सोना और चांदी के भाव में ऐतिहासिक गिरावट से निवेशकों में खलबली
भारतीय सर्राफा बाजार और मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी एमसीएक्स पर कीमती धातुओं की चमक बीते कुछ दिनों से फीकी पड़ती नजर आ रही है। सोने और चांदी की कीमतों में लगातार हो रहे उतार-चढ़ाव के बीच पिछले एक सप्ताह में दोनों ही बहुमूल्य धातुओं के दाम में भारी गिरावट दर्ज की गई है। इस बड़ी गिरावट का सीधा असर उन निवेशकों और आम ग्राहकों की जेब पर पड़ रहा है जो शादियों या त्योहारों के सीजन के लिए खरीदारी की योजना बना रहे थे। आंकड़ों के मुताबिक, चांदी की कीमतों में पिछले पांच कारोबारी सत्रों में जबरदस्त गोता लगा है, जिससे यह अपने सर्वकालिक उच्च स्तर से काफी नीचे आ चुकी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और अंतरराष्ट्रीय बाजार में हो रहे बदलावों के कारण घरेलू स्तर पर बुलियन मार्केट प्रभावित हुआ है। सिर्फ चांदी ही नहीं, बल्कि सोने की कीमतों में भी भारी सुस्ती देखने को मिल रही है। वायदा कारोबार से लेकर हाजिर बाजार तक हर जगह खरीदारों को राहत मिलती दिख रही है, वहीं दूसरी ओर कमोडिटी निवेशकों को संभलकर कदम रखने की सलाह दी जा रही है। बाजार के जानकारों का कहना है कि कमोडिटी मार्केट में यह करेक्शन आने वाले दिनों में और भी नए समीकरण तय कर सकता है।
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वायदा बाजार से लेकर हाजिर मार्केट तक चांदी में जबरदस्त सुस्ती
वायदा बाजार के आंकड़ों पर नजर डालें तो चांदी की कीमतों में भारी मुनाफावसूली और बिकवाली का दौर देखने को मिला है। एमसीएक्स पर 4 दिसंबर की एक्सपायरी वाली एक किलोग्राम चांदी पिछले सप्ताह के शुरुआती कारोबारी दिनों में ऊंचे स्तर पर थी, लेकिन सप्ताह के अंत तक इसमें भारी गिरावट दर्ज की गई। कुछ ही दिनों के भीतर यह कीमती धातु हजारों रुपये प्रति किलोग्राम सस्ती हो गई। जानकारों के अनुसार, इस साल की शुरुआत में चांदी ने जो ऐतिहासिक रिकॉर्ड बनाए थे, वर्तमान कीमतें उन रिकॉर्ड स्तरों से बहुत नीचे खिसक चुकी हैं।
सिर्फ वायदा बाजार ही नहीं, बल्कि इंडियन बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन यानी IBJA के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक भी घरेलू हाजिर बाजार में चांदी भरभराकर टूटी है। पिछले पांच कारोबारी सत्रों में हाजिर चांदी के भाव में साढ़े ग्यारह हजार रुपये से अधिक की भारी गिरावट आ चुकी है। देश के विभिन्न प्रमुख महानगरों जैसे दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, और बेंगलुरु में चांदी के खुदरा दाम में आई इस भारी कमी के कारण स्थानीय सर्राफा बाजारों में खरीदारों की हलचल बढ़ गई है, हालांकि निवेशक बाजार के स्थिर होने का इंतजार कर रहे हैं।
अपने लाइफ-टाइम हाई से कितनी सस्ती हो चुकी है चांदी?
