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महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग का बड़ा फैसला: MPSC ने टाली राज्य सेवा मुख्य परीक्षा, छात्रों के विरोध के बाद उठाया गया कदम

महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) ने अभ्यर्थियों के भारी विरोध और पेपर लीक के आरोपों के बीच 3 अक्टूबर से होने वाली राज्य सेवा मुख्य परीक्षा 2026 समेत कई बड़ी परीक्षाएं स्थगित कर दी हैं। इसके साथ ही आयोग ने राज्य सेवा मुख्य परीक्षा 2025 की उत्तर पुस्तिकाओं का पुनर्मूल्यांकन करने का भी निर्णय लिया है।
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नेशनल डेस्क, द फ्रीलांस
राष्ट्रीय संपादकीय ब्यूरो•29 सितंबर 2026 • अपडेटेड
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महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग का बड़ा फैसला: MPSC ने टाली राज्य सेवा मुख्य परीक्षा, छात्रों के विरोध के बाद उठाया गया कदम
📷 महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग का बड़ा फैसला: MPSC ने टाली राज्य सेवा मुख्य परीक्षा, छात्रों के विरोध के बाद उठाया गया कदम — मुख्य घटनाक्रमफोटो साभार: रॉयटर्स / एजेंसीज़ / सोशल मीडिया

खबर की बड़ी बातें (Key Highlights)

  • महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) ने 3 अक्टूबर 2026 से शुरू होने वाली राज्य सेवा मुख्य परीक्षा को अगले आदेश तक टाल दिया है।
  • सिविल इंजीनियरिंग मुख्य परीक्षा और ग्रुप-बी (गैर-राजपत्रित) मुख्य परीक्षा को भी स्थगित कर दिया गया है।
  • राज्य सेवा मुख्य परीक्षा 2025 की कॉपियों का दोबारा मूल्यांकन किया जाएगा, जिसकी मांग छात्र लगातार कर रहे थे।
  • शिवसेना (यूबीटी) के नेता आदित्य ठाकरे ने परीक्षा टालने के फैसले का स्वागत करते हुए राज्यपाल का आभार जताया है।

महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं पर लगा ब्रेक, छात्रों के हंगामे के बाद अहम फैसला

महाराष्ट्र के प्रशासनिक सेवा की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए एक बेहद अहम और बड़ी खबर सामने आई है। राज्य के युवाओं और छात्र संगठनों के लगातार विरोध-प्रदर्शन के बाद महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) ने बड़ा कदम उठाते हुए अपनी कई प्रमुख परीक्षाओं को स्थगित कर दिया है। आयोग द्वारा जारी आधिकारिक आदेश के मुताबिक, आगामी 3 अक्टूबर से शुरू होने वाली राज्य सेवा मुख्य परीक्षा 2026 को फिलहाल टाल दिया गया है। इस फैसले से उन लाखों अभ्यर्थियों को थोड़ी राहत जरूर मिली है जो लंबे समय से परीक्षा प्रणाली में सुधार और पारदर्शिता की मांग को लेकर आवाज उठा रहे थे।

सिर्फ राज्य सेवा परीक्षा ही नहीं, बल्कि आयोग ने अन्य परीक्षाओं को भी अपनी इस सूची में शामिल करते हुए स्थगित कर दिया है। इनमें महाराष्ट्र सिविल इंजीनियरिंग मुख्य परीक्षा 2026 और महाराष्ट्र ग्रुप-बी (गैर-राजपत्रित) मुख्य परीक्षा 2026 भी शामिल हैं। इन सभी परीक्षाओं के लिए संशोधित और नई तारीखों का ऐलान आने वाले दिनों में आयोग की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से किया जाएगा। प्रशासनिक गलियारों में इस फैसले को छात्रों के दबाव और परीक्षा व्यवस्था में लगातार उठ रहे सवालों के बाद उठाया गया एक बहुत बड़ा सुधारात्मक कदम माना जा रहा है।

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परीक्षाओं को टालने के पीछे क्या रही असली वजह?

पिछले कुछ महीनों से महाराष्ट्र में प्रतियोगी परीक्षाओं के संचालन और उनके परिणामों को लेकर भारी असंतोष देखने को मिल रहा था। खासतौर पर औषधि निरीक्षक परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक होने के गंभीर आरोपों ने पूरे सिस्टम पर सवालिया निशान लगा दिए थे। इसके अलावा, राज्य सेवा मुख्य परीक्षा 2025 के परिणामों और नंबरों के मूल्यांकन को लेकर भी छात्रों और छात्र संगठनों ने आयोग के खिलाफ जमकर मोर्चा खोला था। अभ्यर्थियों का कहना था कि कॉपियों की चेकिंग में पारदर्शिता नहीं बरती गई है, जिससे कई योग्य छात्र रेस से बाहर हो गए हैं।

