नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश भर के करोड़ों नौकरीपेशा लोगों और कंपनियों के लिए एक जरूरी और बड़ी खबर सामने आई है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी ईपीएफओ ने सितंबर महीने का ईसीआर यानी इलेक्ट्रॉनिक चालान कम रिटर्न भरने की आखिरी तारीख को बढ़ा दिया है। इस फैसले के बाद देश भर के उन लाखों नियोक्ताओं को राहत मिली है जो तय समय पर अपना रिटर्न दाखिल करने की जद्दोजहद में जुटे थे। द फ्रीलान्स की ग्राउंड पड़ताल के मुताबिक, इस बार समयसीमा में बदलाव इसलिए भी अहम है क्योंकि हाल ही में वेज सीलिंग और अन्य नियमों को लेकर कई तरह के असमंजस की स्थिति बनी हुई थी।
आम तौर पर कंपनियों को हर महीने की तय तारीख तक पिछला पीएफ चालान भरना होता है। ऐसा न करने पर भारी जुर्माना और ब्याज का प्रावधान रहता है। लेकिन इस बार ईपीएफओ ने कंपनियों को अतिरिक्त समय देते हुए डेडलाइन में सीधा बदलाव किया है। आजतक और अमर उजाला समेत कई मीडिया रिपोर्ट्स में इस बात की पुष्टि की गई है कि इस बार ईसीआर फाइल करने के लिए कंपनियों को अतिरिक्त दिन मिल गए हैं। इससे समय पर कागजी कार्रवाई पूरी न कर पाने वाली छोटी और मध्यम श्रेणी की कंपनियों को बड़ी राहत मिलेगी।
कंपनियों और नियोक्ताओं के लिए क्यों जरूरी था यह फैसला
नौकरीपेशा वर्ग के लिए यह समय बहुत संवेदनशील होता है क्योंकि हर महीने की सैलरी से कटने वाला पीएफ समय पर उनके खाते में पहुंचना जरूरी है। जागरण और अन्य सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, वेज सीलिंग के नियमों में बदलाव और तकनीकी अपडेट्स की वजह से इस बार कई कंपनियों के सॉफ्टवेयर में पीएफ गणना को लेकर दिक्कत आ रही थी। अगर समयसीमा नहीं बढ़ाई जाती तो हजारों कंपनियों पर भारी-भरकम जुर्माना लग सकता था, जिसका सीधा असर अंततः कर्मचारियों की व्यवस्था पर भी पड़ सकता था।
विशेषज्ञों का मानना है कि ईपीएफओ का यह कदम व्यापार करने में आसानी यानी ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा देने वाला है। कई नियोक्ताओं ने द फ्रीलान्स की टीम से बातचीत में बताया कि सितंबर महीने के लिए रिटर्न तैयार करने में इस बार कुछ तकनीकी पेचीदगियां आ रही थीं। पोर्टल पर भारी ट्रैफिक और नए नियमों के चलते समय पर डेटा अपलोड करना मुश्किल हो रहा था। ऐसे में समयसीमा का बढ़ना किसी संजीवनी बूटी से कम नहीं है, जिससे कंपनियां बिना किसी हड़बड़ी के अपना काम पूरा कर सकेंगी।
वेतन और पेंशन से जुड़े नए बदलावों का असर
इस बीच, ईपीएफओ की तरफ से कई अन्य योजनाओं और नई स्कीमों पर भी काम चल रहा है। ईटीवी भारत की रिपोर्ट के मुताबिक, पीएफ और पेंशन के दायरे से छूटे कर्मचारियों के लिए भी विभाग लगातार नई सुविधाएं लेकर आ रहा है। अक्टूबर महीने के अंत तक कई पात्र कर्मचारियों को इसका बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है। हालांकि, फिलहाल सबसे बड़ा फोकस सितंबर के ईसीआर को सही समय पर और बिना किसी पेनल्टी के जमा करने पर ही है।
जमीनी स्तर पर हमारे संवाददाताओं ने पाया कि देश भर के विभिन्न शहरों में चार्टर्ड अकाउंटेंट्स और कंपनियों के एचआर विभाग इस बढ़ी हुई डेडलाइन के बाद राहत की सांस ले रहे हैं। सोशल मीडिया और अन्य मंचों पर भी इस बात की चर्चा थी कि यदि 15 अक्टूबर तक रिटर्न नहीं भरा गया तो कड़े निर्देश लागू हो जाएंगे। लेकिन अब डेडलाइन बढ़ने से उन तमाम कंपनियों को पर्याप्त वक्त मिल गया है जो डेटा मिलान के काम में जुटी थीं।
समयसीमा बढ़ने के बाद अब आगे क्या करना होगा
द फ्रीलान्स की पड़ताल साफ कहती है कि भले ही समयसीमा बढ़ा दी गई है, लेकिन नियोक्ताओं को आखिरी तारीख का इंतजार नहीं करना चाहिए। कंपनियों को सलाह दी जाती है कि वे अपना सितंबर का ईसीआर समय रहते पोर्टल पर अपलोड कर दें ताकि किसी भी अंतिम समय की तकनीकी रुकावट से बचा जा सके। कर्मचारी भी अपने एम्प्लॉयर से बात कर यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि उनका पीएफ समय पर जमा हो रहा है या नहीं।
कुल मिलाकर, ईपीएफओ का यह फैसला समय पर लिया गया एक व्यावहारिक कदम है। इससे न केवल कंपनियों पर अनावश्यक जुर्माने का बोझ टला है, बल्कि प्रशासनिक तंत्र और नियोक्ताओं के बीच का तालमेल भी बेहतर हुआ है। द फ्रीलान्स इस पूरे मामले पर आगे भी पैनी नजर बनाए रखेगा और हर छोटे-बड़े अपडेट से अपने पाठकों को लगातार अवगत कराता रहेगा।






