बॉम्बे आईआईटी छात्र की दर्दनाक मौत से हिला देश
देश के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में शुमार भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) बॉम्बे एक बार फिर से सुर्खियों में है। यहाँ पढ़ने वाले एक युवा छात्र की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने पूरे देश में उच्च शिक्षण संस्थानों के भीतर के माहौल पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एनर्जी साइंस एंड इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट में बीटेक दूसरे साल का छात्र साहिल वाकोडे अपने हॉस्टल के कमरे में मृत पाया गया था। इस घटना के बाद से ही संस्थान के भीतर और बाहर छात्रों के बीच भारी आक्रोश का माहौल है। परिजनों के गंभीर आरोपों के सामने आने के बाद इस मामले ने एक नया और संवेदनशील मोड़ ले लिया है, जिससे प्रशासन की कार्यप्रणाली कटघरे में आ गई है।
घटना के शुरुआती दिनों में संस्थान की ओर से जो शुरुआती बातें सामने आई थीं, उनके मुताबिक साहिल पर मिड-सेमेस्टर परीक्षा के दौरान मोबाइल फोन के इस्तेमाल का आरोप लगाया गया था। संस्थान का दावा था कि उसने परीक्षा के दौरान अनुचित साधनों का प्रयोग करने की कोशिश की थी। हालांकि, छात्र के माता-पिता ने इन तमाम दावों को खारिज करते हुए इसे सोची-समझी साजिश और संस्थागत उत्पीड़न का परिणाम बताया है। परिवार का कहना है कि उनके बेटे को केवल परीक्षा की एक छोटी सी घटना के नाम पर मानसिक रूप से बुरी तरह प्रताड़ित किया जा रहा था, जिससे तंग आकर उसने यह कदम उठाया।
संबंधित खबरें
माता-पिता का सनसनीखेज आरोप: 'बेटे को किया जा रहा था टारगेट'
साहिल के माता-पिता ने मीडिया के सामने आकर जो खुलासे किए हैं, वे दिल दहला देने वाले हैं। साहिल के पिता रविंद्र वाकोडे ने संस्थान के उच्च अधिकारियों और एक प्रोफेसर पर सीधा निशाना साधा है। उन्होंने प्रोफेसर सूर्यनारायण दुल्ला और डायरेक्टर शिरीष केदारे का नाम लेते हुए उन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पिता का साफ तौर पर कहना है कि उनके बेटे को लगातार टारगेट किया जा रहा था और उसे मानसिक रूप से इस कदर प्रताड़ित किया गया कि उसके पास कोई और रास्ता नहीं बचा।
पिता रविंद्र वाकोडे ने स्पष्ट शब्दों में मांग की है कि इस मामले में लीपापोती करने के बजाय तुरंत सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा,
"शिरीष केदारे और दुल्ला ने मेरे बेटे को प्रताड़ित किया है। मैं दोनों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग करता हूं। क्राइम ब्रांच मामले की जांच कर रही है और एफआईआर में सब कुछ दर्ज है। यह आत्महत्या नहीं, बल्कि संस्थागत लापरवाही और उत्पीड़न का नतीजा है और हमें न्याय चाहिए।" — रविंद्र वाकोडे, साहिल के पिता
मां का छलका दर्द: 'हमें क्या पता था मामला इतना बढ़ जाएगा'
साहिल की मां सोनाली वाकोडे का रो-रोकर बुरा हाल है। उन्होंने अपनी बात रखते हुए उस दर्दनाक अहसास को साझा किया जब उनके बेटे ने पहली बार कॉलेज में हो रहे भेदभाव की बात उनसे कही थी। मां ने कहा कि जब साहिल ने उन्हें बताया कि उसे परेशान किया जा रहा है और उसके साथ जातिगत टिप्पणियां की जा रही हैं, तो एक आम माता-पिता की तरह उन्होंने उसे समझाने की कोशिश की थी।
सोनाली वाकोडे ने नम आंखों से बताया, "हमारी सबसे बड़ी गलती यह हो गई कि जब मेरे बेटे ने हमें अपने साथ हो रहे भेदभाव के बारे में बताया, तो हमने उसे किसी तरह एडजस्ट करने की सलाह दी। हमने उससे कहा कि आईआईटी जैसी बड़ी संस्था में एडमिशन मिलना बहुत बड़ी बात होती है। यह थोड़े समय की बात है, यहां पढ़ने से तुम्हारा भविष्य सुधर जाएगा। लेकिन हमने सपने में भी नहीं सोचा था कि यह मामला इतना गंभीर रूप ले लेगा और हमारा बेटा हमेशा के लिए हमसे दूर चला जाएगा। जिन लोगों ने मेरे बेटे को इस हद तक मजबूर किया, उनके खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए ताकि किसी और का बेटा इसका शिकार न बने।"
क्राइम ब्रांच की जांच और परीक्षा हॉल की वह घटना
यह पूरी दुखद घटना पिछले महीने 18 सितंबर को घटी थी। बीटेक द्वितीय वर्ष का 22 वर्षीय छात्र साहिल परीक्षा के दौरान हुई एक कथित घटना के कुछ ही घंटों बाद अपने हॉस्टल के कमरे में मृत पाया गया था। संस्थान के सूत्रों के अनुसार, मिड-सेमेस्टर परीक्षा के दौरान साहिल पर मोबाइल फोन का उपयोग करने का आरोप लगा था। संस्थान का यह भी दावा था कि उसने एक प्रश्न का उत्तर पाने के लिए इंटरनेट या चैटजीपीटी का सहारा लेने की कोशिश की थी।
इस घटना के तुरंत बाद मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच को मामले की जांच सौंप दी गई थी। जांच के दायरे में परीक्षा हॉल का माहौल, प्रोफेसरों का रवैया, कैंपस की गतिविधियां और हॉस्टल के सीसीटीवी फुटेज शामिल हैं। पुलिस इस बात की गहराई से पड़ताल कर रही है कि परीक्षा में कथित कदाचार के आरोप के बाद साहिल पर किस प्रकार का मानसिक दबाव बनाया गया था, जिससे वह इतना टूट गया कि उसने अपनी जान दे दी।
संस्थान के भीतर बंटी फैकल्टी और छात्रों का बढ़ता आक्रोश
इस पूरे मामले ने आईआईटी बॉम्बे के भीतर भी वैचारिक और प्रशासनिक दूरियों को सतह पर ला दिया है। एक तरफ जहां छात्र संगठन और पीड़ित परिवार लगातार न्याय की गुहार लगा रहे हैं और आरोपी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ संस्थान का फैकल्टी फोरम भी खुलकर सामने आ गया है। हाल ही में फैकल्टी फोरम के अध्यक्ष ने प्रोफेसर दुल्ला के समर्थन में बयान देते हुए कहा था कि उन्होंने केवल संस्था के नियमों के मुताबिक ही अपनी कार्यवाही की थी।
फैकल्टी के इस रुख के बाद छात्रों और पीड़ित परिवार का गुस्सा और अधिक भड़क गया है। उनका आरोप है कि संस्थान अपने लोगों को बचाने के लिए लीपापोती करने में जुट गया है। देश के इन शीर्ष तकनीकी संस्थानों में पढ़ने वाले होनहार युवाओं का इस तरह से मानसिक शोषण का शिकार होना और अपनी जान गंवाना एक बहुत बड़ा राष्ट्रीय मुद्दा बन चुका है। अब देखना यह होगा कि मुंबई क्राइम ब्रांच की जांच में कौन से नए तथ्य सामने आते हैं और क्या साहिल के परिवार को न्याय मिल पाता है।






