौजूद सेलेनियम तथा अन्य मिनरल्स शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्युनिटी को मजबूत करने में मदद करते हैं। लेकिन इसके बावजूद, इसे किसी भी तरह से प्लेटलेट्स बढ़ाने वाली दवा या अचूक इलाज नहीं माना जाना चाहिए। यह केवल एक पौष्टिक आहार है जो शरीर को ताकत देता है।
ठीक इसी तरह, कीवी फल को लेकर भी लोगों में खासा उत्साह रहता है। कीवी में विटामिन सी, विटामिन ई, पोटैशियम और भरपूर एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं। डेंगू से उबरने के दौरान यह फल शरीर की कमजोरी को दूर करने और इलेक्ट्रोलाइट संतुलन बनाए रखने में बहुत मदद करता है। लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का यह स्पष्ट मत है कि केवल कीवी खाने से प्लेटलेट्स रातों-रात नहीं बढ़ जाते, बल्कि यह रिकवरी की प्रक्रिया को तेज करने का एक अच्छा माध्यम भर है।
नारियल पानी की भूमिका और शरीर में पानी की कमी का खतरा
तेज बुखार, कंपकंपी और अत्यधिक पसीने के कारण डेंगू के मरीजों के शरीर में पानी की भारी कमी हो जाती है, जिसे डिहाइड्रेशन कहते हैं। इस स्थिति में शरीर के भीतर इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बिगड़ जाता है, जो स्थिति को और गंभीर बना सकता है। ऐसी अवस्था में नारियल पानी किसी वरदान से कम साबित नहीं होता है। इसमें मौजूद नेचुरल ग्लूकोज और मिनरल्स मरीज की थकान और कमजोरी को तुरंत दूर करके उसे जरूरी ऊर्जा प्रदान करते हैं।
नारियल पानी शरीर को अंदर से हाइड्रेट रखता है और यूरिन के जरिए टॉक्सिन्स को बाहर निकालने में मदद करता है। इसके बावजूद, यह बात गांठ बांध लेनी चाहिए कि नारियल पानी भी सीधे तौर पर प्लेटलेट्स काउंट को नहीं बढ़ाता है। इसका मुख्य काम शरीर में पानी की कमी को पूरा करना और ऊर्जा बनाए रखना है, ताकि शरीर खुद इस संक्रमण से लड़ने के लिए मजबूत बन सके।
केवल घरेलू नुस्खों पर निर्भर रहना कितना खतरनाक?
सबसे बड़ा मिथक जो समाज में फैला हुआ है, वह यह है कि मरीज को अस्पताल ले जाने के बजाय केवल बकरी का दूध, पपीते के पत्ते और नारियल पानी पिलाकर पूरी तरह ठीक किया जा सकता है। डॉक्टर बार-बार चेतावनी देते हैं कि डेंगू एक गंभीर और अप्रत्याशित बीमारी है, जिसमें लापरवाही जानलेवा बन सकती है। घरेलू चीजें केवल मरीज की रिकवरी में सहायता करती हैं, वे बीमारी का पक्का इलाज नहीं हैं।
"डेंगू के दौरान पौष्टिक आहार और घरेलू उपाय रिकवरी में मददगार जरूर होते हैं, लेकिन इसका यह कतई मतलब नहीं है कि मरीज इनसे पूरी तरह ठीक हो जाएगा। लक्षण गंभीर होने पर डॉक्टर की सलाह और समय पर दवा लेना अनिवार्य है।"— स्वास्थ्य विशेषज्ञ, द फ्रीलांस मेडिकल डेस्क
डॉक्टर की सलाह और कब पड़ सकती है अस्पताल की जरूरत
यदि किसी मरीज को अत्यधिक पेट दर्द, लगातार उल्टियां होना, मसूड़ों या नाक से खून आना, बहुत ज्यादा बेचैनी या सांस लेने में तकलीफ जैसे गंभीर लक्षण महसूस हों, तो एक पल की भी देरी किए बिना उसे तुरंत अस्पताल ले जाना चाहिए। ऐसे मामलों में प्लेटलेट्स चढ़ाने या मेडिकल सुपरविजन की सख्त जरूरत होती है। इसलिए अंधविश्वास या सुनी-सुनाई बातों में आने के बजाय हमेशा योग्य चिकित्सक के मार्गदर्शन में ही इलाज कराएं और अपनी सेहत के साथ किसी भी तरह का जोखिम न उठाएं।