यदि चांदी के मौजूदा भाव की तुलना इसके इस साल के शुरुआती महीनों में बने ऑल-टाइम हाई स्तर से की जाए, तो अंतर बहुत बड़ा नजर आता है। इस साल जनवरी के आखिरी हफ्ते में चांदी की वायदा कीमतों ने सारे पुराने रिकॉर्ड तोड़ते हुए अकल्पनीय ऊंचाई को छुआ था। लेकिन उसके बाद से वैश्विक दबाव और घरेलू मांग में आए बदलावों के चलते इसमें लगातार करेक्शन देखा गया। वर्तमान में एमसीएक्स और हाजिर बाजार के बंद भाव के मुकाबले यह चमकीली धातु अपने रिकॉर्ड उच्चतम स्तर से लगभग 1.94 लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक कम दाम पर ट्रेड कर रही है।
बाजार विश्लेषकों का यह भी कहना है कि भारत अपनी चांदी की कुल मांग का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात के जरिए पूरा करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बुलियन मार्केट में होने वाली हलचल और डॉलर इंडेक्स के उतार-चढ़ाव का सीधा असर भारतीय सर्राफा बाजार पर पड़ता है। पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण भी सुरक्षित निवेश के रूप में चांदी और सोने की कीमतों में यह जोरदार उठापटक देखने को मिल रही है।
सोने के भाव में भी धड़ाम, एमसीएक्स और हाजिर दरों में बड़ी नरमी
चांदी के नक्शेकदम पर चलते हुए दूसरी कीमती पीली धातु यानी सोने के भाव में भी भारी नरमी दर्ज की गई है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर 24 कैरेट सोने के वायदा भाव में लगातार कमजोरी बनी हुई है। पिछले सप्ताह के आखिरी कारोबारी सत्र में 10 ग्राम सोने की कीमत में हजारों रुपये की गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों को तगड़ा झटका लगा है। केवल वायदा बाजार ही नहीं, बल्कि घरेलू हाजिर सर्राफा बाजारों में भी सोने की चमक फीकी पड़ी है और इसके दाम काफी नीचे आ गए हैं।
विभिन्न शहरों के स्थानीय बाजारों में सोने के भाव में आई इस गिरावट से आम उपभोक्ताओं को कुछ हद तक राहत जरूर मिली है, जो लंबे समय से सोने के दाम घटने का इंतजार कर रहे थे। हालांकि, सर्राफा कारोबारियों का कहना है कि जब ग्राहक आभूषण खरीदने जाते हैं, तो उन्हें बेस रेट के अलावा 3 प्रतिशत जीएसटी और मेकिंग चार्ज भी चुकाना पड़ता है, जिससे अंतिम खरीद मूल्य थोड़ा अधिक हो जाता है। इसलिए उपभोक्ताओं को सलाह दी जाती है कि वे खरीदारी करते समय इन सभी शुल्कों की पूरी जानकारी अवश्य प्राप्त करें।
विशेषज्ञों की राय और बाजार का भविष्य
कमोडिटी बाजार के वरिष्ठ विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में चल रहे घटनाक्रम आने वाले दिनों में बुलियन मार्केट की दिशा तय करेंगे। बढ़ती ब्याज दरों, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर की मजबूती जैसे कारणों से सोने और चांदी की कीमतों पर लगातार दबाव बना हुआ है। विशेषज्ञों का यह भी सुझाव है कि आम निवेशकों को किसी भी प्रकार की जल्दबाजी से बचना चाहिए और निवेश करने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों या मार्केट एक्सपर्ट्स की राय जरूर लेनी चाहिए।
"पश्चिम एशिया के तनाव और अंतरराष्ट्रीय बाजार में हो रहे उतार-चढ़ाव ने कमोडिटी के समीकरणों को बदल दिया है। चूंकि भारत अपनी अधिकांश सोने और चांदी की जरूरत आयात से पूरी करता है, इसलिए वैश्विक बदलावों का सीधा असर घरेलू कीमतों पर पड़ रहा है।" — मयंक मोहन, मार्केट एक्सपर्ट
अंततः, यदि आप सोने या चांदी में निवेश करने की सोच रहे हैं या आभूषण खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो मौजूदा बाजार की चाल पर बारीक नजर रखना बेहद जरूरी है। कीमतों में आई यह गिरावट जहां एक तरफ खरीदारों के लिए सुनहरा मौका है, वहीं दूसरी तरफ निवेशकों को सतर्कता बरतने की भी सलाह दी जा रही है ताकि वे बाजार के उतार-चढ़ाव से होने वाले जोखिम से बच सकें।





