मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विपक्ष का तीखा तेवर
देश की सियासत में चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर घमासान लगातार गहराता जा रहा है। विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए पद से हटाने की मांग तेज कर दी है। इस कड़ी में द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) ने आक्रामक रुख अपनाते हुए साफ कर दिया है कि चुनावी प्रक्रिया में सुधार और पारदर्शिता के लिए बड़े बदलाव जरूरी हैं। पार्टी का मानना है कि मौजूदा व्यवस्था में आम जनता का भरोसा बनाए रखने के लिए आयोग को अपनी कार्यशैली में पूरी पारदर्शिता लानी होगी।
चेन्नई स्थित पार्टी मुख्यालय 'अन्ना अरिवलयम' में एक अहम बैठक आयोजित की गई। इस उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता पार्टी अध्यक्ष और तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने की। बैठक के दौरान चुनाव आयोग के हालिया फैसलों और विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया को लेकर लंबी चर्चा की गई। पार्टी नेताओं ने एक स्वर में कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए कड़े कदम उठाने का समय आ गया है।
चेन्नई में DMK की बैठक में पास हुए चार बड़े प्रस्ताव
पार्टी की इस विशेष बैठक में कुल चार महत्वपूर्ण प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किए गए। इन प्रस्तावों में मुख्य रूप से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को उनके पद से तत्काल हटाने की मांग को प्रमुखता से रखा गया। इसके साथ ही पार्टी ने उनके कार्यकाल के दौरान लिए गए फैसलों की उच्चस्तरीय जांच कराने की भी मांग उठाई है।
बैठक में वरिष्ठ नेताओं ने शिरकत की और मौजूदा राजनीतिक हालात पर अपनी बात रखी। नेताओं का कहना था कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण और चुनाव संचालन के तरीकों को लेकर जो आशंकाएं जताई जा रही हैं, उनका समाधान किया जाना चाहिए। पार्टी ने यह भी तय किया है कि इन तमाम मुद्दों को लेकर देश के राष्ट्रपति को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा जाएगा, जिसमें चुनावी सुधारों की पुरजोर मांग होगी।
विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और बैलेट पेपर की मांग
DMK ने स्पष्ट कर दिया है कि वह 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' (SIR) प्रक्रिया का कड़ा विरोध जारी रखेगी। पार्टी का आरोप है कि इस प्रक्रिया के नाम पर मतदाताओं को भ्रमित किया जा रहा है और कई जगहों से अनियमितताओं की शिकायतें मिल रही हैं। पार्टी नेताओं का तर्क है कि चुनाव प्रणाली को पूरी तरह निष्पक्ष बनाने के लिए ईवीएम की जगह पुराने पारंपरिक बैलेट पेपर से मतदान की व्यवस्था को वापस लाया जाना चाहिए।
बैठक के दौरान डीलिमिटेशन यानी परिसीमन के मुद्दे पर भी गंभीर मंथन हुआ। सूत्रों के अनुसार, यदि केंद्र सरकार परिसीमन बिल को लेकर कोई विशेष सत्र बुलाती है, तो ड्राफ्ट का अध्ययन करने के बाद ही पार्टी अपना आधिकारिक रुख तय करेगी। हालांकि, पार्टी ने संकेत दिए हैं कि यदि सीटों का आवंटन जनसंख्या के बजाय सभी राज्यों में समान रूप से बढ़ाने का प्रावधान होता है, तो पार्टी संसद में सकारात्मक रुख अपना सकती है।
विपक्षी दलों का बढ़ता दबाव और आगामी राजनीतिक रणनीतियां
मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ केवल DMK ही नहीं, बल्कि अन्य विपक्षी दलों और विभिन्न संगठनों ने भी अपने तेवर कड़े कर दिए हैं। दिल्ली से लेकर राज्यों की राजधानियों तक विरोध प्रदर्शनों का दौर जारी है। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि केंद्र सरकार संवैधानिक संस्थाओं का इस्तेमाल करके लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को प्रभावित कर रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह विवाद और तूल पकड़ सकता है। विभिन्न मोर्चों पर किसानों और छात्र संगठनों के भी इस विरोध प्रदर्शन में शामिल होने की खबरें हैं। सरकार और चुनाव आयोग की ओर से इन तमाम आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया आती है, यह देखना बेहद दिलचस्प होगा, लेकिन इतना तय है कि चुनाव सुधारों का मुद्दा अब राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ गया है।
"हम लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए अपनी लड़ाई जारी रखेंगे। चुनाव आयोग जैसी निष्पक्ष संस्थाओं की विश्वसनीयता बनाए रखना देश के संविधान के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है।" — डीएमके नेतृत्व












