दिल्ली में हुई INDIA ब्लॉक की अहम बैठक में बनी रणनीति
देश की राजधानी दिल्ली स्थित कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में बुधवार को विपक्षी दलों के INDIA गठबंधन की एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। इस महत्वपूर्ण बैठक में करीब 20 दलों के नेता प्रत्यक्ष और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल हुए। बैठक की मुख्य अध्यक्षता कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने की, जिसमें विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने देश की मौजूदा राजनीतिक स्थिति और लोकतांत्रिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली पर गंभीर चिंता व्यक्त की।
साढ़े तीन घंटे से अधिक चली इस मैराथन बैठक में सभी दलों ने एक सुर में स्वीकार किया कि वर्तमान चुनावी प्रक्रिया और संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा को बचाने के लिए अब सड़क से लेकर संसद तक कड़ा संघर्ष करने की जरूरत है। बैठक के दौरान तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी, कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने अपने बहुमूल्य सुझाव साझा किए। इसके बाद विपक्ष ने सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ एक व्यापक आंदोलन की रूपरेखा तैयार की।
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मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ संसद में प्रस्ताव और गंभीर आरोप
विपक्षी गठबंधन ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाते हुए उनके इस्तीफे की मांग की है। बैठक के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि चुनाव आयोग अपनी स्वायत्तता खो चुका है और वर्तमान में एक कठपुतली की भांति कार्य कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ दल और चुनाव आयोग मिलकर लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर कर रहे हैं।
विपक्ष ने यह भी तय किया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के लिए आगामी संसद सत्र में औपचारिक प्रस्ताव लाया जाएगा। इसके अलावा, विपक्षी नेताओं ने मांग की है कि मतदाता सूची (Voter List) से हटाए जाने वाले सभी नामों को सार्वजनिक किया जाए तथा किसी भी नाम को हटाने से पहले संबंधित नागरिक को विधिवत नोटिस देकर अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया जाना चाहिए।
"बीजेपी, पीएम मोदी, अमित शाह और मुख्य चुनाव आयुक्त लोकतंत्र पर कब्जा कर चुके हैं। हम इसे चुपचाप बर्दाश्त नहीं करेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाने वालों को जवाबदेह ठहराया जाए।" — राहुल गांधी, कांग्रेस सांसद
2 से 8 अक्टूबर तक देशव्यापी 'लोकतंत्र बचाओ मार्च' का ऐलान
सरकार और चुनाव आयोग की नीतियों के खिलाफ जन-जागरूकता फैलाने के लिए INDIA ब्लॉक ने राष्ट्रव्यापी आंदोलन का शंखनाद कर दिया है। घोषित कार्यक्रम के अनुसार, आगामी 2 अक्टूबर से 8 अक्टूबर तक देश के प्रत्येक जिले में 'लोकतंत्र बचाओ मार्च' निकाला जाएगा। इस दौरान जिला मुख्यालयों और जिला मजिस्ट्रेट (DM) कार्यालयों के बाहर बड़े स्तर पर प्रदर्शन किए जाएंगे।
इन प्रदर्शनों के माध्यम से आम नागरिकों, युवाओं, गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) और नागरिक समाज के लोगों को जोड़ा जाएगा ताकि चुनावी पारदर्शिता और संविधान की रक्षा के मुद्दे पर व्यापक जनसमर्थन जुटाया जा सके। विपक्षी नेताओं का मानना है कि आम जनता को यह बताना बेहद जरूरी है कि किस प्रकार संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता पर प्रभाव डाला जा रहा है।
6 अक्टूबर को होगा चुनाव आयोग का घेराव और सांसदों का मार्च
आंदोलन के अगले चरण में, छह अक्टूबर को देश भर के विपक्षी सांसद दिल्ली में एकत्र होकर चुनाव आयोग के मुख्य कार्यालय की तरफ मार्च करेंगे। शुरुआत में इस मार्च को उसी दिन आयोजित करने पर विचार चल रहा था, लेकिन सभी राज्यों के सांसदों और वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए छह अक्टूबर की तारीख मुकर्रर की गई।
लोकसभा और राज्यसभा के तमाम विपक्षी सांसद इस मार्च का हिस्सा बनेंगे और चुनाव आयोग को एक ज्ञापन सौंपेंगे। विपक्ष की मुख्य मांगों में यह भी शामिल है कि भविष्य के सभी चुनावों में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) के बजाय पारंपरिक बैलेट पेपर का इस्तेमाल किया जाए, ताकि मतदान प्रक्रिया पर जनता का अटूट भरोसा बना रहे।
अक्टूबर के दूसरे सप्ताह में राष्ट्रपति से मिलेंगे विपक्षी नेता
संसदीय लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए विपक्षी दल राष्ट्रपति से मुलाकात करने की तैयारी भी कर रहे हैं। अक्टूबर के दूसरे सप्ताह में INDIA ब्लॉक के वरिष्ठ नेता देश के राष्ट्रपति से मिलने के लिए औपचारिक समय मांगेंगे। इस मुलाकात के दौरान राष्ट्रपति को देश की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों, चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और संवैधानिक संस्थाओं के कामकाज से जुड़ी एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपी जाएगी।
राष्ट्रपति के समक्ष अपनी बात रखने के बाद, विपक्ष अक्टूबर और नवंबर के महीनों में देश के अलग-अलग हिस्सों में पांच बड़ी जनसभाएं और रैलियां आयोजित करेगा। इस सिलसिले की शुरुआत 1 नवंबर को दिल्ली में एक विशाल राष्ट्रीय रैली के साथ की जाएगी। विपक्षी नेताओं का दावा है कि यह आंदोलन देश में एक बड़ा राजनीतिक परिवर्तन लाने का आधार बनेगा।






