अक्टूबर की शुरुआत के साथ ही बदला सर्राफा बाजार का मिजाज
भारतीय सर्राफा बाजार और कमोडिटी एक्सचेंज में अक्टूबर महीने की शुरुआत एक बड़े बदलाव के साथ हुई है। बीते पूरे सितंबर महीने के दौरान सोने और चांदी की कीमतों में लगातार सुस्ती और गिरावट का रुख देखने को मिला था, जिससे आम खरीदारों को कुछ राहत जरूर मिली थी। लेकिन जैसे ही नया महीना शुरू हुआ, बाजार की चाल पूरी तरह पलट गई और कीमती धातुओं में अचानक जोरदार तेजी दर्ज की गई। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी MCX पर कारोबार की शुरुआत के साथ ही निवेशकों की सक्रियता बढ़ गई, जिसके चलते सोना और चांदी दोनों के दाम ऊपर की तरफ भागने लगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर आर्थिक संकेतों और निवेशकों की लिवाली में अचानक आए बदलाव के कारण घरेलू बाजार में यह हलचल देखने को मिली है। बाजार के जानकारों का कहना है कि त्योहारी सीजन की आहट के साथ ही सर्राफा बाजार में खरीदारी का पैटर्न भी बदल रहा है, जिसका सीधा असर वायदा और हाजिर दोनों बाजारों की कीमतों पर पड़ रहा है। आम लोग जो पिछले महीने कीमतों में गिरावट से उत्साहित होकर खरीदारी की योजना बना रहे थे, उन्हें अब नए सिरे से अपने बजट का आकलन करना पड़ रहा है।
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चांदी के दामों में बड़ा उछाल, जानिए क्या है प्रति किलो नया भाव
सितंबर के आखिरी कारोबारी सत्र में सुस्त रहने वाली चांदी ने अक्टूबर के पहले ही दिन सबको चौंका दिया। एमसीएक्स पर उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, जहां पिछले सत्र में एक किलोग्राम चांदी का वायदा भाव 2,23,706 रुपये पर बंद हुआ था, वहीं महीने के पहले दिन कारोबार शुरू होते ही यह उछलकर 2,26,537 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर जा पहुंचा। यानी एक ही दिन में चांदी की कीमत में लगभग 2,831 रुपये का बड़ा उछाल दर्ज किया गया है। इस तेजी ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि चांदी के बाजार में उतार-चढ़ाव कितनी तेजी से होता है।
हालांकि इस मामूली बढ़त के बावजूद चांदी अभी भी अपने ऑल-टाइम हाई स्तर से काफी नीचे मिल रही है। इस साल की शुरुआत यानी जनवरी के आखिरी हफ्ते में चांदी ने सभी रिकॉर्ड तोड़ते हुए इतिहास में पहली बार 4 लाख रुपये का जादुई आंकड़ा पार कर लिया था और 4,20,048 रुपये प्रति किलोग्राम के ऐतिहासिक उच्च स्तर को छुआ था। उस रिकॉर्ड ऊंचाई के मुकाबले आज भी चांदी काफी कम कीमत पर उपलब्ध है, जिससे निवेशकों के बीच अभी भी निचले स्तर पर खरीदारी का रुझान बना हुआ है।
सोने की चमक भी लौटी, दस ग्राम गोल्ड का भाव डेढ़ लाख के करीब
चांदी की तरह ही पीली धातु यानी सोने की कीमतों में भी तेजी का रुख देखने को मिला है। एमसीएक्स पर 24 कैरेट सोने के भाव में बुधवार को कारोबार खुलते ही तेजी आ गई। पिछले कारोबारी दिन 10 ग्राम सोने का भाव 1,49,036 रुपये पर बंद हुआ था, जो नए महीने के पहले दिन उछलकर 1,50,053 रुपये प्रति 10 किलोग्राम के स्तर पर पहुंच गया। इस प्रकार, एक ही झटके में सोने की कीमत में लगभग 1,017 रुपये प्रति 10 ग्राम की बढ़ोतरी दर्ज की गई है और यह फिर से डेढ़ लाख रुपये के मनोवैज्ञानिक आंकड़े के करीब पहुंच गया है।
