ब्रह्मांड के आंचल में छुपा था एक और रहस्यमयी दानव
अंतरिक्ष का संसार हमेशा से रहस्यों से भरा रहा है, जहाँ हर रोज नए खुलासे वैज्ञानिकों को भी हैरान कर देते हैं। हाल ही में खगोलविदों के हाथ एक ऐसी सफलता लगी है, जिसने अंतरिक्ष विज्ञान की दुनिया में हलचल मचा दी है। पृथ्वी से लगभग बारह हजार प्रकाश वर्ष की दूरी पर एक ऐसा खगोलीय तंत्र छिपा बैठा था, जो अपनी प्रचंड ऊर्जा और अनोखे स्वभाव के कारण चर्चा का केंद्र बन गया है। दिलचस्प बात यह है कि यह दैत्य पिछले तीन दशकों से वैज्ञानिकों की नजरों के सामने ही मौजूद था, लेकिन ब्रह्मांडीय धूल की एक मोटी दीवार ने इसे इस तरह से ढक रखा था कि कोई इसकी मौजूदगी भांप नहीं सका।
स्पेन की यूनिवर्सिटी ऑफ जाएन के शोधकर्ताओं ने इस छिपे हुए रहस्य से पर्दा उठाया है। आधुनिक तकनीक और उन्नत दूरबीनों की मदद से अब जाकर इस प्राचीन अंतरिक्ष पिंड के बारे में सटीक जानकारी मिल पाई है। विज्ञान की भाषा में इसे 'माइक्रोब्लेजार' नाम दिया गया है, जो सामान्य ब्लैक होल की तुलना में काफी अलग तरीके से काम करता है। अंतरिक्ष अध्ययन से जुड़े जानकारों का मानना है कि यह खोज हमें ब्रह्मांड के कई अनसुलझे रहस्यों को समझने में मदद करेगी।
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क्यों नहीं आ रहा था नजर? धूल और गैस के पर्दे का सच
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा था कि इतनी भारी मात्रा में ऊर्जा उत्सर्जित करने वाला यह सिस्टम अब तक हमारी पकड़ से दूर क्यों था? इसका जवाब अंतरिक्ष में फैले गैस और धूल के बादलों में छिपा है। यह माइक्रोब्लेजार इंटरस्टेलर गैस और अंतरिक्ष की मोटी धूल के आगोश में इस कदर लिपटा हुआ था कि सामान्य ऑप्टिकल टेलीस्कोप से ली जाने वाली तस्वीरें इसे देख पाने में नाकाम साबित होती रही हैं। यह ऐसा था जैसे कोई चमकती हुई टॉर्च किसी गहरे और धुंधले कोहरे के पीछे रख दी गई हो।
इस रिसर्च का नेतृत्व करने वाले प्रमुख वैज्ञानिक जोसेप मार्ती ने इस बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने साफ किया कि इस सिस्टम से जुड़ी हर एक चीज हमारी आंखों के ठीक सामने ही मौजूद थी, बस उसे देखने के लिए सही नजरिए और आधुनिक उपकरणों की जरूरत थी। दशकों पहले जब अंतरिक्ष के पुराने कैटलॉग तैयार किए जा रहे थे, तब इसे शुरुआती तौर पर दर्ज तो किया गया था, लेकिन तकनीकी सीमाओं के चलते बाद में इसे भुला दिया गया। अब जाकर आधुनिक डेटा और अंतरिक्षीय उपग्रहों की मदद से इसके पुराने इतिहास को खंगाला गया है।
सामान्य ब्लेजार और नए माइक्रोब्लेजार में क्या है अंतर?
खगोल विज्ञान में ब्लेजार कोई नई बात नहीं है। आमतौर पर दूर स्थित सक्रिय आकाशगंगाओं के केंद्र में विशालकाय ब्लैक होल पाए जाते हैं, जिनका वजन हमारे सूरज से लाखों या करोड़ों गुना ज्यादा होता है। जब ये भीमकाय ब्लैक होल अपने आसपास के पदार्थों को निगलते हैं और ऊर्जा के जेट सीधे हमारी दिशा में फेंकते हैं, तो उन्हें ब्लेजार कहा जाता है। लेकिन हाल ही में खोजे गए इस नए सिस्टम की कहानी थोड़ी अलग और ज्यादा रोमांचक है।
यहाँ मौजूद ब्लैक होल कोई सुपरमैसिव दानव नहीं है, बल्कि यह एक स्टेलर-मास ब्लैक होल है। इसका मतलब यह है कि इसका वजन हमारे सूरज से केवल कुछ सौ गुना ही ज्यादा है। आकार में अपेक्षाकृत छोटा होने के बावजूद यह किसी विशालकाय ब्लेजार की तरह बेहद घातक और ऊर्जावान व्यवहार कर रहा है। इसी अनोखे बर्ताव के कारण वैज्ञानिकों ने इसे माइक्रोब्लेजार की श्रेणी में रखा है, जो अपने आप में एक दुर्लभ खगोलीय घटना है।
सूरज से पांच लाख गुना ज्यादा ताकतवर होने का राज
इस कॉस्मिक बुलबुले की चमक और इसकी ताकत ने शोधकर्ताओं को भी अचंभित कर दिया है। यह हमारे सूरज से लगभग पाँच लाख गुना अधिक शक्तिशाली होकर ब्रह्मांड में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहा है। यूनिवर्सिटी के ही एक अन्य रिसर्चर पेड्रो लुक-एस्कैमिला ने इस अनोखे सिस्टम के काम करने के तरीके को समझाया है। उनके अनुसार, इस पूरे तंत्र का इंजन और उसका टारगेट दो अलग-अलग चीजें हैं। यहाँ से निकलने वाले ऊर्जावान जेट अपनी गति से ऊर्जा पैदा करते हैं और दूर मौजूद धूल के बादल उस रोशनी को परावर्तित करके इसे चमकाते हैं।
"इस सिस्टम के बारे में सब कुछ हमारी आंखों के ठीक सामने छुपा हुआ था, जिसे आधुनिक तकनीक के बिना पहचान पाना असंभव सा लग रहा था।" — जोसेप मार्ती, प्रमुख रिसर्चर, यूनिवर्सिटी ऑफ जाएन
भविष्य के अंतरिक्ष अनुसंधान के लिए क्यों अहम है यह खोज?
इस अध्ययन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित ‘एस्ट्रोनॉमी एंड एस्ट्रोफिजिक्स’ जर्नल में प्रकाशन के लिए स्वीकार किया गया है। यूरोपीय वीएलबीआई नेटवर्क और गैया सैटेलाइट से मिले सटीक डेटा ने इस खोज पर मुहर लगाई है। वैज्ञानिक अब इस बात का गहराई से अध्ययन कर रहे हैं कि किस प्रकार ब्लैक होल अपनी ऊर्जा को आसपास की आकाशगंगाओं में प्रसारित करते हैं। यह खोज न केवल ब्लैक होल के व्यवहार को समझने का नया जरिया बनेगी, बल्कि ब्रह्मांड के शुरुआती निर्माण और विकास के कई अनकहे अध्यायों को भी सामने लाएगी। आम इंसान के लिए भले ही यह एक खगोलीय पहेली हो, लेकिन विज्ञान जगत के लिए यह अंतरिक्ष को देखने का नजरिया बदलने वाली एक बड़ी सफलता है।








