नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — भारतीय वायु सेना की ताकत बढ़ाने वाले स्वदेशी लड़ाकू विमान एचएएल तेजस को लेकर पिछले चौबीस घंटों में कई अहम और बड़े अपडेट सामने आए हैं। अमेरिकी कंपनी जीई एयरोस्पेस ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड यानी एचएएल को तीन नए एफ404 इंजन सौंप दिए हैं। इन इंजनों के मिलने से तेजस एमके-1ए फाइटर जेट के निर्माण की रफ्तार काफी तेज हो जाएगी। भारतीय वायु सेना लंबे समय से इन इंजनों की आपूर्ति का इंतजार कर रही थी, ताकि तय समयसीमा के भीतर विमानों की डिलीवरी पूरी की जा सके।
इंजनों की इस नई खेप के आने से उत्पादन लाइन पर काम कर रहे इंजीनियरों और तकनीकी टीम ने राहत की सांस ली है। रक्षा जानकारों का मानना है कि विमान की रफ्तार और उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए इन इंजनों की समय पर आपूर्ति बेहद अहम थी। जीई एयरोस्पेस द्वारा भेजे गए ये तीनों इंजन अब सीधे असेंबली लाइन में लगाए जाएंगे, जिससे तेजस एमके-1ए के पहले से चल रहे प्रोजेक्ट को जरूरी गति मिल सकेगी। वायु सेना प्रमुख और रक्षा मंत्रालय के अधिकारी भी इस पूरी प्रक्रिया पर लगातार नजर बनाए हुए हैं ताकि निर्माण कार्य में कोई रुकावट न आए।
जापान के एयर चीफ ने भरी तेजस में उड़ान
इस बीच, भारतीय रक्षा उद्योग के लिए एक और बड़ी और गर्व की बात सामने आई है। जापान के एयर चीफ जनरल ताकेहिरो ने भारत आकर खुद तेजस फाइटर जेट की उड़ान भरी। आसमान में तेजस के कॉकपिट का अनुभव लेने के बाद जनरल ताकेहिरो ने इसके प्रदर्शन की खुलकर तारीफ की। विदेशी सैन्य अधिकारियों द्वारा स्वदेशी विमान में इस तरह की रुचि दिखाना भारतीय रक्षा निर्माण क्षेत्र के लिए एक बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है। इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेजस की साख और मजबूती दोनों में इजाफा हुआ है।
जापानी एयर चीफ की यह उड़ान यह दिखाती है कि अब भारत में बने रक्षा उत्पाद दुनिया के दूसरे देशों का भी ध्यान खींच रहे हैं। विदेशी वायु सेना के वरिष्ठ अधिकारियों का भारत आकर ऐसे युद्धक विमानों को परखना भविष्य में निर्यात की संभावनाओं को भी मजबूत करता है। एचएएल के तकनीकी स्टाफ और परीक्षण पायलटों ने जनरल ताकेहिरो को इस विमान की खूबियों और इसकी मारक क्षमता के बारे में विस्तार से जानकारी दी, जिससे वे काफी प्रभावित नजर आए।
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इजरायली तकनीक से और खतरनाक हुआ टारगेट भेदने का अंदाज
उत्पादन और अंतरराष्ट्रीय चर्चा के अलावा तेजस की मारक क्षमता को लेकर भी एक बड़ा अपडेट आया है। इस स्वदेशी फाइटर जेट में अब इजरायल से मंगाई गई एक बेहद खास और आधुनिक तकनीक फिट कर दी गई है। रक्षा सूत्रों के मुताबिक, यह नई तकनीक बिल्कुल मछली की आंख में निशाना लगाने वाले अर्जुन के तीर की तरह काम करती है। इसकी मदद से तेजस हवा या जमीन पर अपने दुश्मन के टारगेट को बहुत आसानी से ढूंढ लेगा और पलक झपकते ही उसे पूरी तरह तबाह कर देगा।
इस इजरायली उपकरण के जुड़ जाने से तेजस की इलेक्ट्रॉनिक आंखें और ज्यादा पैनी हो गई हैं। अब खराब मौसम या रात के अंधेरे में भी यह जेट अपने अचूक निशानों से दुश्मन के ठिकानों को धुआं-धुआं कर सकता है। भारतीय वायु सेना की ऑपरेशनल तैयारियों के लिहाज से यह अपग्रेड बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। देश के वैज्ञानिक और रक्षा इंजीनियर लगातार विदेशी और स्वदेशी तकनीक का बेहतरीन तालमेल बिठाकर इस विमान को दुनिया के सबसे खतरनाक लड़ाकू विमानों की श्रेणी में खड़ा कर रहे हैं।
उत्पादन बढ़ने से वायु सेना की ताकत को मिलेगा नया मुकाम
एचएएल और अमेरिकी कंपनी के बीच हुए इस समझौते के बाद अब देश के भीतर रक्षा निर्माण की गति को लेकर उत्साह का माहौल है। वायु सेना के बेड़े में जब ये नए इंजन वाले तेजस एमके-1ए विमान पूरी संख्या में शामिल हो जाएंगे, तो हमारी सीमाओं की चौकसी और ज्यादा मजबूत हो जाएगी। पुरानी पीढ़ी के विमानों को चरणबद्ध तरीके से हटाने और उनकी जगह इन आधुनिक स्वदेशी जेट्स को तैनात करने का काम तेजी से चल रहा है।
द फ्रीलान्स की इस ग्राउंड पड़ताल से यह साफ है कि भारत अब रक्षा मामलों में आत्मनिर्भरता की ओर बहुत तेजी से कदम बढ़ा रहा है। इंजन की आपूर्ति में आई रुकावटों के दूर होने से अब उत्पादन का ग्राफ ऊपर उठेगा। आने वाले महीनों में भारतीय आसमान में इन उन्नत तेजस विमानों की गड़गड़ाहट और ज्यादा सुनाई देगी, जो देश की रक्षा तैयारियों को एक नई और मजबूत ऊंचाई प्रदान करेगी।



