देश की पहली हाइड्रोजन तकनीक पर आधारित ट्रेन
भारतीय रेलवे लगातार आधुनिकता और पर्यावरण अनुकूल परिवहन की दिशा में नए मील के पत्थर स्थापित कर रहा है। इसी कड़ी में देश की सबसे पहली हाइड्रोजन ईंधन आधारित ट्रेन का संचालन शुरू किया गया था। इस महत्वाकांक्षी परियोजना का उद्देश्य कार्बन उत्सर्जन को पूरी तरह से खत्म करना और देश में हरित ऊर्जा आधारित परिवहन को बढ़ावा देना है। रेलवे के इस अनूठे प्रयास की पूरे देश में सराहना हुई थी और इसे तकनीकी रूप से एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा था।
हालांकि, शुरुआत में तकनीकी और ढांचागत खूबियों के बावजूद इस ट्रेन को धरातल पर यात्रियों की कमी जैसी बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। आठ यात्री कोचों वाली इस शक्तिशाली और विशाल ट्रेन की कुल क्षमता करीब छब्बीस सौ यात्रियों को एक साथ ले जाने की है। इसके बावजूद शुरुआती हफ्तों में उम्मीद के मुताबिक यात्री इसे देखने और सफर करने के लिए आगे नहीं आए, जिसने रेलवे प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है।
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यात्रियों की कम संख्या और रूट की चुनौतियां
इस अत्याधुनिक ट्रेन के संचालन के दौरान यह बात सामने आई कि मौजूदा समय सारणी आम जनता की दिनचर्या और यात्रा की जरूरतों के साथ ठीक से मेल नहीं खा रही है। इसके अलावा, जिन ग्रामीण इलाकों से यह ट्रेन गुजरती है, वहां के स्टेशन और हॉल्ट मुख्य आबादी से काफी दूर स्थित हैं। गांवों से इन रेलवे स्टेशनों तक पहुंचने के लिए परिवहन के नियमित साधनों का अभाव है, जिसके कारण यात्रियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ता है।
कई छोटे स्टेशनों पर टिकट काउंटर उपलब्ध न होने के कारण भी लोग इस ट्रेन से दूरी बनाए रखते हैं। स्थानीय यात्रियों के अनुसार, उन्हें अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए अन्य वैकल्पिक और सुगम साधन आसानी से मिल जाते हैं जो सीधे उनके गांवों तक जाते हैं। यही वजह है कि उद्घाटन के बाद के शुरुआती हफ्तों में इस ट्रेन में सफर करने वालों का आंकड़ा बेहद कम रहा और यह लगभग खाली ही दौड़ती नजर आई।
"हाइड्रोजन ट्रेन जैसी आधुनिक तकनीक का संचालन हमारे देश के लिए गौरव की बात है। शुरुआती दौर की कमियों को दूर करने के लिए रूट विस्तार और समय में बदलाव का प्रस्ताव तैयार किया गया है ताकि आम जनता को इसका पूरा लाभ मिल सके।" — रेलवे अधिकारी, दिल्ली मंडल
दिल्ली तक रूट विस्तार और समय सारणी में बदलाव का प्रस्ताव
यात्रियों के इस संकट से निपटने के लिए दिल्ली मंडल के वरिष्ठ अधिकारियों ने स्थानीय स्तर पर मंथन शुरू कर दिया है। रेलवे प्रशासन ने योजना बनाई है कि इस ट्रेन के सफर को सोनीपत तक सीमित रखने के बजाय इसे सीधे देश की राजधानी दिल्ली तक बढ़ाया जाए। इसके साथ ही इसके संचालन के समय में भी अमूलूल परिवर्तन करने का सुझाव दिया गया है ताकि यह अन्य प्रमुख मेल और एक्सप्रेस गाड़ियों से जुड़ सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह ट्रेन सुबह के वक्त सही समय पर सोनीपत पहुंचे तो यात्रियों को आगे की यात्रा के लिए तुरंत दिल्ली जाने वाली अन्य लोकल ट्रेनें और एक्सप्रेस गाड़ियां आसानी से मिल जाएंगी। इसी तरह शाम के समय भी वापसी के वक्त यात्रियों की भारी भीड़ को ध्यान में रखते हुए समय तय किया जा रहा है ताकि दिल्ली और आसपास के इलाकों से लौटने वाले लोग इस हाइड्रोजन ट्रेन का आसानी से लाभ उठा सकें।
पानीपत रूट को शामिल करने पर भी हो रहा है विचार
रेलवे के भीतर एक अन्य वैकल्पिक प्रस्ताव पर भी गंभीरता से विचार चल रहा है। इसके तहत इस हाइड्रोजन ट्रेन को जींद से गोहाना के रास्ते सोनीपत भेजने के बजाय पानीपत के रास्ते होते हुए सोनीपत और दिल्ली तक संचालित किया जा सकता है। पानीपत वाला मार्ग यात्रियों की संख्या के लिहाज से काफी व्यस्त और महत्वपूर्ण माना जाता है, जहां हर समय बड़ी संख्या में मुसाफिर सफर करते हैं।
यदि इस नए और व्यस्त रूट पर ट्रेन का संचालन शुरू होता है, तो इसमें यात्रियों की कमी की समस्या हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी। रेल प्रशासन इस बात का आकलन कर रहा है कि किस रूट पर यात्रियों को सबसे ज्यादा सहूलियत मिलेगी और किस समय सारणी से ट्रेन की लोकप्रियता में इजाफा होगा।
भविष्य की योजनाएं और यात्रियों के लिए उम्मीदें
भारतीय रेलवे का मुख्य उद्देश्य देश के हर कोने में पर्यावरण के अनुकूल परिवहन माध्यमों को लोकप्रिय बनाना है। हाइड्रोजन ट्रेन जैसी योजनाएं देश के हरित ऊर्जा लक्ष्यों को पूरा करने में मील का पत्थर साबित हो सकती हैं। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि शुरुआती दौर में नई तकनीक को अपनाने में कुछ व्यावहारिक दिक्कतें आती हैं, जिन्हें समय के साथ बातचीत और सुधार के जरिए दूर कर लिया जाता है।
आने वाले दिनों में जैसे ही इस ट्रेन को दिल्ली तक विस्तारित किया जाएगा और इसके समय को यात्रियों के अनुकूल बनाया जाएगा, इसमें भारी भीड़ देखने को मिल सकती है। रेलवे की इस नई पहल से न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा बल्कि यात्रियों को एक विश्वस्तरीय और आधुनिक सफर का अनूठा अनुभव भी प्राप्त होगा।





