सोशल मीडिया पर एक अनजान फ्रेंड रिक्वेस्ट, फिर धीरे-धीरे दोस्ती और इसके बाद देश की सुरक्षा से जुड़ी संवेदनशील जानकारियां जुटाने का खतरनाक खेल। आंध्र प्रदेश पुलिस के काउंटर इंटेलिजेंस विंग ने एक ऐसे ही पाकिस्तानी जासूसी नेटवर्क का खुलासा किया है जिसने सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े कर दिए हैं। इस पूरे खेल के केंद्र में 'अन्वी मेहता' और 'जोसिता पाल' नाम की दो युवतियां थीं, जिनके जरिए भारतीय रक्षा कर्मियों को निशाना बनाया जा रहा था।
फर्जी प्रोफाइल और हनीट्रैप का जाल
पुलिस जांच में सामने आया है कि 'जोसिता पाल' और 'अन्वी मेहता' असल में कोई आम युवतियां नहीं बल्कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी से जुड़े डिजिटल किरदार या फर्जी प्रोफाइल थीं। 'जोसिता पाल' ने खुद को मुंबई की एक शिपबिल्डिंग कंपनी की कर्मचारी बताकर फेसबुक और व्हाट्सएप के जरिए नौसेना कर्मियों से संपर्क साधा। उसने पनडुब्बियों की आवाजाही, जहाजों की संख्या और कमांडिंग अफसरों की तस्वीरें मांगनी शुरू कीं। इसके एवज में पैसों का लालच भी दिया गया।
दूसरी ओर, 'अन्वी मेहता' ने खुद को दिल्ली की एक मनोवैज्ञानिक बताया। वह वीडियो और वॉयस कॉल के जरिए नौसैनिकों को हनीट्रैप में फंसाती थी और वीडियो कॉल के दौरान ही रक्षा प्रतिष्ठानों व जहाजों के अंदरूनी हिस्सों को कैमरे पर दिखाने के लिए उकसाती थी। फेसबुक और इंस्टाग्राम से शुरू हुई यह दोस्ती व्हाट्सएप चैट और वीडियो कॉल तक पहुंचती थी, जहां अश्लील तस्वीरें, भावनात्मक जुड़ाव और क्रिप्टोकरेंसी के जरिए पैसों का लेनदेन होता था।
WhatsApp OTP और 'ऑपरेशन फायरवॉल-2026'
इस पूरे मामले की गंभीरता इस बात से समझी जा सकती है कि जासूसी नेटवर्क केवल हनीट्रैप तक सीमित नहीं था। ऑपरेटिव्स भारतीय मोबाइल नंबरों और उनके WhatsApp OTP का इस्तेमाल कर रहे थे। भारतीय नामों से हासिल सिम कार्ड्स के जरिए पाकिस्तान में व्हाट्सएप अकाउंट एक्टिवेट किए गए थे, जिनका इस्तेमाल आगे की जासूसी के लिए होता था।
आंध्र प्रदेश पुलिस ने इस अभियान को 'ऑपरेशन फायरवॉल-2026' नाम दिया है। मामले में अब तक 18 संदिग्धों की पहचान की गई है, जिनमें 13 नौसेना कर्मी हैं। पुलिस ने विशाखापत्तनम नेवल बेस के एक कर्मचारी प्रदीप मुखर्जी और कॉन्ट्रैक्ट ड्राइवर अन्नम साई वरप्रसाद को गिरफ्तार किया है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल इस वीडियो और मामलों के दावों की सत्यता की 'The Freelance' स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है। यह मामला सुरक्षा एजेंसियों की जांच और व्यापक चर्चा का विषय बना हुआ है। साभार: संबंधित रिपोर्ट्स / पुलिस इनपुट्स।