यदि पिछले पूरे सितंबर महीने के प्रदर्शन पर नजर डालें, तो सोने में काफी उतार-चढ़ाव देखा गया था। अगस्त के आखिरी कारोबारी दिन सोना उच्च स्तर पर बंद हुआ था, लेकिन सितंबर के दौरान बिकवाली और वैश्विक दबाव के कारण इसमें कुल मिलाकर गिरावट आई थी। महीने के दौरान सोने के दाम में छह हजार रुपये से अधिक की कुल सुस्ती दर्ज की गई थी, लेकिन अक्टूबर की इस नई शुरुआत ने साफ कर दिया है कि बाजार में अभी स्थिरता आने में वक्त लगेगा और कीमतें दोनों तरफ झूला झूल सकती हैं।
अंतरराष्ट्रीय कारक और मजबूत डॉलर का घरेलू बाजार पर असर
सोने और चांदी की कीमतों में हो रहे इन लगातार बदलावों के पीछे अंतरराष्ट्रीय स्तर के कई बड़े कारण जिम्मेदार हैं। दुनिया भर के बाजारों में अमेरिकी डॉलर की मजबूती सीधे तौर पर कीमती धातुओं की चाल तय करती है। जब-जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर मजबूत होता है, तब-तब अन्य मुद्राओं के निवेशकों के लिए सोना खरीदना महंगा हो जाता है, जिससे वैश्विक मांग पर दबाव बनता है। इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतों में आ रही तेजी और दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में महंगाई के मोर्चे पर मिल रहे संकेतों ने भी निवेशकों की चिंताएं बढ़ाई हैं।
अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर भविष्य की नीतियों पर भी सर्राफा बाजार की पैनी नजर बनी हुई है। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के माहौल में निवेशक सुरक्षित निवेश के विकल्प के रूप में सोने की तरफ रुख करते हैं, जिससे कीमतों में अचानक तेजी आ जाती है। घरेलू स्तर पर भी सर्राफा कारोबारियों का मानना है कि आने वाले दिनों में शादियों के सीजन और त्योहारों की वजह से मांग में इजाफा होगा, जो कीमतों को सपोर्ट दे सकता है।
"सोना और चांदी दोनों ही वैश्विक आर्थिक संकेतों के प्रति बेहद संवेदनशील हैं। मुद्रा बाजार में उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक तनावों के कारण कमोडिटी एक्सचेंज में कीमतों का इस तरह घटना और बढ़ना एक सामान्य प्रक्रिया है। निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी बड़े निवेश से पहले बाजार के रुझानों को अच्छी तरह समझ लें।" — वरिष्ठ कमोडिटी विश्लेषक
खरीदारों और निवेशकों के लिए आगे की क्या है रणनीति?
कीमती धातुओं के बाजार में इस तरह के उतार-चढ़ाव के बीच आम निवेशकों और खुदरा खरीदारों के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि इस समय खरीदारी करना फायदेमंद रहेगा या नहीं। बाजार विशेषज्ञों का सुझाव है कि जो लोग अपने व्यक्तिगत उपयोग के लिए गहने या आभूषण खरीदना चाहते हैं, उन्हें टुकड़ों में खरीदारी करनी चाहिए ताकि बाजार के औसत उतार-चढ़ाव का फायदा मिल सके। एक साथ पूरा पैसा लगाने के बजाय सिस्टेमेटिक तरीके से निवेश करना हमेशा समझदारी भरा कदम माना जाता है।
इसके अलावा, डिजिटल गोल्ड, सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड या गोल्ड ईटीФ जैसे विकल्पों में निवेश करने वालों को भी अपने वित्तीय सलाहकारों से राय जरूर लेनी चाहिए। चूंकि वैश्विक बाजार में कब कौन सी बड़ी घटना दरों को प्रभावित कर दे, इसका अंदाजा लगाना कठिन होता है, इसलिए जोखिम प्रबंधन को प्राथमिकता देना बेहद जरूरी है। अक्टूबर की इस मजबूत शुरुआत ने यह साफ कर दिया है कि आने वाले दिनों में भी सर्राफा बाजार में हलचल बनी रहेगी और निवेशकों को हर छोटी-बड़ी खबर पर नजर रखनी होगी।








