सोने और चांदी के वायदा बाजार में भारी गिरावट
घरेलू कमोडिटी मार्केट में आज सोने और चांदी की कीमतों में जोरदार गिरावट देखने को मिली है। बाजार के शुरुआती कारोबार के दौरान 10 ग्राम सोने का भाव करीब 2675 रुपये सस्ता होकर 1.5 लाख रुपये के दायरे से नीचे आ गया है। इस गिरावट के बाद निवेशकों और आम खरीदारों के बीच चर्चा तेज हो गई है कि क्या यह खरीदारी का सही मौका है या कीमतों में अभी और नरमी आ सकती है।
उधर, चांदी के दाम में भी भारी मुनाफावसूली और बिकवाली का दौर देखा जा रहा है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी एमसीएक्स पर चांदी का वायदा भाव साढ़े नौ बजे के आसपास छह हजार रुपये से अधिक की बड़ी गिरावट के साथ कारोबार कर रहा था। जानकारों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर बन रहे आर्थिक समीकरणों और भू-राजनीतिक तनावों का असर सीधे तौर पर घरेलू सर्राफा और वायदा बाजार पर पड़ रहा है।
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रिकॉर्ड स्तर से काफी नीचे फिसली कीमती धातुएं
आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले कुछ महीनों के दौरान सोने और चांदी ने जबरदस्त ऊंचाई को छुआ था। कुछ हफ्तों पहले सोना अपने ऑल-टाइम रिकॉर्ड हाई स्तर के आसपास ट्रेड कर रहा था, लेकिन तब से लेकर अब तक इसमें हजारों रुपये की बड़ी गिरावट आ चुकी है। इसी तरह चांदी की कीमतों में भी रिकॉर्ड ऊंचाई से भारी करेक्शन देखा गया है, जिससे निवेशकों को बड़ा झटका लगा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि बुलियन मार्केट में इस तरह के उतार-चढ़ाव आम हैं, लेकिन पिछले कुछ हफ्तों में जिस रफ्तार से कीमतें नीचे आई हैं, उसने बाजार के विश्लेषकों को भी हैरान कर दिया है। वायदा बाजार के ये आंकड़े इस बात का संकेत हैं कि आने वाले दिनों में हाजिर सर्राफा बाजारों में भी ग्राहकों को इन घटे हुए दामों का फायदा मिल सकता है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर और बॉन्ड यील्ड का दबाव
ग्लोबल मार्केट की बात करें तो एशियाई और अमेरिकी बाजारों में सोने की हाजिर कीमतों में खासी कमजोरी दर्ज की गई है। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अन्य प्रमुख मुद्राओं में सुस्ती और डॉलर इंडेक्स में मजबूती के कारण अंतरराष्ट्रीय निवेशकों का रुझान बुलियन से हटकर अन्य परिसंपत्तियों की ओर बढ़ा है। इसके अलावा, अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड में लगातार तेजी देखी जा रही है, जो सोने जैसी सुरक्षित मानी जाने वाली संपत्तियों के लिए नकारात्मक साबित हो रही है।
यार्डेनी रिसर्च के प्रमुख एड यार्डेनी के अनुसार, वैश्विक स्तर पर ट्रेजरी बॉन्ड पर मिल रही ऊंची यील्ड इस बात का संकेत है कि केंद्रीय बैंकों को महंगाई पर काबू पाने के लिए कड़े कदम उठाने पड़ सकते हैं। जब बॉन्ड बाजार में अधिक रिटर्न मिलता है, तो निवेशक सोने की तुलना में उधर अधिक आकर्षित होते हैं, जिससे बुलियन की चमक फीकी पड़ जाती है.
कच्चे तेल की कीमतें और मौद्रिक नीति का असर
कीमती धातुओं में जारी इस गिरावट के पीछे कच्चे तेल की कीमतों में बना उछाल भी एक अहम वजह है। पश्चिम एशिया के तनाव और सप्लाई से जुड़े मुद्दों के चलते क्रूड ऑयल के दाम ऊंचे बने हुए हैं, जिससे दुनिया भर में महंगाई बढ़ने का खतरा मंडरा रहा है। महंगे ईंधन के कारण अमेरिका सहित प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के केंद्रीय बैंकों पर ब्याज दरों को लेकर दबाव बना हुआ है।
अमेरिकी फेडरल रिजर्व के अधिकारियों के हालिया बयानों से संकेत मिलता है कि महंगाई को नियंत्रित करने के लिए बेंचमार्क ब्याज दरों में आगे भी बढ़ोतरी की जा सकती है। बाजार विशेषज्ञों का अनुमान है कि आने वाले महीनों में नीतिगत दरों को लेकर अमेरिकी फेडरल रिजर्व का रुख क्या रहता है, यह सोने और चांदी की आगामी चाल तय करने में सबसे बड़ी भूमिका निभाएगा।
निवेशकों के लिए आगे की राह और बाजार का रुख
मौजूदा बाजार परिस्थितियों को देखते हुए निवेशकों और ट्रेडर्स को बेहद सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है। वैश्विक आर्थिक संकेतों, अमेरिकी मौद्रिक नीति और भू-राजनीतिक गतिविधियों पर पैनी नजर रखना जरूरी है।
"वैश्विक स्तर पर बॉन्ड यील्ड में वृद्धि और अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने से कीमती धातुओं पर दबाव बना रहेगा, हालांकि लंबी अवधि में सुरक्षित निवेश के रूप में इनका आकर्षण बना रहेगा।" — वरिष्ठ बाजार विश्लेषक
अंततः, यदि आप सोने या चांदी में निवेश करने की सोच रहे हैं, तो बाजार के उतार-चढ़ाव को समझते हुए किश्तों में निवेश करना एक बेहतर रणनीति साबित हो सकता है।






