देश के सबसे प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थानों में शुमार भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) बॉम्बे से एक बेहद दुखद और झकझोर देने वाली खबर सामने आई है। यहां के पवई कैंपस में शुक्रवार शाम को एक सेकेंड ईयर के छात्र ने अपने हॉस्टल के कमरे में कथित तौर पर आत्महत्या कर ली। इस घटना के बाद से पूरे परिसर में गम और गुस्से का माहौल है। मृतक छात्र एनर्जी साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग में बीटेक की पढ़ाई कर रहा था। इस दुखद घटना के सामने आते ही छात्र समुदाय में भारी आक्रोश फैल गया और सैकड़ों की संख्या में छात्र कॉलेज प्रशासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने के लिए सड़कों पर उतर आए।
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, यह पूरी घटना शुक्रवार की है जब संस्थान में परीक्षाएं चल रही थीं। दिन में परीक्षा के दौरान छात्र को मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते हुए पकड़ा गया था। IIT बॉम्बे के अधिकारियों के अनुसार, छात्र ने परीक्षा के दौरान अपना क्वेश्चन पेपर ChatGPT पर अपलोड कर दिया था। हालांकि, संस्थान की ओर से स्पष्ट किया गया है कि इस मामले में उस छात्र के खिलाफ कोई भी अनुशासनात्मक कार्रवाई या पुलिस में शिकायत दर्ज नहीं की गई थी। परीक्षा शाम के चार बजे समाप्त हुई थी, जिसके बाद छात्र अपने हॉस्टल के कमरे में चला गया था। कुछ ही घंटों बाद वह अपने कमरे में फंदे से लटका हुआ मिला।
परीक्षा के बाद कमरे में लौटा छात्र, शाम को मिला फंदे से लटका हुआ
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में ले लिया। पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए राजावाड़ी अस्पताल भेज दिया है। शुरुआती जांच में पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आखिर ऐसी कौन सी बात थी जिसके चलते छात्र ने इतना बड़ा कदम उठा लिया। क्या परीक्षा के दौरान मोबाइल पकड़े जाने की बात से वह अत्यधिक तनाव में आ गया था या फिर इसके पीछे कोई और निजी और अकादमिक कारण थे? पुलिस मृतक छात्र के दोस्तों, रूममेट्स और सहपाठियों से पूछताछ कर रही है ताकि उसकी मानसिक स्थिति और अंतिम घंटों की गतिविधियों के बारे में पुख्ता जानकारी मिल सके।
इस दुखद घटना के बाद संस्थान के भीतर छात्रों की सुरक्षा और उनके मानसिक स्वास्थ्य को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। महज पिछले सात महीनों के भीतर IIT बॉम्बे कैंपस में आत्महत्या का यह तीसरा मामला सामने आया है। लगातार हो रही ऐसी घटनाओं ने न सिर्फ छात्रों और उनके परिजनों को, बल्कि संस्थान के प्रोफेसरों और प्रशासकों को भी गहरी चिंता में डाल दिया है। छात्रों का कहना है कि उच्च शिक्षा संस्थानों में अकादमिक दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे निपटने के लिए प्रशासन को और अधिक संवेदनशील होने की आवश्यकता है।
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छात्रों का फूटा गुस्सा, कैंपस में किया जोरदार प्रदर्शन
छात्र की मौत की खबर फैलते ही शुक्रवार शाम को ही सैकड़ों की संख्या में छात्र हॉस्टल परिसरों से बाहर निकल आए। देखते ही देखते 400 से अधिक छात्र प्रशासनिक भवन के पास इकट्ठा हो गए और जमकर विरोध प्रदर्शन किया। छात्रों का आरोप है कि परीक्षा के दौरान हुए विवाद और मानसिक दबाव के कारण ही उनके साथी ने यह खौफनाक कदम उठाया। प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने संस्थान प्रशासन से कैंपस में छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को सुधारने के लिए कड़े कदम उठाने की मांग की।
