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मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए राहत: बढ़ाई गई डेडलाइन, बीएलओ खुद घर आकर लेंगे दस्तावेज

देशभर में चल रही एसआईआर प्रक्रिया को लेकर निर्वाचन आयोग ने अहम बैठक में कई बड़े फैसले लिए हैं। दिल्ली और महाराष्ट्र में दावे और आपत्तियां दाखिल करने की समय-सीमा बढ़ा दी गई है, जबकि बिहार और बंगाल के छूटे हुए मतदाता भी आसानी से अपना नाम जुड़वा सकेंगे।
The Freelance ब्यूरो
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26 सितंबर 2026 • अपडेटेड
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मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए राहत: बढ़ाई गई डेडलाइन, बीएलओ खुद घर आकर लेंगे दस्तावेज
📷 मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए राहत: बढ़ाई गई डेडलाइन, बीएलओ खुद घर आकर लेंगे दस्तावेज — मुख्य घटनाक्रमफोटो साभार: रॉयटर्स / एजेंसीज़ / सोशल मीडिया

खबर की बड़ी बातें (Key Highlights)

  • दिल्ली और महाराष्ट्र में वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने और आपत्ति दर्ज कराने की समय-सीमा में बड़ा विस्तार किया गया है।
  • दस्तावेजों में गड़बड़ी या मैपिंग न होने पर बीएलओ खुद मतदाताओं के घर जाकर जरूरी कागजात एकत्र करेंगे।
  • मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की अध्यक्षता में हुई इस उच्चस्तरीय बैठक में सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए जाने की पुष्टि की गई।

निर्वाचन आयोग की उच्चस्तरीय बैठक में एसआईआर पर बड़ा मंथन

देशभर की मतदाता सूचियों में सुधार और विशेष पुनरीक्षण प्रक्रिया यानी एसआईआर को लेकर राजनीतिक सरगर्मी के बीच दिल्ली स्थित निर्वाचन सदन में एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की अगुवाई में हुई इस उच्चस्तरीय बैठक में दोनों चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी भी उपस्थित रहे। आयोग ने स्पष्ट किया कि हाल के महीनों में विभिन्न राज्यों में एसआईआर को लेकर लिए गए सभी कदम पूरी तरह से सर्वसम्मति से उठाए गए थे। इस बैठक के बाद आयोग की तरफ से एक विस्तृत प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कई बड़े बदलावों और राहत भरे कदमों की घोषणा की गई है, जिससे आम नागरिकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

हालिया बैठकों और राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों से मिले फीडबैक के आधार पर वोटर लिस्ट के इस बड़े अभियान में कुछ खास प्रशासनिक संशोधन किए गए हैं। खासकर उन लोगों के लिए प्रक्रिया को बेहद आसान बना दिया गया है, जिन्हें दस्तावेजों की कमी या तकनीकी खामियों के चलते नोटिस मिले थे। निर्वाचन आयोग ने यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया का कोई भी पात्र हिस्सा इससे वंचित न रह जाए और हर योग्य नागरिक का नाम मतदाता सूची में सुरक्षित दर्ज हो सके।

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दिल्ली और महाराष्ट्र के मतदाताओं को मिला समय का विस्तार

एसआईआर प्रक्रिया के तहत निर्वाचन आयोग ने दो प्रमुख राज्यों में समय-सीमा को आगे बढ़ाने का फैसला किया है। इसके तहत राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में अब मतदाता सूची के मसौदे पर दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की अंतिम तारीख को बढ़ाकर 30 अक्टूबर, 2026 कर दिया गया है। वहीं, इन सभी प्राप्त आपत्तियों और दावों के निपटारे की समय-सीमा को 30 नवंबर, 2026 तक निर्धारित किया गया है।

इसी तरह, पश्चिमी राज्य महाराष्ट्र में भी चुनावी तैयारियों और दावों की प्रक्रिया को सुचारू रूप से चलाने के लिए वक्त बढ़ाया गया है। महाराष्ट्र में अब दावे और आपत्तियां जमा करने की आखिरी तारीख 12 अक्टूबर, 2026 तय की गई है, जबकि इसके निस्तारण की प्रक्रिया 10 नवंबर, 2026 तक पूरी कर ली जाएगी। आयोग के इन फैसलों से स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक अमले और राजनीतिक दलों को भी पर्याप्त समय मिल सकेगा।

