नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश की न्याय व्यवस्था इन दिनों कई बड़े और कड़े फैसलों को लेकर लगातार चर्चा में बनी हुई है। हाल ही में अलग-अलग राज्यों के उच्च न्यायालयों यानी हाईकोर्ट से कई ऐसे आदेश सामने आए हैं जिन्होंने आम जनता और कानूनी गलियारों दोनों का ध्यान खींचा है। चाहे वह मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का निजी यूनिवर्सिटी के नियमों पर सवाल उठाने वाले वकील पर जुर्माना लगाने का मामला हो, या फिर सार्वजनिक जगहों पर राजनीतिक दलों के झंडे हटाने से जुड़ा आदेश, अदालतों की सख्ती साफ नजर आ रही है। इन फैसलों का सीधा असर समाज और व्यवस्था पर पड़ रहा है।
सबसे पहले बात करते हैं मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की। यहाँ एक मामले में अदालत ने निजी यूनिवर्सिटी के नियामक तंत्र यानी नियमों पर सवाल उठाने वाले एक वकील पर पचहत्तर हजार रुपये का जुर्माना लगा दिया है। अदालत का मानना था कि इस तरह से बिना ठोस आधार के बार-बार सवाल उठाना और न्याय प्रक्रिया का समय बर्बाद करना सही नहीं है। इस कड़े कदम से वकीलों और याचिकाकर्ताओं के बीच यह संदेश गया है कि अदालतों में कोई भी मामला पूरी तैयारी और जिम्मेदारी के साथ ही लाया जाना चाहिए।
सार्वजनिक जगहों पर राजनीतिक झंडे हटाने का सख्त आदेश
एक अन्य बड़े मामले में हाईकोर्ट की खंडपीठ ने उस आदेश को पूरी तरह सही ठहराया है जिसमें सार्वजनिक जगहों से राजनीतिक दलों और संगठनों के स्थायी झंडे हटाने की बात कही गई थी। अक्सर देखा जाता है कि चौराहों, पार्कों और सरकारी इमारतों के पास राजनीतिक दल अपने झंडे और खंभे गाड़ देते हैं। अदालत के इस फैसले से साफ हो गया है कि सार्वजनिक जमीनों पर किसी भी तरह का अवैध कब्जा या राजनीतिक प्रदर्शन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। नगर निगम और स्थानीय प्रशासन को अब इन आदेशों का सख्ती से पालन कराना होगा।
दूसरी ओर, केरल के चर्चित जि वध मामले में भी हाईकोर्ट से एक अहम अपडेट सामने आया है। अदालत ने इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत के इस रुख से साफ है कि मौजूदा पुलिस जांच और अदालमी प्रक्रिया पर भरोसा कायम रखा गया है। इस बहुचर्चित मामले में अदालत के फैसले ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि हर मामले में केंद्रीय एजेंसी की जांच जरूरी नहीं होती, यदि राज्य की एजेंसियां सही दिशा में काम कर रही हैं।
मुंबई मेट्रो-तीन के निर्माण कार्यों को रात में भी मिली हरी झंडी
महाराष्ट्र की आर्थिक राजधानी मुंबई से भी हाईकोर्ट का एक राहत भरा फैसला सामने आया है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने मुंबई मेट्रो-तीन परियोजना के तहत रात के समय निर्माण कार्य करने की अनुमति दे दी है। शहर में यातायात की भारी समस्या और दिन में काम करने की सीमाओं को देखते हुए यह फैसला बहुत अहम माना जा रहा है। अदालत ने हालांकि यह भी सुनिश्चित किया है कि रात के समय काम के दौरान आसपास के लोगों को ज्यादा परेशानी न हो और नियमों का पूरा पालन किया जाए।
देश के इन तमाम उच्च न्यायालयों के फैसलों से यह बात बिल्कुल साफ हो जाती है कि न्यायपालिका जनता की सुविधा, व्यवस्था की मजबूती और नियमों के पालन को लेकर बेहद गंभीर है। चाहे वह विश्वविद्यालयों की कार्यप्रणाली हो, सार्वजनिक जगहों का रख-रखाव हो या फिर शहर की बड़ी विकास परियोजनाएं, अदालतों की पैनी नजर हर गतिविधि पर बनी हुई है। आने वाले दिनों में इन फैसलों का असर जमीन पर साफ दिखाई देगा और प्रशासन को भी अपनी कार्यशैली में और अधिक पारदर्शिता लानी होगी।




