नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश के सबसे पुराने सरकारी बैंकों में गिने जाने वाले आईडीबीआई बैंक को लेकर बहुत बड़ा और अहम फैसला सामने आया है। केंद्र सरकार ने इस बैंक में अपनी बड़ी हिस्सेदारी बेचने का रास्ता पूरी तरह साफ कर दिया है। करीब 52,878 करोड़ रुपये की इस मेगा डील पर केंद्रीय कैबिनेट ने अपनी मुहर लगा दी है। सरकार इस पूरी प्रक्रिया के तहत बैंक में अपनी 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने जा रही है। एअर इंडिया के निजीकरण के बाद सरकारी संपत्ति के विनिवेश के मामले में इसे सबसे बड़ा कदम माना जा रहा है।
सामने आई रिपोर्ट के मुताबिक, इस भारी-भरकम डील के बाद 62 साल पुराना यह बैंक पूरी तरह से प्राइवेट हाथों में चला जाएगा। बैंक की इस बड़ी हिस्सेदारी को खरीदने वाली कंपनी का संबंध भारत में जन्मे एक कनाडाई अरबपति से है। फेयरफैक्स समूह और उससे जुड़ी कंपनियों ने इस खरीदारी में सबसे आगे रहकर बाजी मारी है। इस सौदे के पूरा होने के बाद बैंक के मालिकाना हक में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। जानकारों का मानना है कि आने वाले तीन सालों के भीतर बैंक के नाम और कामकाज के ढांचे में भी बदलाव किया जा सकता है।
शेयर बाजार में बैंक के शेयरों पर दिखा असर
इस बड़ी खबर के सामने आते ही शेयर बाजार में आईडीबीआई बैंक के शेयरों को लेकर निवेशकों में जबरदस्त हलचल मच गई। पिछले कुछ सत्रों के दौरान बैंक के शेयरों में अच्छी खासी तेजी दर्ज की गई है। शेयर बाजार के जानकारों का कहना है कि विनिवेश की प्रक्रिया तय समय पर आगे बढ़ने से निवेशकों का भरोसा इस बैंक पर और अधिक मजबूत हुआ है। तिमाही नतीजों से पहले आई इस बड़ी खबर के कारण निवेशकों ने बैंक के शेयरों में जमकर खरीदारी की है। बाजार के विश्लेषक मान रहे हैं कि आने वाले दिनों में बैंक के शेयरों की चाल पर इस डील का गहरा असर बना रहेगा।
सरकारी बैंक से प्राइवेट बैंक बनने के इस सफर में बैंक के ग्राहकों और कर्मचारियों के मन में कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, सरकार और बैंक प्रबंधन की तरफ से यह भरोसा दिलाया गया है कि ग्राहकों के खातों, जमा राशि और पुरानी शर्तो पर इस बदलाव का कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा। बैंक के रोजमर्रा के काम पहले की तरह ही सुचारू रूप से चलते रहेंगे। कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए भी कुछ विशेष नियम और शर्तें इस डील का हिस्सा बनाई गई हैं ताकि किसी भी प्रकार का असमंजस न रहे।
एअर इंडिया के बाद सबसे बड़ा विनिवेश
वित्तीय मामलों के जानकारों का कहना है कि यह सौदा देश के बैंकिंग इतिहास के सबसे बड़े बदलावों में से एक है। सरकार लंबे समय से घाटे और सुस्ती से जूझ रहे सरकारी उपक्रमों से अपनी हिस्सेदारी बाहर निकालने की रणनीति पर काम कर रही है। एअर इंडिया को टाटा समूह को सौंपने के बाद सरकार का यह दूसरा सबसे बड़ा और कड़ा फैसला है। आईडीबीआई बैंक को पिछले कुछ सालों में भारी एनपीए और वित्तीय संकट से उबारने के लिए कई तरह के उपाय किए गए थे। अब बैंक पूरी तरह मुनाफे की पटरी पर लौट आया है और ऐसे समय में इसे निजी हाथों को सौंपना सरकार की आर्थिक नीति का अहम हिस्सा है।
जमीनी स्तर पर बैंक की शाखाओं में कामकाज आम दिनों की तरह ही सामान्य रूप से चल रहा है। बैंक के ग्राहकों को अभी इस बड़े बदलाव के कागजी और तकनीकी पहलुओं के पूरा होने का इंतजार करना होगा। नियामकीय मंजूरियां मिलने के बाद ही इस सौदे की अंतिम प्रक्रिया पूरी की जाएगी। द फ्रीलान्स की टीम इस पूरी डील पर लगातार नजर बनाए हुए है और जैसे ही कोई नया अपडेट सामने आएगा, हम सबसे पहले आप तक पहुंचाएंगे।





