ऑनलाइन मार्केटप्लेस पर नियमों की अनदेखी पड़ी भारी, FSSAI ने कसी कमर
देशभर में डिजिटल खरीदारी का दायरा तेजी से फैल रहा है, लेकिन इसके साथ ही ग्राहकों की सुरक्षा को ताक पर रखने वाले मामलों में भी इजाफा देखा जा रहा है। इसी कड़ी में देश की शीर्ष खाद्य नियामक संस्था ने एक बड़ा कदम उठाते हुए कई नामी ऑनलाइन कंपनियों के खिलाफ शिकंजा कसा है। बाजार में बिकने वाले खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और उनके विज्ञापनों में किए जाने वाले दावों की लंबे समय से जांच की जा रही थी, जिसके बाद अब जाकर सख्त दंडात्मक कदम उठाए गए हैं।
नियामक संस्था का यह ताजा एक्शन उन तमाम ऑपरेटरों के लिए एक कड़ी चेतावनी है जो तय मानकों को दरकिनार कर अपने प्लेटफॉर्म पर उत्पादों की बिक्री कर रहे थे। पिछले कुछ महीनों से लगातार मिल रही शिकायतों के बाद यह कार्रवाई की गई है, जिससे ऑनलाइन बाजार में खलबली मच गई है।
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किन-किन दिग्गज कंपनियों पर गिरी गाज?
भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण की ओर से जिन पांच प्रमुख ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स को घेरे में लिया गया है, उनमें घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचाने जाने वाले बड़े नाम शामिल हैं। इस सूची में वैश्विक दिग्गज अमेजन और फ्लिपकार्ट के साथ-साथ त्वरित डिलीवरी सेवाएं देने वाली स्विगी इंस्टामार्ट, जेप्टो और ग्रॉसरी सेक्टर की प्रमुख कंपनी बिगबास्केट का नाम भी शामिल है।
इन सभी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर आरोप है कि उन्होंने खाद्य सुरक्षा से जुड़े प्रावधानों का पालन नहीं किया। संस्था की जांच में सामने आया कि इनके जरिए बेचे जाने वाले कुछ खास उत्पादों की गुणवत्ता मानकों के विपरीत थी और उनके विज्ञापनों में बढ़ा-चढ़ाकर ऐसे दावे किए जा रहे थे जो असलियत से कोसों दूर थे।
गुमराह करने वाले दावे और प्रतिबंधित सामानों की बिक्री
प्राधिकरण के अनुसार, यह पूरी कार्रवाई केवल एक उत्पाद तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके दायरे में कई गंभीर अनियमितताएं आती हैं। जांच के दौरान पाया गया कि कुछ लोकप्रिय खाद्य उत्पादों के बारे में ग्राहकों को गलत जानकारी दी जा रही थी। उदाहरण के तौर पर, कुछ विशेष ब्रांड के डेयरी उत्पादों और प्रीमियम खाद्य वस्तुओं की ऑनलाइन लिस्टिंग में भ्रामक विवरण दर्ज किए गए थे।
इतना ही नहीं, कुछ मामलों में तो ऐसे सामानों का डिस्प्ले और बिक्री भी होती पाई गई जिन्हें खाद्य सुरक्षा कानूनों के तहत प्रतिबंधित किया गया है या जो तय मानकों के मुताबिक उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के लिए सही नहीं माने जाते हैं। खाद्य सुरक्षा अधिनियम के सख्त नियमों के तहत अब इन सभी प्लेटफॉर्म्स को कानूनी प्रक्रियाओं का सामना करना पड़ रहा है।
नेस्ले इंडिया के खिलाफ भी चल रही है कानूनी प्रक्रिया
केवल ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स ही नहीं, बल्कि बड़े खाद्य उत्पादक ब्रांड भी नियामक के रडार पर हैं। कुछ समय पहले ही नियामक ने नेस्ले इंडिया के खिलाफ भी कानूनी कार्यवाही शुरू करने की घोषणा की थी। बेबी फूड और इन्फेंट न्यूट्रिशन से जुड़े उत्पादों के सैंपल जब प्रयोगशाला जांच में खरे नहीं उतरे, तब यह कदम उठाया गया।
जांच में शिशु आहार के एक नमूने में जरूरी पोषक तत्वों की मात्रा मानकों से कम पाई गई थी, जबकि अन्य उत्पादों के प्रचार-प्रसार के तौर-तरीकों पर भी सवाल उठाए गए थे। हालांकि संबंधित कंपनी का कहना है कि उनके सभी उत्पाद तय नियमों के अनुरूप हैं और वे नियामक के साथ पूरा सहयोग कर रहे हैं, लेकिन इस तरह की कार्यवाहियों से बाजार में हड़कंप जरूर मच गया है।
"खाद्य सुरक्षा और उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी संस्थान को बख्शा नहीं जाएगा। नियमों का पालन न करने वाले सभी ऑपरेटरों के खिलाफ कानून के मुताबिक सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।" — वरिष्ठ खाद्य सुरक्षा अधिकारी, FSSAI
आम जनता और उपभोक्ताओं के लिए क्या है इसका मतलब?
इस पूरे घटनाक्रम से यह साफ हो जाता है कि डिजिटल माध्यमों से सामान खरीदने वाले ग्राहकों की सुरक्षा अब सर्वोच्च प्राथमिकता बनती जा रही है। जब बड़े प्लेटफॉर्म्स पर इस तरह की पाबंदियां लगती हैं, तो बाजार में एक स्पष्ट संदेश जाता है कि गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की सख्ती से भविष्य में ऑनलाइन मिलने वाले खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार देखने को मिलेगा। आम नागरिकों को भी चाहिए कि वे किसी भी उत्पाद को खरीदने से पहले उसकी पैकेजिंग, निर्माण तिथि और उसमें मौजूद सामग्री की पूरी जांच जरूर कर लें, ताकि वे किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी से बच सकें।







