त्योहारी सीजन की आहट के साथ रियल एस्टेट बाजार में लौटी रौनक
देश के आवास बाजार के लिए जुलाई-सितंबर 2026 की तिमाही खासी उत्साहजनक रही है। त्योहारी सीजन की शुरुआत से ठीक पहले देश के सात प्रमुख महानगरों में प्रॉपर्टी की खरीदारी ने रफ्तार पकड़ ली है। बाजार के जानकारों और प्रॉपर्टी कंसल्टेंट फर्म अनारक रिसर्च के ताजा आंकड़ों के मुताबिक इस तिमाही के दौरान कुल एक लाख से अधिक आवासीय इकाइयों की बिक्री दर्ज की गई है। पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले यह आंकड़ा करीब तीन फीसदी अधिक है जबकि पिछली तिमाही के आंकड़ों से तुलना करें तो इसमें दस फीसदी की मजबूत बढ़त देखने को मिली है।
कोरोना महामारी के बाद से भारतीय रियल एस्टेट सेक्टर लगातार नए आयाम छू रहा है। हालांकि निर्माण लागत में लगातार इजाफा होने और विभिन्न शहरों में ग्राहकों की प्राथमिकताओं में बदलाव आने के बावजूद रेजिडेंशियल मार्केट ने निवेशकों और घर खरीदारों को निराश नहीं किया है। लोग अपने सपनों का आशियाना खरीदने के लिए खुलकर निवेश कर रहे हैं जिसका सीधा असर कुल बिक्री के आंकड़ों पर साफ दिखाई दे रहा है। कुल मिलाकर यह समय डेवलपर्स और खरीदारों दोनों के लिए ही बाजार की नब्ज समझने का एक अहम दौर बन गया है।
संबंधित खबरें
मुंबई मेट्रोपॉलिटन और बेंगलुरु का जलवा कायम
देश के शीर्ष सात शहरों में आवासीय संपत्तियों की बिक्री के मामले में मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन यानी एमएमआर और सूचना प्रौद्योगिकी का हब कहे जाने वाले बेंगलुरु ने सबसे आगे बाजी मारी है। इन दोनों बड़े महानगरों ने मिलकर कुल बिक्री में लगभग 48 प्रतिशत की हिस्सेदारी अपने नाम की है। अकेले एमएमआर क्षेत्र में करीब 31,750 घरों के सौदे हुए जबकि बेंगलुरु में खरीदारों ने लगभग 16,670 यूनिट्स को अपने नाम किया। महानगरों में रियल एस्टेट की यह मांग इस बात का प्रमाण है कि टियर-वन शहरों में आज भी प्राइम प्रॉपर्टी की जबरदस्त भूख बनी हुई है।
अन्य प्रमुख शहरों की बात करें तो हैदराबाद में हाउसिंग सेल्स में सबसे ज्यादा 15 फीसदी की जोरदार उछाल दर्ज की गई और वहां करीब 12,970 घर बिके। इसके विपरीत पुणे और चेन्नई जैसे शहरों में बिक्री के आंकड़ों में मामूली गिरावट भी देखने को मिली है। पुणे में सालाना आधार पर बिक्री छह फीसदी घटकर 15,690 यूनिट रही जबकि चेन्नई में दस फीसदी की सुस्ती के साथ करीब 5,395 घर ही बिक सके। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र यानी एनसीआर में भी बिक्री एक फीसदी की हल्की गिरावट के साथ 13,765 यूनिट्स पर सिमट गई।
नई परियोजनाओं के लॉन्च में 18 प्रतिशत की भारी वृद्धि
खरीदारों के बदलते रुझान को देखते हुए देश भर के बड़े बिल्डर्स और डेवलपर्स ने भी जुलाई-सितंबर तिमाही के दौरान बाजार में नई हाउसिंग सप्लाई का अंबार लगा दिया है। शीर्ष सात शहरों में इस दौरान कुल 1,14,320 नए घर लॉन्च किए गए जो पिछले साल की इसी तिमाही के मुकाबले पूरे 18 फीसदी ज्यादा हैं। पिछले साल इस अवधि में करीब 96,690 यूनिट्स बाजार में उतारी गई थीं। एमएमआर, पुणे, बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे शहरों ने मिलकर इस नई सप्लाई का लगभग 81 फीसदी हिस्सा अकेले ही अपने पाले में कर लिया है।
