भारतीय रेलवे का बड़ा कदम: अब गंदगी फैलाने पर ढील नहीं
भारतीय रेलवे ने देश भर के रेलवे स्टेशनों और चलती ट्रेनों में साफ-सफाई बनाए रखने के लिए एक बेहद कड़ा और अहम फैसला लिया है। अक्सर देखा जाता था कि तमाम कोशिशों और विज्ञापनों के बावजूद लोग सफर के दौरान या प्लेटफॉर्म पर इधर-उधर कचरा फेंक देते थे और तंबाकू या पान खाकर दीवारों व फर्श पर थूक देते थे। इससे न केवल रेलवे परिसरों की खूबसूरती खराब होती थी, बल्कि यात्रियों को भी भारी असुविधा का सामना करना पड़ता था। इस आदत पर लगाम लगाने के लिए रेलवे प्रशासन ने अब जुर्माने की राशि को सीधे दोगुना करने का निर्णय लिया है।
यात्रियों की इन लापरवाहियों से निपटने के लिए रेलवे बोर्ड ने नियमों में बड़ा संशोधन किया है। अब यदि कोई भी यात्री ट्रेन की बोगी, एसी कोच, जनरल कोच या फिर रेलवे स्टेशन के किसी भी हिस्से में गंदगी फैलाते हुए पकड़ा जाता है, तो उसे भारी आर्थिक दंड भुगतना पड़ेगा। पहले यह जुर्माना बहुत मामूली होता था, जिसके कारण लोग नियमों की अनदेखी कर देते थे, लेकिन अब रेलवे ने साफ कर दिया है कि स्वच्छता के मामले में किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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पुराना जुर्माना हुआ इतिहास, अब जेब ढीली करेगी लापरवाही
वर्ष 2012 के पुराने नियमों के मुताबिक, रेलवे परिसर या ट्रेनों में गंदगी फैलाने पर अधिकतम 500 रुपये तक का जुर्माना वसूला जाता था। चूंकि राशि कम थी, इसलिए लोग पकड़े जाने पर भी आसानी से जुर्माना देकर निकल जाते थे या कई बार चेतावनी देकर छोड़ दिए जाते थे। इस लचर व्यवस्था के कारण स्टेशनों और ट्रेनों की पटरियों के आसपास गंदगी का अंबार लगा रहता था।
अब 'जन विश्वास अधिनियम' के प्रावधानों के तहत नियमों में बदलाव किया गया है। नए नियमों के अनुसार, अब न्यूनतम या शुरुआती जुर्माना ही सीधे 1000 रुपये कर दिया गया है। यानी यदि आप ट्रेन के अंदर या स्टेशन परिसर में कचरा फेंकते हैं या थूकते हैं, तो आपको कम से कम एक हजार रुपये चुकाने ही होंगे। रेलवे अधिकारियों का मानना है कि जब तक जेब पर सीधा असर नहीं पड़ेगा, तब तक लोगों की आदत में सुधार लाना मुश्किल होगा।
जुर्माना न देने पर होगी कोर्ट की कार्रवाई और बढ़ सकता है दंड
इस नए नियम का सबसे कड़ा पहलू यह है कि यदि कोई पकड़ा गया व्यक्ति मौके पर 1000 रुपये का जुर्माना भरने से मना करता है या टालमटोल करता है, तो उसे बचाने वाला कोई नहीं होगा। ऐसे मामलों में रेलवे सुरक्षा बल (RPF) या अधिकृत टिकट चेकिंग स्टाफ द्वारा सीधे कानूनी प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
मामले को तुरंत संबंधित अदालत में भेजा जाएगा, जहां मजिस्ट्रेट के समक्ष सुनवाई होगी। कोर्ट के माध्यम से यह जुर्माना बढ़कर 2000 रुपये तक पहुंच सकता है। इसके अलावा, अदालत के चक्कर काटने और कानूनी प्रक्रियाओं में फंसने का झंझट अलग से झेलना पड़ेगा। इसलिए समझदारी इसी में है कि सफर के दौरान कचरा हमेशा डस्टबिन में ही डाला जाए और सार्वजनिक संपत्ति की स्वच्छता का पूरा ख्याल रखा जाए।
"रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों को स्वच्छ रखना हम सबकी साझा जिम्मेदारी है। नियमों को कड़ा करने का उद्देश्य यात्रियों को परेशान करना नहीं, बल्कि उन्हें स्वच्छता के प्रति जागरूक करना है। यदि लोग खुद जागरूक नहीं होंगे, तो कानून को सख्ती से पालन कराना हमारी मजबूरी है।" — रेलवे बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारी
देशभर के सभी जोनल रेलवे और स्टेशनों पर नियम लागू
यह नया और सख्त नियम किसी एक जोन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे देश के सभी जोनल रेलवे के महाप्रबंधकों को भेजकर सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। उत्तर मध्य रेलवे (NCR) सहित प्रयागराज जंक्शन, कानपुर सेंट्रल, सूबेदारगंज, छिवकी, अलीगढ़, मथुरा, आगरा, झांसी और देश के तमाम बड़े-छोटे स्टेशनों पर यह व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है।
रेलवे स्टेशनों पर तैनात सफाई कर्मियों और टिकट निरीक्षकों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे परिसर में गंदगी फैलाने वालों पर पैनी नजर रखें। इसके अलावा सीसीटीवी कैमरों की मदद से भी गंदगी फैलाने वालों की पहचान करके उन पर कार्रवाई की जा रही है। रेलवे स्टेशनों पर जगह-जगह लाउडस्पीकर के माध्यम से भी यात्रियों को इस नए जुर्माने के बारे में लगातार सूचित किया जा रहा है ताकि कोई अनभिज्ञता न जता सके।
क्या कहती है रेलवे बोर्ड की अधिसूचना और आगे की तैयारी?
रेलवे बोर्ड के कार्यपालक निदेशक (यात्री विपणन) शिवेंद्र शुक्ला द्वारा इस संबंध में विस्तृत अधिसूचना जारी की जा चुकी है, जिसे भारत के राजपत्र (Gazette of India) में भी प्रकाशित किया गया है। इसके बाद जोनल रेलवे को मिले दिशा-निर्देशों के तहत अब मैदान स्तर पर चेकिंग अभियान तेज कर दिए गए हैं।
विशेषज्ञों और आम नागरिकों का भी मानना है कि रेलवे के इस कदम से ट्रेनों और स्टेशनों पर साफ-सुथरा माहौल देखने को मिलेगा। वंदे भारत जैसी प्रीमियम ट्रेनों से लेकर सामान्य एक्सप्रेस और पैसेंजर ट्रेनों तक में अब स्वच्छता का स्तर सुधरने की पूरी उम्मीद है। यात्रियों से भी लगातार अपील की जा रही है कि वे अपनी यात्रा को सुगम और स्वच्छ बनाएं तथा देश की सार्वजनिक संपत्ति को गंदा करने से बचें।