छात्रों की इन तमाम शिकायतों और सड़कों पर उतरे विरोध प्रदर्शनों को गंभीरता से लेते हुए आयोग ने अंततः बड़ा यू-टर्न लिया। आयोग ने यह स्वीकार किया कि परीक्षा प्रक्रिया और उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में खामियों की शिकायतों की जांच बेहद जरूरी है। यही कारण है कि न केवल आगामी परीक्षाओं को आगे बढ़ाया गया, बल्कि पुरानी परीक्षाओं के मूल्यांकन पर भी पुनर्विचार करने का मार्ग प्रशस्त किया गया है।

राज्य सेवा मुख्य परीक्षा 2025 की कॉपियों का होगा पुनर्मूल्यांकन

MPSC के इस ताज़ा और बड़े फैसले का सबसे अहम हिस्सा 2025 की राज्य सेवा मुख्य परीक्षा से जुड़ा हुआ है। आयोग ने आधिकारिक रूप से यह घोषणा की है कि 'राज्य सेवा मुख्य परीक्षा 2025' की सभी उत्तर पुस्तिकाओं की दोबारा जांच यानी री-इवैल्यूएशन कराया जाएगा। परीक्षा परिणाम और नंबरों के वितरण को लेकर छात्रों की तरफ से लगातार आपत्तियां दर्ज कराई जा रही थीं। आयोग के पास सैकड़ों की संख्या में ऐसी शिकायतें पहुंची थीं जिनमें कॉपियों की सही ढंग से जांच न होने का दावा किया गया था।

विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर पुस्तिकाओं के इस पुनर्मूल्यांकन से पूरी प्रक्रिया में कुछ समय और लग सकता है, जिससे रिजल्ट और आगे की चयन प्रक्रिया में थोड़ा विलंब होना तय है। हालांकि, छात्रों के भविष्य और निष्पक्षता को ध्यान में रखते हुए इस फैसले को एक न्यायसंगत कदम के रूप में देखा जा रहा है। अब देखना यह होगा कि दोबारा मूल्यांकन के बाद परिणाम में किस प्रकार के बदलाव देखने को मिलते हैं।

हाई-लेवल कमेटी की सिफारिशों का इंतजार, परीक्षा व्यवस्था में होगा बदलाव

राज्यभर में परीक्षाओं के पूरे पैटर्न, सुरक्षा और मूल्यांकन के तरीकों की समीक्षा करने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने पहले ही एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया हुआ है। वरिष्ठ नौकरशाह वी. राधा की अध्यक्षता वाली यह हाई-लेवल कमेटी राज्य के विभिन्न हिस्सों में जाकर छात्रों, अभिभावकों और अन्य संबंधित पक्षों के साथ विस्तृत चर्चा कर रही है। समिति बेहतर और आधुनिक परीक्षा प्रणालियों का गहराई से अध्ययन कर रही है ताकि भविष्य में इस तरह की गड़बड़ियों या पेपर लीक जैसी घटनाओं को पूरी तरह रोका जा सके।

आयोग की तरफ से यह भी बताया गया है कि आदर्श परीक्षा व्यवस्था को लेकर वी. राधा समिति की रिपोर्ट और सिफारिशें बहुत जल्द सार्वजनिक होने की उम्मीद है। इसी समिति की आगामी सिफारिशों और रिपोर्ट को ध्यान में रखते हुए आयोग ने परीक्षाओं की तारीखों को आगे खिसकाने का निर्णय लिया है। सरकार और आयोग दोनों ही यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि नई व्यवस्था पूरी तरह से फूल-प्रूफ हो और छात्रों के विश्वास को फिर से बहाल किया जा सके।

राजनीतिक गलियारों में भी गूंजा MPSC का मुद्दा, नेताओं की प्रतिक्रियाएं आईं सामने

महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग द्वारा परीक्षाएं टाले जाने के इस पूरे घटनाक्रम पर राजनीतिक दलों की तीखी प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं। शिवसेना (यूबीटी) के प्रमुख नेता और विधायक आदित्य ठाकरे ने आयोग के इस फैसले का खुले तौर पर स्वागत किया है। इसके साथ ही उन्होंने इस मामले में हस्तक्षेप के लिए महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा का विशेष रूप से आभार व्यक्त किया है।

"छात्रों के हित में MPSC द्वारा लिया गया यह फैसला स्वागत योग्य है, लेकिन हमारी मांग है कि परीक्षा प्रणाली में भ्रष्टाचार और लापरवाही के लिए जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई की जाए और आयोग के अध्यक्ष को भी तुरंत इस्तीफा देना चाहिए।" — आदित्य ठाकरे, विधायक, शिवसेना (यूबीटी)

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि आगामी चुनावों और युवाओं के आक्रोश को देखते हुए सरकार और आयोग किसी भी प्रकार का जोखिम उठाने से बच रहे हैं। छात्रों का यह आंदोलन और उस पर मिला राजनीतिक समर्थन इस बात का प्रमाण है कि युवा वर्ग अब शिक्षा और रोजगार के मुद्दों पर किसी भी तरह का समझौता करने के मूड में नहीं है।

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