अब बीएलओ खुद जाएंगे घर, आम लोगों को दफ्तरों के चक्कर से राहत

वोटर लिस्ट के मिलान के दौरान जिन नागरिकों के नाम मैप नहीं हो पाए हैं या जिनके रिकॉर्ड में किसी प्रकार की विसंगति पाई गई है, उन्हें अब निर्वाचन अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर नहीं काटने होंगे। आयोग के नए निर्देशों के मुताबिक, बूथ लेवल ऑफिसर यानी बीएलओ खुद ऐसे मतदाताओं के आवास पर जाएंगे और जरूरी दस्तावेज एकत्र करेंगे। इन सभी दस्तावेजों को तुरंत आधिकारिक पोर्टल ईसिनेट पर अपलोड किया जाएगा, जिसके आधार पर इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर अपना निर्णय लेंगे।

विशेष मामलों को छोड़कर आम नागरिकों को सुनवाई के लिए व्यक्तिगत रूप से ईआरओ या एआरओ के दफ्तर में हाजिर होने की कोई जरूरत नहीं होगी। यदि किसी विशेष मामले में सुनवाई की आवश्यकता पड़ी भी, तो उसे ऑनलाइन माध्यम से ही पूरा किया जाएगा। इसके अलावा, जिला निर्वाचन अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए गए हैं कि वे रैन बसेरों, झुग्गी बस्तियों और गरीब इलाकों में विशेष कैंप या हेल्प डेस्क लगाएं, ताकि मजदूर और बेघर लोग भी आसानी से अपनी औपचारिकताएं पूरी कर सकें।

विशेष कमेटियों के जरिए होगी तकनीकी और प्रशासनिक समीक्षा

प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और त्रुटिहीन बनाने के लिए आयोग ने एक मजबूत तकनीकी निगरानी तंत्र तैयार किया है। सीनियर डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर की अगुवाई में एक विशेष समिति का गठन किया गया है, जिसमें आईआईटी और आईआईआईटी के स्वतंत्र तकनीकी विशेषज्ञ भी शामिल हैं। यह समिति ईसिनेट पोर्टल की पूरी कार्यप्रणाली की गहन समीक्षा करेगी और यह सुनिश्चित करेगी कि सारा सिस्टम कानूनी प्रावधानों के मुताबिक काम कर रहा है या नहीं।

"देशभर में मतदाता सूची के पुनरीक्षण का यह अभियान पूरी पारदर्शिता और संविधान के दायरे में रहकर चलाया जा रहा है। हमारा मुख्य उद्देश्य हर एक पात्र नागरिक के मताधिकार की रक्षा करना है और इसके लिए सभी जरूरी प्रशासनिक कदम उठाए जा रहे हैं।"— निर्वाचन आयोग के वरिष्ठ अधिकारी

पोर्टल और आईटी मॉड्यूल से जुड़ी हर नई योजना पर अमल करने से पहले अब प्रशासनिक अधिकारियों की समिति में विचार-विमर्श किया जाएगा, ताकि मैदानी स्तर पर काम करने वाले कर्मचारियों को किसी भी तरह की तकनीकी अड़चन का सामना न करना पड़े।

बिहार और बंगाल समेत अन्य राज्यों के छूटे मतदाता ऐसे जुड़वाएं नाम

बिहार, पश्चिम बंगाल और देश के अन्य हिस्सों में एसआईआर की प्रक्रिया पहले ही पूरी की जा चुकी है। हालांकि, आयोग ने साफ किया है कि यदि किसी भी नागरिक का नाम इस पूरी प्रक्रिया के दौरान या उसके बाद मतदाता सूची से छूट गया है, तो वे निराश न हों। ऐसे युवा और पहली बार मताधिकार का प्रयोग करने वाले लोग सीधे अपने संबंधित ईआरओ के पास आवेदन जमा कर अपना नाम सूची में शामिल करवा सकते हैं।

गोवा जैसे राज्यों में तो मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने स्पष्ट निर्देश जारी कर दिए हैं कि बीएलओ घर-घर जाकर उन लोगों के फॉर्म भरवाएं जिनके नाम अभी तक नहीं जुड़ सके हैं। इसी तर्ज पर अन्य राज्यों में भी विशेष अभियान चलाए जाने की योजना है, ताकि अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन से पहले कोई भी योग्य मतदाता पीछे न छूटे।

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