नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — रूस और यूक्रेन के बीच चल रही जंग को रोकने के लिए अब भारत ने सीधी पहल शुरू कर दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय कूटनीति की तरफ से रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की को एक खास तीन सूत्रीय शांति प्रस्ताव भेजा गया है। इस नए प्लान में दोनों देशों को बातचीत की मेज पर लाने और खून-खराबा तुरंत रोकने के कई ठोस रास्ते सुझाए गए हैं। भारत के इस कदम से पूरी दुनिया में यह उम्मीद जग गई है कि शायद अब इस लंबी और भयानक लड़ाई का कोई स्थायी समाधान निकल सके। दुनिया भर के बड़े देश अब भारत की इस मध्यस्थता की खुलकर तारीफ कर रहे हैं।
लेकिन दूसरी तरफ, युद्ध के मैदान से लगातार खतरनाक और डराने वाली खबरें सामने आ रही हैं। यूक्रेन की सेना लगातार रूस के ठिकानों पर ड्रोन से हमले कर रही है। हाल ही में यूक्रेन ने रूस के तट के पास जा रहे एक बड़े तेल टैंकर को अपना निशाना बनाया। इस खतरनाक ड्रोन हमले की वजह से टैंकर में भयंकर आग लग गई और आसमान काले धुएं से पूरी तरह भर गया। इस हमले ने एक बार फिर से यह साबित कर दिया है कि यह युद्ध अब सिर्फ जमीन तक सीमित नहीं है, बल्कि समुद्र के रास्ते होने वाले व्यापार और जहाजों के लिए भी बहुत बड़ा खतरा बन चुका है।
ब्लैक सी में फँसे भारतीय नाविक
युद्ध के इस खतरनाक दौर में ब्लैक सी यानी काला सागर एक बार फिर से सबसे बड़ा जंग का मैदान बन गया है। पिछले अड़तालीस घंटों के भीतर जहाजों पर ताबड़तोड़ हमलों की घटनाएं सामने आई हैं। ताजा मामला एक ऐसे तेल टैंकर का है जिस पर यूक्रेन के ड्रोन ने हमला कर दिया। सबसे बड़ी राहत की बात यह रही कि इस जहाज पर भारतीय नाविक भी सवार थे। हमले के बाद जहाज पर भारी अफरा-तफरी मच गई थी और आग बुझाने के लिए तुरंत बचाव अभियान चलाना पड़ा।
हमले का शिकार हुए इस तेल टैंकर पर कुल तेईस भारतीय नाविक सवार थे। भारतीय विदेश मंत्रालय और स्थानीय एजेंसियों की मुस्तैदी के चलते सभी तेईस भारतीय नाविकों को समय रहते सुरक्षित बचा लिया गया। रूस के तट के पास हुए इस हमले के बाद भारत सरकार ने भी अपनी चिंता जताई है। समुद्री रास्तों से व्यापार करने वाले जहाजों पर लगातार हो रहे इन हमलों से दुनिया भर के देशों की नींद उड़ी हुई है। नाविकों की सुरक्षा को लेकर अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कड़े सवाल उठाए जा रहे हैं।
भारत के शांति प्रस्ताव से क्यों बढ़ी उम्मीदें
भारत हमेशा से यह कहता आया है कि युद्ध किसी भी समस्या का समाधान नहीं हो सकता है। भारत ने रूस और यूक्रेन दोनों देशों के साथ अपने पुराने और मजबूत रिश्तों का फायदा उठाते हुए यह नया तीन सूत्रीय पीस प्लान तैयार किया है। इस प्लान की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें दोनों पक्षों की चिंताओं का पूरा ख्याल रखा गया है। भारत लगातार दोनों देशों के शीर्ष नेताओं के संपर्क में है ताकि जल्द से जल्द गोलीबारी बंद हो सके और मानवीय सहायता का रास्ता साफ हो सके।
आम जनता और दुनिया भर के शांतिप्रिय लोग अब भारत की इस कूटनीति की सफलता की दुआ कर रहे हैं। जिस तरह से भारत ने दुनिया के दोनों धड़ों के बीच संतुलन बनाते हुए शांति की बात रखी है, वह वाकई काबिल-ए-तारीफ है। हालांकि जमीन पर हालात अभी भी बहुत ज्यादा तनावपूर्ण बने हुए हैं। जब तक दोनों देश पूरी तरह से युद्ध रोकने के लिए राजी नहीं होते, तब तक ब्लैक सी जैसे समुद्री इलाकों में सफर कर रहे नाविकों की जान पर खतरा मंडराता ही रहेगा।
समुद्री सुरक्षा और आगे की चुनौतियां
इस पूरी घटना ने एक बार फिर से यह दिखा दिया है कि युद्ध की आग सिर्फ जमीन तक सीमित नहीं है बल्कि ग्लोबल सप्लाई चेन को भी तबाह कर रही है। तेल टैंकरों और मालवाहक जहाजों पर लगातार हो रहे हमलों की वजह से वैश्विक बाजार में भी डर का माहौल बन गया है। भारत के सामने अब अपने नागरिकों और नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ इस शांति प्रस्ताव को आगे बढ़ाने की दोहरी जिम्मेदारी है। द फ्रीलान्स की टीम इस पूरे मामले पर अपनी पैनी नजर बनाए रखेगी और हर नए अपडेट से आपको लगातार अवगत कराती रहेगी।







