महज 10 लाख की शुरुआती ओपनिंग से बॉक्स ऑफिस पर खड़ा किया बड़ा साम्राज्य
भारतीय सिनेमा के इतिहास में कई बार ऐसी फिल्में आई हैं, जिन्होंने शुरुआत में टिकट खिड़की पर बेहद धीमी रफ्तार पकड़ी, लेकिन बाद में अपनी मजबूत कहानी के दम पर ऐसा इतिहास रचा कि इंडस्ट्री के बड़े-बड़े धुरंधर हैरान रह गए। हाल ही में सिनेमाघरों में रिलीज हुई फिल्म 'हनुमान अंश' ने बॉक्स ऑफिस पर कुछ ऐसा ही करिश्मा कर दिखाया है। विशाल चतुर्वेदी के निर्देशन में बनी इस फिल्म ने जिस तरह से अपनी असफलता के कगार से उठकर सफलता के शिखर तक का सफर तय किया है, वह अपने आप में एक मिसाल है। शुरुआत में इस फिल्म को देखने के लिए सिनेमाघरों में बहुत कम दर्शक पहुंच रहे थे और इसकी ओपनिंग मात्र 10 लाख रुपये की रही थी।
पहले दो हफ्तों तक फिल्म बॉक्स ऑफिस पर संघर्ष करती नजर आई और इसकी कुल नेट कमाई बमुश्किल डेढ़ करोड़ रुपये तक ही पहुंच पाई थी। इंडस्ट्री के जानकारों को ऐसा लगने लगा था कि यह फिल्म कुछ ही दिनों में सिनेमाघरों से उतर जाएगी। हालांकि, फिल्म की असली ताकत इसकी कहानी और दर्शकों के साथ इसका भावनात्मक जुड़ाव साबित हुआ। धीरे-धीरे मौखिक पब्लिसिटी ने ऐसा असर दिखाया कि तीसरे सप्ताह के बाद टिकट खिड़की पर दर्शकों का तांता लग गया। चौथे हफ्ते से लेकर लगातार कई हफ्तों तक इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन करते हुए अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखी।
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चौथे हफ्ते के बाद बदली तस्वीर, सोशल मीडिया और दर्शकों ने दी ताकत
किसी भी फिल्म के लिए शुरुआती दो हफ्ते सबसे अहम माने जाते हैं, लेकिन 'हनुमान अंश' का मामला बिल्कुल अलग रहा। जब शुरुआती दौर में इसे सिनेमाघरों में दर्शकों का साथ नहीं मिला, तो मेकर्स की चिंता बढ़ गई थी। लेकिन कहते हैं कि अच्छी और सच्ची कहानियों को दर्शकों का प्यार मिलने में भले ही थोड़ा समय लगे, वे अपनी जगह बना ही लेती हैं। नीम करौली बाबा के जीवन और उनकी शिक्षाओं पर आधारित होने के कारण इस फिल्म के साथ एक आध्यात्मिक और गहरा सांस्कृतिक जुड़ाव जुड़ गया था।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर जब दर्शकों ने इस फिल्म की सादगी और इसके संदेश की तारीफ करनी शुरू की, तो लोगों का रुझान अचानक बदल गया। परिवार के परिवार सिनेमाघरों की तरफ खिंचे चले आने लगे। परिणाम यह हुआ कि चौथे सप्ताह के बाद फिल्म की कमाई में बेतहाशा बढ़ोतरी दर्ज की गई। भारत के विभिन्न हिस्सों में सिनेमाघरों के शो हाउसफुल होने लगे। इस अप्रत्याशित सफलता ने बॉक्स ऑफिस पंडितों को भी नए सिरे से आंकड़े देखने पर मजबूर कर दिया। ग्रामीण इलाकों से लेकर महानगरों तक इस फिल्म की गूंज सुनाई देने लगी।
आठवें वीकेंड में 400 करोड़ के पार पहुंची कमाई, बड़े दिग्गजों को चटाई धूल
सिनेमाघरों में अपने सात हफ्ते सफलतापूर्वक पूरे करने के बाद भी इस फिल्म का जलवा कम नहीं हुआ। आठवें वीकेंड में भी 'हनुमान अंश' ने टिकट खिड़की पर बॉक्स ऑफिस के कई पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए। शनिवार और रविवार को आए शानदार आंकड़ों ने फिल्म को उस मुकाम पर पहुंचा दिया, जिसकी कल्पना शायद इसके मेकर्स ने भी शुरुआत में नहीं की होगी। रिपोर्ट के मुताबिक, आठवें वीकेंड के दौरान फिल्म ने भारत और विदेशों को मिलाकर दुनियाभर में कुल 400 करोड़ रुपये के ग्रॉस कलेक्शन के आंकड़े को पार कर लिया।
