हिमाचल प्रदेश में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था आने वाले दिनों में चरमरा सकती है। हिमाचल प्रदेश रोडवेज बस परिवहन कॉरपोरेशन (एचआरटीसी) चालक-परिचालकों ने चंबा के एक सेक्शन ऑफिसर और निगम प्रबंधन के खिलाफ कड़ा रुख अपना लिया है। शिमला में जोरदार प्रदर्शन करते हुए यूनियन ने साफ कर दिया है कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
वित्तीय अनियमितताओं और मनमानी का गंभीर आरोप
एचआरटीसी चालक यूनियन के अध्यक्ष मान सिंह ठाकुर ने शिमला में मीडिया और प्रशासन के सामने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने आरोप लगाया कि चंबा में तैनात सेक्शन ऑफिसर लगातार वित्तीय अनियमितताओं को अंजाम दे रहे हैं और इसका पूरा ठीकरा निर्दोष कंडक्टरों पर फोड़ा जा रहा है। यूनियन का कहना है कि कर्मचारियों की लगातार शिकायतों के बावजूद प्रबंधन इस अधिकारी का बचाव कर रहा है और चालक-परिचालकों को बेवजह परेशान किया जा रहा है।
यूनियन ने यह भी खुलासा किया कि पिछले 20 दिनों से अधिक समय बीत जाने के बाद भी आरोपी सेक्शन ऑफिसर के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। इसके अलावा, कर्मचारियों का यह भी आरोप है कि उनकी सैलरी से जीपीएफ (सामान्य भविष्य निधि) की राशि लगातार काटी जा रही है, लेकिन पिछले तीन महीनों से यह पैसा उनके जीपीएफ खातों में जमा नहीं किया जा रहा है।
24 घंटे का अल्टीमेटम और बड़े आंदोलन की चेतावनी
कर्मचारी यूनियन ने प्रबंधन को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि अगले 24 घंटों के भीतर संबंधित सेक्शन ऑफिसर के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की गई, तो आंदोलन को और तेज कर दिया जाएगा। तय समय सीमा में मांग पूरी न होने की स्थिति में 8 अक्टूबर से सबसे पहले चंबा डिपो के पहिए जाम किए जाएंगे। इसके बाद भी यदि प्रबंधन नहीं चेता, तो 9 अक्टूबर से पूरे हिमाचल प्रदेश में एचआरटीसी की बस सेवा पूरी तरह से बंद कर दी जाएगी।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और रिपोर्टों के आधार पर तैयार इस खबर के दावों की सत्यता की 'The Freelance' स्वतंत्र रूप से पुष्टि करता है। यह मामला हिमाचल प्रदेश में परिवहन व्यवस्था से जुड़ा एक बड़ा मुद्दा बना हुआ है। जानकारी साभार: संबंधित यूनियन बयान / मीडिया रिपोर्ट्स।






