नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश के करोड़ों नौकरीपेशा लोगों के लिए कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी ईपीएफओ से जुड़े नियम बेहद अहम माने जाते हैं। इन दिनों इंटरनेट पर ईपीएफओ के नए नियमों और वेतन सीमा को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं। क्या आपकी सैलरी बढ़ने पर पीएफ का पैसा ज्यादा कटेगा या कम, इसको लेकर आम लोगों के मन में कई सवाल हैं। हमारी टीम ने जब इस पूरे मामले की गहराई से पड़ताल की, तो कई चौकाने वाले तथ्य सामने आए जो सीधे तौर पर आपकी जेब और भविष्य की बचत से जुड़े हैं।
सबसे पहले बात करते हैं वेतन सीमा और पीएफ कटने के नए गणित की। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यदि किसी कर्मचारी की मूल सैलरी बीस हजार रुपये है, तो केवल ईपीएफ खाते में पैसा जमा होता है। लेकिन जैसे ही वेतन सीमा पच्चीस हजार रुपये तक पहुँचने की बात आती है, तो नियमों के तहत पीएफ कटौती का दायरा बदल जाता है। हालांकि, इसको लेकर सरकार की तरफ से अभी तक कोई अंतिम आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं की गई है, लेकिन बाजार में इसको लेकर चर्चाएं तेज हैं। कर्मचारी यह जानना चाहते हैं कि उनके मासिक वेतन पर इसका सीधा असर कितना पड़ेगा।
कंपनियों पर ईसीआर जमा करने का सख्त दबाव
नियमों की इस कशमकश के बीच ईपीएफओ ने सभी कंपनियों और नियोक्ताओं के लिए एक बेहद सख्त निर्देश जारी किया है। इसके तहत सभी कंपनियों को हर हाल में पंद्रह अक्टूबर से पहले सितंबर महीने का ईसीआर यानी इलेक्ट्रॉनिक चालान कम रिटर्न जमा करना अनिवार्य कर दिया गया है। यदि कोई भी कंपनी इस तय समयसीमा के भीतर पीएफ का पैसा जमा करने से चूक जाती है, तो उस पर भारी वित्तीय जुर्माना लगाया जाएगा। इस सख्ती का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि कंपनियों द्वारा कर्मचारियों के वेतन से काटा गया पीएफ का पैसा समय पर उनके खातों में पहुँचे।
हाल ही में ईपीएफओ ने डेडलाइन को लेकर कुछ राहत भी दी थी, जिससे नियोक्ताओं को अपने कागजात और रिटर्न दुरुस्त करने का थोड़ा अतिरिक्त समय मिल गया था। लेकिन समयसीमा खत्म होने के बाद अब जांच का दायरा और अधिक कड़ा कर दिया गया है। क्षेत्रीय कार्यालयों को यह स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे डिफॉल्टर कंपनियों की पहचान करें और उन पर तुरंत कानूनी कार्रवाई करें। समय पर पीएफ न जमा होने से कर्मचारियों को लोन लेने या अन्य आपातकालीन जरूरतों के समय काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
फरीदाबाद में एबीआरवाई योजना का बड़ा फर्जीवाड़ा
पीएफ नियमों की आड़ में किस तरह से खेल चल रहा है, इसका ताजा उदाहरण हरियाणा के फरीदाबाद से सामने आया है। यहाँ आत्मनिर्भर भारत रोजगार योजना यानी एबीआरवाई के तहत दो करोड़ चौबीस लाख रुपये का भारी फर्जीवाड़ा पकड़ा गया है। जांच में सामने आया कि एक कंपनी ने अपने कर्मचारियों के वेतन से पीएफ का हिस्सा तो काटा, लेकिन कागजों में बड़ी हेराफेरी करके सरकारी अनुदान का भी गलत लाभ उठा लिया। इस तरह के मामलों ने यह साबित कर दिया है कि मैदानी स्तर पर निगरानी तंत्र को और अधिक मजबूत करने की कितनी जरूरत है।
इस फर्जीवाड़े के उजागर होने के बाद स्थानीय स्तर पर काम करने वाले कर्मचारियों में भारी गुस्सा देखा जा रहा है। मजदूरों और कर्मचारियों का कहना है कि कंपनियां कागजों पर तो पीएफ काटने का दिखावा करती हैं, लेकिन कई बार वह पैसा समय पर उनके यूएएन खातों में अपडेट नहीं होता है। जब कर्मचारी अपना पैसा निकालने या ट्रांसफर कराने जाते हैं, तब उन्हें इस तरह की बड़ी गड़बड़ियों का पता चलता है। श्रम विभाग और ईपीएफओ के स्थानीय अधिकारी अब इस पूरे मामले की फोरेंसिक ऑडिट कराने की तैयारी कर रहे हैं ताकि दोषियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई की जा सके।
बिना टैक्स पीएफ निकासी के जरूरी नियम और सावधानियां
इन तमाम प्रशासनिक फेरबदल के बीच एक राहत भरी खबर यह है कि जरूरत पड़ने पर पीएफ का पैसा निकालने पर कोई टैक्स नहीं लगता है। लेकिन इसके लिए कुछ बुनियादी और जरूरी शर्तों का पालन करना अनिवार्य होता है। यदि कोई कर्मचारी पांच साल की निरंतर सेवा पूरी करने से पहले पीएफ का पैसा निकालता है, तो उसे टीडीएस का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा, नौकरी छोड़ने के बाद पीएफ खाते को पूरी तरह बंद करने या पेंशन योजना का लाभ उठाने के लिए सही समय पर फॉर्म भरना बेहद जरूरी होता है।
द फ्रीलान्स की इस जमीनी पड़ताल से यह साफ हो जाता है कि ईपीएफओ से जुड़े नियमों में पारदर्शिता लाने की सख्त जरूरत है। एक तरफ जहाँ सरकार डिजिटल व्यवस्था को बेहतर बनाने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी तरफ फरीदाबाद जैसी घटनाएं सिस्टम की कमियों को उजागर करती हैं। हमारी सलाह यही है कि हर कर्मचारी अपने यूएएन पोर्टल पर जाकर नियमित रूप से अपनी पासबुक की जांच करता रहे। यदि आपके वेतन से हर महीने पीएफ कट रहा है, तो यह सुनिश्चित करना आपकी भी जिम्मेदारी है कि वह पैसा आपके असली भविष्य निधि खाते में पहुँच रहा है या नहीं।