रविवार के दिन अकेले इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर लगभग 9 करोड़ रुपये की शानदार कमाई की। इसके साथ ही भारत में इसका कुल नेट कलेक्शन 307 करोड़ रुपये के करीब पहुंच गया, जबकि घरेलू ग्रॉस कलेक्शन लगभग 362 करोड़ रुपये हो गया। विदेशी बाजारों में भारतीय रिलीज के छह हफ्ते बाद इसे प्रदर्शित किया गया था, इसके बावजूद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इसने 4 मिलियन डॉलर से अधिक की कमाई कर ली। इन सभी आंकड़ों को मिलाकर कुल वर्ल्डवाइड ग्रॉस कलेक्शन 402 करोड़ रुपये के पार जा पहुंचा है।
'3 इडियट्स' और 'कांतारा' जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्मों को पीछे छोड़ा
कमाई के मामले में इस फिल्म ने जिन फिल्मों को पीछे छोड़ा है, वे भारतीय सिनेमा की स्थापित और बेहद लोकप्रिय फिल्में रही हैं। रविवार के बॉक्स ऑफिस आंकड़ों के फेरबदल में 'हनुमान अंश' ने सबसे पहले ऋतिक रोशन की चर्चित फिल्म 'कृष 3' (393 करोड़) और शाहरुख खान की 'चेन्नई एक्सप्रेस' (392 करोड़) के लाइफटाइम कलेक्शन को मात दी। इसके बाद इसने आमिर खान की कल्ट क्लासिक फिल्म '3 इडियट्स' (400 करोड़) और ऋषभ शेट्टी की सुपरहिट फिल्म 'कांतारा' (401 करोड़) को भी पीछे छोड़ते हुए नया मुकाम हासिल कर लिया।
भारतीय सिनेमा की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली टॉप 50 फिल्मों की सूची में इस फिल्म ने अपनी मजबूत जगह बना ली है। फिल्म की वर्तमान रफ्तार को देखते हुए ट्रेड एनालिस्ट्स का मानना है कि यह जल्द ही 450 करोड़ रुपये के जादुई आंकड़े को भी छू सकती है। इस बड़ी कामयाबी के बाद फिल्म की पूरी टीम और कलाकारों ने देश के कई बड़े नेताओं से मुलाकात की और अपनी इस ऐतिहासिक सफलता का जश्न मनाया।
"शुरुआत में हमें कड़ा संघर्ष करना पड़ा था, क्योंकि लोग सिनेमाघरों में आने से हिचकिचा रहे थे। लेकिन जब दर्शकों ने इस आध्यात्मिक सफर की गहराई को समझा, तो उन्होंने इस फिल्म को अपना बना लिया। यह सफलता हमारी नहीं, बल्कि देश के हर उस दर्शक की है जिसने सच्चाई और आस्था को सराहा है।" — विशाल चतुर्वेदी, निर्देशक
फिल्म में कलाकारों का दमदार अभिनय और आगे का सफर
इस फिल्म की सफलता के पीछे केवल इसकी कहानी ही नहीं, बल्कि इसके कलाकारों का सहज और प्रभावशाली अभिनय भी है। फिल्म में विहान शेडगे, चंद्रमा के. आनंद, पूर्णिमा तिवारी, अनिल रस्तोगी, गुलशन पांडे और भगवानदास पटेल जैसे कलाकारों के साथ शोभिनव सत्या ने मुख्य भूमिकाएं निभाई हैं। हर एक अभिनेता ने अपने किरदार में जान फूंक दी है, जिससे स्क्रीन पर कहानी बेहद जीवंत नजर आती है। नीम करौली बाबा के जीवन दर्शन को पर्दे पर उतारने का यह प्रयास दर्शकों के दिलों को छू गया है।
आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह फिल्म 'हैप्पी न्यू ईयर', 'विक्रम' और 'अंधाधुन' जैसी बड़ी हिट फिल्मों को भी पीछे छोड़ने में कामयाब हो पाती है या नहीं। सिनेमाघरों में नई फिल्मों के आने के बावजूद इस फिल्म का टिके रहना यह साबित करता है कि दर्शक अब लीक से हटकर कुछ नया और सार्थक देखना चाहते हैं। कम बजट और छोटे पैमाने पर शुरू हुई यह फिल्म आज भारतीय सिनेमा के पन्नों पर एक बड़ी मिसाल बन चुकी है।




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