हर घर सोलर योजना को मिल रही है नई रफ्तार
देशभर में पर्यावरण संरक्षण और बिजली की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के लिए सौर ऊर्जा का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। इसी कड़ी में हरियाणा सरकार ने अपने प्रमुख शहरों में रूफटॉप सोलर योजना को जमीन पर उतारने के लिए कमर कस ली है। राज्य के प्रमुख औद्योगिक और शहरी केंद्र माने जाने वाले गुरुग्राम और फरीदाबाद में इस योजना को गति देने के लिए एक नया और सख्त प्रवर्तन अभियान शुरू किया गया है। अधिकारियों का मानना है कि तय समय सीमा के भीतर यदि काम पूरा नहीं हुआ, तो आने वाले समय में ऊर्जा संकट और गहरा सकता है।
राज्य प्रशासन ने इसके लिए 31 मार्च 2027 की अंतिम समय सीमा तय की है। इस पूरी पहल का मुख्य उद्देश्य उन पुरानी कमियों को दूर करना है, जिनके कारण पिछले कुछ वर्षों में सौर ऊर्जा के क्षेत्र में अपेक्षित प्रगति नहीं हो पाई थी। पूर्व के कई नियमों और ऊर्जा संरक्षण अधिनियमों के बावजूद, बड़ी संख्या में आवासीय सोसाइटियां और व्यावसायिक इमारतें आज भी पूरी तरह से पारंपरिक ग्रिड बिजली या महंगे डीजल जनरेटर पर निर्भर बनी हुई हैं, जिससे पर्यावरण पर लगातार दबाव बढ़ रहा है.
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किसे अनिवार्य रूप से लगवाना होगा सोलर पैनल?
मौजूदा नियमों के मुताबिक, राज्य में सौर ऊर्जा के दायरे को बढ़ाने के लिए कुछ कड़े मापदंड तय किए गए हैं। जिन आवासीय परिसरों या प्लॉटों का क्षेत्रफल 500 वर्ग गज या उससे अधिक है, उनके लिए रूफटॉप सोलर सिस्टम लगवाना अनिवार्य कर दिया गया है। इसके अलावा, ग्रुप हाउसिंग सोसाइटियों और 50 किलोवाट से अधिक बिजली लोड की खपत वाली तमाम कमर्शियल इमारतों को भी इस दायरे में शामिल किया गया है। प्रशासन की ओर से साफ कर दिया गया है कि इन नियमों का पालन न करने वालों पर कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की जा सकती है।
दूसरी ओर, केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी 'प्रधानमंत्री सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना' को भी राज्य में आक्रामक तरीके से आगे बढ़ाया जा रहा है। इस योजना के तहत सरकार का लक्ष्य वर्ष 2027 की समय सीमा तक कम से कम 2.22 लाख घरों में रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन पूरा करने का है। राष्ट्रीय स्तर पर भी इस योजना को अभूतपूर्व सफलता मिल रही है, जहां लाखों परिवार इस हरित पहल का हिस्सा बन चुके हैं और बिजली के भारी-भरकम बिलों से राहत पा रहे हैं।
सब्सिडी और भुगतान के नियमों में बड़ा बदलाव
आम नागरिकों के लिए इस योजना को और अधिक सुलभ बनाने के वास्ते राज्य के बिजली वितरण निगमों ने कई बड़े कदम उठाए हैं। दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (DHBVN) के आंकड़ों के मुताबिक, क्षेत्र में बड़ी संख्या में सोलर कनेक्शन जोड़े जा चुके हैं और हजारों उपभोक्ताओं के खातों में करोड़ों रुपये की भारी-भरकम सब्सिडी सीधे ट्रांसफर की जा चुकी है। निगम ने अपने तयशुदा कुल कनेक्शन लक्ष्यों का एक बड़ा हिस्सा पहले ही सफलतापूर्वक हासिल कर लिया है, जिससे यह साबित होता है कि आम जनता का रुझान अब सोलर एनर्जी की तरफ तेजी से बढ़ रहा है।
