नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — भारतीय वायुसेना के प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने रक्षा क्षेत्र में अमेरिका के दोहरे रविंद पर तीखा तंज कसा है। उन्होंने एक खुले मंच पर अमेरिकी कमांडर के सामने ही यह बात कह दी कि अमेरिका हमें F-35 विमान बेचने की बात तो करता है, लेकिन असलियत में वह हमें उसके पास तक नहीं फटकने देता। इस बयान के बाद रक्षा गलियारों में हलचल तेज हो गई है। भारत और अमेरिका के बीच सैन्य सहयोग लगातार बढ़ रहा है, लेकिन अत्याधुनिक हथियारों और तकनीक के मामले में अभी भी कई तरह की बंदिशें बनी हुई हैं। वायुसेना प्रमुख के इस बयान को बहुत खुलकर और बेबाक अंदाज में दिया गया माना जा रहा है।
अपनी इस टिप्पणी में वायुसेना प्रमुख ने साफ किया कि जब तक दोनों देशों के बीच तकनीक साझा करने को लेकर पूरी पारदर्शिता नहीं आती, तब तक ऐसे बड़े सौदों पर बात करना बेमानी है। भारत अपनी रक्षा जरूरतों के लिए अब स्वदेशीिकरण पर जोर दे रहा है। तेजस जैसे विमानों और अन्य रक्षा उपकरणों का तेजी से निर्माण किया जा रहा है। वायुसेना प्रमुख खुद भी हाल ही में तेजस विमान में उड़ान भरते नजर आए थे। उनका यह कार्यकाल और विदाई से जुड़ी उड़ानें भी इन दिनों सुर्खियों का हिस्सा बनी हुई हैं। वायुसेना प्रमुख 31 अक्टूबर को अपने पद से सेवानिवृत्त होने वाले हैं।
ऑपरेशन सिंदूर और देश की बढ़ती सैन्य ताकत
वायुसेना प्रमुख ने हाल ही में 'ऑपरेशन सिंदूर' का भी जिक्र किया और बताया कि इस अभियान के जरिए पूरी दुनिया ने भारतीय वायुसेना की ताकत को साफ-साफ देखा है। आज भारतीय वायुसेना किसी भी परिस्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार और सक्षम है। गाजियाबाद और देश के अन्य एयरबेस पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। वायुसेना के पायलट और जवान दिन-रात देश की सीमाओं की रक्षा में मुस्तैद रहते हैं। ऑपरेशन सिंदूर की सफलता ने यह साबित कर दिया है कि भारतीय सेनाएं आधुनिक युद्धकौशल में किसी से पीछे नहीं हैं। देश की जनता भी अपनी सेनाओं के इस शौर्य और पराक्रम पर गर्व महसूस करती है।
सैन्य साजोसामान के मोर्चे पर बात करें तो वायुसेना प्रमुख ने स्पष्ट किया कि न केवल F-35 बल्कि रूस के Su-57 विमान को लेकर भी अभी तक कोई ठोस या आधिकारिक फैसला नहीं हुआ है। भारत अपनी रणनीतिक जरूरत और बजट के हिसाब से ही रक्षा सौदों को आगे बढ़ाता है। किसी भी विदेशी दबाव में आकर जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं लिया जा रहा है। देश की तीनों सेनाएं अब आत्मनिर्भर भारत के मंत्र के तहत स्वदेशी हथियारों को प्राथमिकता दे रही हैं। चाहे लड़ाकू विमान हों या रडार प्रणाली, भारत खुद अपनी तकनीक विकसित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
विदाई से पहले आखिरी उड़ान और सैनिकों का सम्मान
अपने कार्यकाल के अंतिम दिनों में वायुसेना प्रमुख एपी सिंह ने स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस में अपनी आखिरी उड़ान भरी। यह पल भारतीय विमानन इतिहास और रक्षा क्षेत्र के लिए बहुत खास रहा। एक शीर्ष कमांडर का खुद स्वदेशी विमान में उड़ना देश के वैज्ञानिकों और इंजीनियरों का बड़ा मनोबल बढ़ाता है। दूसरी ओर, देश के अलग-अलग हिस्सों में वायुसेना से सेवानिवृत्त होने वाले सैनिकों और अधिकारियों का भव्य स्वागत किया जा रहा है। हाल ही में गया जी के गुरुआ क्षेत्र में वायुसेना से रिटायर होकर लौटे अजीत कुमार का जोरदार स्वागत हुआ। उनके सम्मान में एक भव्य समारोह का आयोजन किया गया जिसमें पूरा गांव और स्थानीय लोग शामिल हुए।
इसके अलावा, वायुसेना की गतिविधियों का दायरा सिर्फ सरहदों तक सीमित नहीं है। एयर शो की तैयारियों के बीच कोलकाता के सैम मानेकशॉ क्रूज पर वायुसेना के हेलीकॉप्टर के उतरने का वीडियो भी सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ। इन तमाम आयोजनों और गतिविधियों से साफ है कि भारतीय वायुसेना हर मोर्चे पर अपनी सक्रियता दिखा रही है। चाहे वह तकनीकी सौदों पर दो टूक बात करना हो, सरहदों की सुरक्षा हो या फिर देश के भीतर जनता के साथ जुड़ाव हो, वायुसेना ने हमेशा मिसाल पेश की है। आने वाले समय में देश की वायु रक्षा प्रणाली को और अधिक मजबूत बनाने के लिए कई नई योजनाएं पाइपलाइन में हैं।
स्वदेशी रक्षा तकनीक और भविष्य की चुनौतियां
आज भारतीय वायुसेना के सामने पुरानी हो चुकी तकनीक को बदलने और नई पीढ़ी के विमानों को बेड़े में शामिल करने की बड़ी चुनौती है। अमेरिकी और रूसी विमानों के चक्कर में पड़ने के बजाय भारत अब अपने घरेलू रक्षा उद्योग को पंख देने में जुटा है। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड जैसे संस्थान युद्धस्तर पर नए विमान तैयार कर रहे हैं। वायुसेना प्रमुख के तीखे बयानों से यह संदेश साफ चला गया है कि भारत अब केवल खरीदार नहीं रहना चाहता, बल्कि वह रक्षा तकनीक में बराबरी का साझीदार बनना चाहता है। आने वाले महीनों में नए वायुसेना प्रमुख की नियुक्ति और देश की रक्षा नीतियों में इस दिशा में और क्या बदलाव आते हैं, इस पर सबकी निगाहें टिकी रहेंगी।












