ओटीटी प्लेटफॉर्म पर इन दिनों गांव-देहात की पृष्ठभूमि और रोजमर्रा की उठापटक पर आधारित कहानियां दर्शकों को खूब पसंद आ रही हैं। 'पंचायत' जैसे सफल शो से शुरू हुआ यह दौर अब 'दुपहिया' जैसे अनूठे प्रोजेक्ट्स तक पहुंच चुका है। प्राइम वीडियो पर रिलीज हुआ 'दुपहिया' का पहला सीजन पिछले साल काफी चर्चा में रहा था, जिसमें एक गरीब परिवार की जद्दोजहद और शादी में मोटरसाइकिल की मांग जैसे हल्के-फुल्के विषयों को हास्य के साथ दिखाया गया था। अब इसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए मेकर्स इसका दूसरा सीजन लेकर आए हैं, जिसमें गांव की राजनीति के साथ-साथ आज के दौर के गंभीर सामाजिक मुद्दे भी जुड़ गए हैं।
इस बार कहानी वहीं से शुरू होती है जहां पहले सीजन का अंत हुआ था। धड़कपुर गांव के हालात और वहां के किरदारों की उलझनें पहले से कहीं ज्यादा बढ़ चुकी हैं। सीरीज के निर्देशक और लेखकों ने इस बार ग्रामीण भारत की असलियत को थोड़े तीखे व्यंग्य के साथ पेश करने की कोशिश की है। आइए जानते हैं कि इस नए सीजन में क्या कुछ खास देखने को मिलता है और क्या यह दर्शकों की उम्मीदों पर खरा उतर पाता है।
धड़कपुर गांव में इस बार क्या हैं नए संकट?
कहानी के केंद्र में एक बार फिर बनवारी लाल झा (गजराज राव) का परिवार है, जो अपनी टूटी हुई शादी और आर्थिक तंगी के साए में जी रहा है। मास्टर जी की नौकरी जाने के बाद घर की स्थिति बेहद खराब हो चुकी है। उनकी बेटी रोशनी (शिवानी रघुवंशी) एसएससी की परीक्षा की तैयारी में जुटी है, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद सफलता उससे दूर भाग रही है। वहीं, उनका बेटा भूगोल (स्पर्श श्रीवास्तव) अपनी जिंदगी को एक अलग ही दिशा में ले जा चुका है, जिससे उसके पिता बेहद खफा रहते हैं।
इन पारिवारिक परेशानियों के बीच गांव में एक नया बवंडर खड़ा होता है। धड़कपुर में 5G नेटवर्क का टावर लगाने की योजना सामने आती है, जिससे जुड़ी जमीनों पर पैसों की बारिश होने की उम्मीद जगती है। इस बीच, अफवाहों का बाजार गर्म होता है और पूरा गांव एक अजीब सी उलझन में फंस जाता है। दूसरी तरफ, रोशनी अपनी परीक्षा पास करने के लिए शॉर्टकट का रास्ता तलाशती है, जहां उसकी मुलाकात अमावस (भुवन अरोड़ा) और कोचिंग सेंटर चलाने वाले प्रथम कुमार (दिनेश लाल यादव निरहुआ) से होती है।
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पेपर लीक और 5G के खेल में उलझा झा परिवार
कहानी का सबसे बड़ा मोड़ तब आता है जब प्रथम कुमार के जरिए पेपर लीक का मामला सामने आता है। रोशनी अपनी मजबूरी के चलते इस अवैध रास्ते पर कदम रखने को मजबूर हो जाती है। लेकिन इस गैरकानूनी खेल की भनक स्थानीय पुलिस इंस्पेक्टर मिथिलेश (यशपाल शर्मा) को लग जाती है। 5G टावर की राजनीति और पेपर लीक की इस भसड़ के बीच झा परिवार पूरी तरह पिसता नजर आता है।
"हम लोगों ने कोशिश की है कि गांव की कहानियों को बिना किसी बनावट के परोसा जाए। इस बार के सीजन में जो मुद्दे उठाए गए हैं, वे आज के दौर की सच्चाई से जुड़े हुए हैं।" — सोनम नायर, निर्देशक
निर्देशक सोनम नायर ने इस बार कहानी के दायरे को थोड़ा और विस्तृत किया है। हालांकि, इतने सारे किरदारों और उप-कथाओं को एक साथ समेटने के चक्कर में कई बार पटकथा थोड़ी धीमी पड़ जाती है। इसके बावजूद, ग्रामीण परिवेश के ह्यूमर और स्थानीय बोली के पंच दर्शकों को बांधे रखने का काम करते हैं।
कलाकारों की दमदार एक्टिंग और कमियां
अभिनय के मोर्चे पर सीरीज के सभी कलाकारों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। गजराज राव ने एक लाचार पिता और मास्टर की भूमिका को बेहद सहजता से निभाया है। वहीं, भुवन अरोड़ा और शिवानी रघुवंशी की केमिस्ट्री भी स्क्रीन पर अच्छी लगती है। इस सीजन में भोजपुरी स्टार दिनेश लाल यादव 'निरहुआ' की एंट्री ने कहानी को एक अलग ही रंग दिया है, जो अवैध कोचिंग संचालक के रूप में काफी दिलचस्प नजर आते हैं। यशपाल शर्मा हमेशा की तरह अपने सख्त पुलिस वाले के अंदाज में प्रभावित करते हैं।
हालांकि, क्रिटिक्स का यह भी मानना है कि कई किरदारों को एक साथ जगह देने के कारण मुख्य कहानी कई बार अपनी रफ्तार खो देती है। बीच के एपिसोड्स में कहानी थोड़ी लंबी और सुस्त महसूस होती है, लेकिन अंतिम पलों में यह फिर से अपनी गति पकड़ लेती है।
निष्कर्ष: क्या आपको देखनी चाहिए यह सीरीज?
कुल मिलाकर, 'दुपहिया 2' एक ऐसी फैमिली एंटरटेनर सीरीज है जो आपको पूरी तरह बोर नहीं करती। इसके संवाद, पंच लाइनें और छोटे-छोटे कॉमिक मोमेंट्स आपके चेहरे पर मुस्कान ले आएंगे। अगर आपको ग्रामीण पृष्ठभूमि पर बनी कहानियां और व्यंग्य पसंद हैं, तो यह सीरीज वीकेंड पर देखने के लिए एक अच्छा विकल्प साबित हो सकती है। हालांकि, अगर आप कसी हुई थ्रिलर की उम्मीद कर रहे हैं, तो हो सकता है कि इसके कुछ हिस्से आपको थोड़े बिखरे हुए लगें।