उपभोक्ताओं की शिकायतों और प्रशासनिक बाधाओं को दूर करने के लिए भुगतान के नियमों को भी काफी सरल बना दिया गया है। अब नेट-मीटर्स और ऑटो-लोड एन्हांसमेंट चार्जेस की बिलिंग प्रक्रिया में बदलाव किया गया है। पहले जहां इसके लिए प्रक्रिया जटिल हुआ करती थी, वहीं अब इन्हें प्लांट की कमिशनिंग के बाद ही लिया जाएगा, जिससे लोगों को अनावश्यक भागदौड़ से मुक्ति मिल गई है और वे आसानी से अपने घरों पर सोलर पैनल लगवा पा रहे हैं।
सरकारी भवनों और संस्थानों के लिए सख्त निर्देश
सिर्फ आम नागरिकों और सोसाइटियों तक ही नहीं, बल्कि सरकारी स्तर पर भी इस अभियान को पूरी गंभीरता से लागू किया जा रहा है। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि मार्च 2027 की डेडलाइन तक राज्य के सभी स्कूल, कॉलेज, अस्पताल और यहां तक कि रजिस्टर्ड गौशालाओं जैसी सरकारी व सार्वजनिक इमारतें भी सौ फीसदी सोलर पावर पर शिफ्ट हो जानी चाहिए। इससे सरकारी खजाने पर बिजली बिलों का बोझ कम होगा और एक मिसाल कायम होगी।
"हम पर्यावरण संरक्षण और नागरिकों को सस्ती बिजली उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। तय समय सीमा के भीतर सभी जरूरी संस्थानों और बड़े परिसरों में सोलर सिस्टम लगाना अनिवार्य कर दिया गया है, ताकि हरियाणा हरित ऊर्जा के मामले में देश का अग्रणी राज्य बन सके।" — प्रशासनिक प्रवक्ता, हरियाणा सरकार
प्रशासनिक स्तर पर काम में तेजी लाने के लिए थर्ड-पार्टी निरीक्षण एजेंसियों को भी मैदान में उतारा गया है। प्रबंध निदेशकों ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे निरीक्षण और कनेक्शन जारी करने की प्रक्रिया में किसी भी तरह की देरी न होने दें। हालांकि, इंडस्ट्री से जुड़े जानकारों का यह भी मानना है कि घरेलू स्तर पर सोलर पैनलों और उपकरणों की आपूर्ति को सुचारू बनाए रखना भविष्य की सफलता के लिए बेहद जरूरी होगा।
पुरानी कमियों से सीखकर भविष्य की तैयारी
विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार उठाए जा रहे कदम पिछले अनुभवों से सीख लेकर तय किए गए हैं। कुछ साल पहले सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट की एक रिपोर्ट में यह बात सामने आई थी कि केवल कमजोर प्रवर्तन और ढीले नियमों के कारण गुरुग्राम जैसे बड़े शहरों में स्वीकृत सोलर क्षमता का बहुत ही कम हिस्सा जमीन पर उतर पाया था। लेकिन अब सरकार ने 'सेवा सेतु' जैसे विशेष अभियानों के जरिए पंजीकरण और फाइनेंसिंग जैसी समस्याओं का मौके पर ही समाधान करना शुरू कर दिया है।
आने वाले समय में इन तमाम पहलों का दूरगामी परिणाम देखने को मिलेगा। एक तरफ जहां कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी, वहीं दूसरी तरफ आम आदमी का बिजली बिल कम होने से उसकी जेब पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा। राज्य सरकार की यह कोशिश यदि इसी गति से आगे बढ़ती रही, तो हरियाणा देश के उन चुनिंदा राज्यों में शामिल हो जाएगा जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर सौर ऊर्जा पर निर्भर हैं।








