नई दिल्ली/रियाद — पश्चिम एशिया की राजनीति में एक बार फिर तनाव बहुत ज्यादा बढ़ गया है। सऊदी अरब के रियाद हवाई अड्डे पर हूती विद्रोहियों ने अचानक ड्रोन और मिसाइल से बड़ा हमला कर दिया। इस भीषण हमले में तीन आम नागरिकों की मौत हो गई और लगभग छत्तीस लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। इस घटना के बाद पूरे इलाके में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है। सऊदी सुरक्षाबलों ने तुरंत मोर्चा संभाला और जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी।
इस हमले के तुरंत बाद सऊदी अरब और सहयोगी सेनाओं ने यमन के भीतर हूती विद्रोहियों के ठिकानों पर ताबड़तोड़ हवाई हमले शुरू कर दिए। शुरुआती रिपोर्ट्स के मुताबिक यमन के अंदर अंसारुल्लाह के लगभग अस्सी ठिकानों को निशाना बनाया गया है। इस कार्रवाई से यमन के ताएज और अदन जैसे इलाकों में हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं। आम लोगों की जिंदगी पूरी तरह थम गई है और लोग सुरक्षित जगहों की तलाश में घरों से भाग रहे हैं।
भारत ने रियाद हमले की की कड़ी निंदा
इस पूरे घटनाक्रम पर भारत सरकार ने भी अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने रियाद हवाई अड्डों पर हुए इन हमलों को पूरी तरह अस्वीकार्य बताया है। भारत का साफ कहना है कि शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए इस तरह के हमलों को रोकना बेहद जरूरी है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वे पश्चिम एशिया में बढ़ती हिंसा को रोकने के लिए ठोस कदम उठाएं ताकि बेकसूर लोगों की जान बचाई जा सके।
इस बीच इस युद्ध में एक नया और बड़ा मोड़ आ गया है। ख़बरों के मुताबिक पाकिस्तान ने सऊदी अरब की मदद के लिए अपनी सेना उतार दी है। पाकिस्तान ने अपने पंद्रह हजार सैनिकों और जेएफ-सत्रह फाइटर जेट्स को इस संघर्ष में शामिल होने के लिए भेजा है। साल दो हजार पंद्रह की यमन जंग से पाकिस्तान पीछे हट गया था, लेकिन इस बार सऊदी के साथ मिलकर हूतियों के खिलाफ सीधी लड़ाई में उतरने का फैसला किया गया है।
सऊदी और पाकिस्तान की साझा रणनीति का असर
विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान के सैनिकों के उतरने से इस जंग का दायरा और बड़ा हो सकता है। हूती विद्रोही लगातार आधुनिक हथियारों और ड्रोन्स का इस्तेमाल कर रहे हैं जिससे सऊदी अरब की सुरक्षा व्यवस्था के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। सऊदी राजकुमार मोहम्मद बिन सलमान की अगुवाई में इस बार हूतियों के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया गया है। तुर्की और अन्य क्षेत्रीय ताकतें भी इस पूरी स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए हैं।
जमीनी स्तर पर हालात हर घंटे के साथ और ज्यादा खतरनाक होते जा रहे हैं। यमन के आम नागरिकों को इस युद्ध की भारी कीमत चुकानी पड़ रही है क्योंकि खाने-पीने की चीजों और दवाइयों की भारी कमी हो गई है। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। लेकिन जिस तरह से हमले और पलटवार का दौर चल रहा है, उसे देखकर लगता है कि शांति बहाली में अभी लंबा वक्त लग सकता है।
द फ्रीलान्स की ग्राउंड रिपोर्ट और निष्कर्ष
हमारी फील्ड टीम और वैश्विक रक्षा मामलों के जानकारों का मानना है कि यह संघर्ष केवल सऊदी अरब और यमन तक सीमित नहीं रहेगा। इसमें कई बाहरी देशों की सैन्य और कूटनीतिक एंट्री ने इसे वैश्विक संकट बना दिया है। आने वाले दिनों में अगर कूटनीति के जरिए बात नहीं बनी, तो पश्चिम एशिया का आसमान एक बार फिर बारूद के धुएं से भर सकता है। द फ्रीलान्स इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए रखेगा।