आवास की कीमतों के हिसाब से देखें तो बाजार में अलग-अलग सेगमेंट की मांग साफ नजर आती है। हैदराबाद में लॉन्च हुए नए घरों में से 97 फीसदी प्रोजेक्ट्स 80 लाख रुपये से अधिक कीमत वाले प्रीमियम सेगमेंट के थे। वहीं बेंगलुरु में आने वाली नई संपत्तियों में से 81 प्रतिशत हिस्सेदारी 80 लाख से ढाई करोड़ रुपये के बीच के बजट वाले घरों की रही। कुल मिलाकर पूरे देश में अस्सी लाख रुपये से डेढ़ करोड़ रुपये तक के बजट वाले मकानों की मांग सबसे ज्यादा यानी 34 फीसदी बनी हुई है जो मध्यम वर्ग के बदलते क्रय शक्ति को दर्शाती है।
बिक्री बढ़ने के साथ बिना बिके घरों के स्टॉक में भी इजाफा
एक तरफ जहां घरों की बिक्री के आंकड़े बेहतर हुए हैं वहीं दूसरी तरफ अनसोल्ड इन्वेंट्री यानी बिना बिके घरों के स्टॉक में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सात प्रमुख शहरों में उपलब्ध कुल हाउसिंग इन्वेंट्री सालाना आधार पर 12 फीसदी बढ़कर लगभग 6,30,590 यूनिट्स तक पहुंच गई है। पिछले साल के अंत में यह आंकड़ा 5,61,760 यूनिट्स के आसपास था। विशेषज्ञों का मानना है कि नए लॉन्च में आई तेजी के कारण ही यह स्टॉक बढ़ा है लेकिन मजबूत मांग के चलते इसके जल्द ही खप जाने की पूरी उम्मीद है।
संपत्तियों की कीमतों की बात करें तो निर्माण सामग्री की लागत बढ़ने के कारण घरों के दाम में भी इजाफा हुआ है। शीर्ष सात शहरों में औसत कीमत सालाना आधार पर सात फीसदी बढ़कर 9,714 रुपये प्रति वर्ग फुट हो गई है जो कि एक साल पहले लगभग 9,105 रुपये प्रति वर्ग फुट हुआ करती थी। एनसीआर क्षेत्र में कीमतों में सबसे ज्यादा 12 फीसदी की सालाना तेजी दर्ज की गई है जिससे साफ है कि प्रापर्टी अब पहले से अधिक महंगी होती जा रही है।
विशेषज्ञों की राय और त्योहारी सीजन का भविष्य
रियल एस्टेट बाजार के मौजूदा रुझानों को लेकर उद्योग जगत के दिग्गजों का मानना है कि आने वाला त्योहारी सीजन बाजार की चाल को और अधिक गति दे सकता है। लोग शुभ अवसरों पर प्रॉपर्टी में निवेश करना पसंद करते हैं जिसे देखते हुए डेवलपर्स भी कई आकर्षक ऑफर्स बाजार में उतार रहे हैं। हालांकि घरों की बढ़ती कीमतों और आम आदमी की क्रय शक्ति को लेकर कुछ चिंताएं जरूर हैं लेकिन इसके बावजूद बाजार का कुल परिदृश्य सकारात्मक बना हुआ है।
"आने वाला त्योहारी सीजन पिछली तिमाही में दिखी हाउसिंग मार्केट की इस शानदार गतिविधि को और आगे बढ़ाने का काम कर सकता है। हालांकि, घरों की लगातार बढ़ रही कीमतों और अफोर्डेबिलिटी की चिंताओं के बीच खरीदार किसी भी बड़े फैसले से पहले काफी सोच-विचार कर रहे हैं।" — अनुज पुरी, चेयरमैन, अनारक ग्रुप
कुल मिलाकर यह साफ है कि भारतीय रियल एस्टेट बाजार तमाम चुनौतियों के बावजूद मजबूत बुनियादी फंडामेंटल पर टिका हुआ है। मध्य वर्ग और उच्च वर्ग दोनों की तरफ से प्रीमियम और मिड-इंटीग्रेटेड टाउनशिप्स की मांग बनी हुई है। आने वाले महीनों में फेस्टिव डिमांड इस सेक्टर को और ऊंचाई पर ले जाने में अहम भूमिका निभाएगी।