बढ़ते हंगामे को देखते हुए IIT बॉम्बे के निदेशक प्रो. शिरीष केदारे खुद मौके पर पहुंचे और प्रदर्शन कर रहे छात्रों से मुलाकात की। उन्होंने छात्रों की बात को ध्यान से सुना और उन्हें निष्पक्ष जांच का भरोसा दिया। छात्रों के भारी विरोध और शैक्षणिक माहौल की गंभीरता को देखते हुए संस्थान ने फिलहाल चल रही सभी मिड-सेमेस्टर परीक्षाओं को टालने का बड़ा फैसला लिया है। संस्थान का कहना है कि इस समय छात्रों का भावनात्मक समर्थन करना और सामान्य स्थिति बहाल करना उनकी पहली प्राथमिकता है।
संस्थान ने जताया गहरा दुख, काउंसलिंग सेवाओं पर जोर
इस पूरी घटना के बाद IIT बॉम्बे प्रशासन ने एक आधिकारिक बयान जारी कर छात्र की असामयिक मौत पर गहरा शोक व्यक्त किया है। संस्थान ने कहा कि वह इस मुश्किल समय में मृतक छात्र के परिवार, उसके दोस्तों और फैकल्टी सदस्यों के साथ पूरी तरह खड़ा है और सभी को आवश्यक सहायता प्रदान की जा रही है। प्रशासन ने यह भी याद दिलाया कि कैंपस में छात्रों के मानसिक तनाव को दूर करने के लिए हमेशा 'स्टूडेंट वेलनेस सेंटर' (SWC) मौजूद रहता है, जहां छात्र अपनी व्यक्तिगत समस्याओं और तनाव को साझा कर सकते हैं।
"हम अपने छात्र की अचानक हुई मौत से बेहद आहत और दुखी हैं। संस्थान छात्रों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है। हम इस बात की पूरी समीक्षा कर रहे हैं कि छात्रों पर पड़ने वाले अकादमिक और मानसिक दबाव को कैसे कम किया जाए और कैंपस में एक सुरक्षित माहौल कैसे सुनिश्चित किया जाए।"— IIT बॉम्बे प्रशासन
आईआईटी परिसरों में मानसिक तनाव एक गंभीर चुनौती
देश के शीर्ष तकनीकी संस्थानों में छात्रों द्वारा आत्महत्या किए जाने की घटनाएं पिछले कुछ समय से लगातार एक राष्ट्रीय बहस का मुद्दा बनती जा रही हैं। केवल IIT बॉम्बे की बात करें तो पिछले कुछ महीनों में ऐसी कई दुखद घटनाएं सामने आ चुकी हैं। फरवरी 2026 में हॉस्टल 4 के एक छात्र ने जान दे दी थी, और उसके बाद जुलाई 2026 में भी इसी हॉस्टल के एक अन्य बीटेक छात्र ने आत्महत्या कर ली थी। इसके अलावा, देश के अन्य आईआईटी संस्थानों जैसे IIT दिल्ली में भी हाल ही में इसी तरह की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जहां कमरा न मिलने या अन्य कारणों से छात्रों ने चरम कदम उठाया था।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन संस्थानों में प्रवेश पाना जितना कठिन है, वहां अपनी पढ़ाई के दौरान मानसिक संतुलन बनाए रखना उससे भी ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो जाता है। पियर प्रेशर, करियर की चिंता, परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन का दबाव और कई बार अकेलेपन की वजह से युवा छात्र डिप्रेशन का शिकार हो जाते हैं। ऐसे में जरूरी है कि न केवल संस्थान बल्कि अभिभावक भी अपने बच्चों के व्यवहार में आने वाले बदलावों पर बारीक नजर रखें। यदि कोई छात्र अचानक चुप रहने लगे, कमरे में खुद को बंद रखे, कम खाए या हमेशा निराशाजनक बातें करे, तो इसे तुरंत पहचान कर पेशेवर मदद लेनी चाहिए ताकि किसी भी कीमती जान को बचाया जा सके।




