चलती ट्रेनों में आग और धुएं के खतरे को रोकने के लिए रेलवे का बड़ा कदम
भारतीय रेलवे ने देश भर में ट्रेन यात्रा को अधिक सुरक्षित बनाने के लिए एक सख्त और दूरगामी फैसला लिया है। अक्सर आपने सफर के दौरान देखा होगा कि अचानक ट्रेन के किसी डिब्बे से धुआं निकलने लगता है या तेज चिंगारियां दिखाई देती हैं। कई बार ब्रेक बाइंडिंग यानी पहिए जाम होने की वजह से यात्रियों के बीच अफरा-तफरी मच जाती है। इन खतरनाक घटनाओं पर स्थाई रोक लगाने के लिए रेलवे बोर्ड ने अब पूरी तरह कमर कस ली है और देशव्यापी नए तकनीकी निर्देश जारी किए गए हैं।
अनुसंधान अभिकल्प एवं मानक संगठन (RDSO) की तकनीकी रिपोर्ट के आधार पर तैयार किए गए इन नए नियमों को उत्तर प्रदेश के प्रयागराज स्थित उत्तर मध्य रेलवे (NCR) समेत देश के सभी रेलवे जोन्स में तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। रेलवे का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सफर के दौरान यात्रियों की जानमाल को किसी भी तरह का जोखिम न उठाना पड़े और ट्रेन संचालन पूरी तरह नियंत्रित रहे।
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क्यों होती थी ब्रेक बाइंडिंग और धुएं की समस्या?
रेलवे के तकनीकी जानकारों के अनुसार, इस समस्या की मुख्य जड़ जल्दबाजी में ट्रेन चलाना और ब्रेक प्रणाली पर अत्यधिक दबाव पड़ना है। पहले की व्यवस्था में अमूमन यह होता था कि जब कोई यात्री किसी आपात स्थिति में अलार्म चेन खींचता था (एसीपी), या फिर ट्रेन किसी स्टेशन पर रुकने के बाद जैसे ही सिग्नल मिलता था, लोको पायलट बहुत कम समय के भीतर ट्रेन को आगे बढ़ा देते थे। कई बार पाइपलाइन में हवा का दबाव पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाता था और ब्रेक पूरी तरह रिलीज हुए बिना ही ट्रेन खींच दी जाती थी।
इसके अलावा, यात्रा के दौरान रास्ते में यदि पहिए जाम होने के शुरुआती लक्षण दिखाई भी देते थे, तो भी चालक बीच रास्ते रुकने के बजाय गाड़ी को अगले स्टेशन तक खींचने की कोशिश करते थे। इस वजह से पहियों और ब्रेक ब्लॉक के बीच भीषण रगड़ पैदा होती थी। अत्यधिक गर्मी उत्पन्न होने के कारण चिंगारियां भड़क उठती थीं और देखते ही देखते डिब्बों में धुआं या आग लगने की नौबत आ जाती थी। अब इस पूरी कार्यप्रणाली में आमूल-चूल बदलाव किया जा रहा है।
लोको पायलटों के लिए जारी हुए सख्त दिशा-निर्देश और नया प्रोटोकॉल
रेलवे बोर्ड के नए आदेशों के बाद अब लोको पायलटों और रखरखाव कर्मियों की जिम्मेदारी काफी बढ़ गई है। चेन खींचने या किसी स्टेशन पर ठहराव के बाद अब चालकों को तुरंत ट्रेन रवाना करने की अनुमति नहीं होगी। उन्हें पर्याप्त समय तक इंतजार करना होगा ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि ट्रेन के हर एक डिब्बे का ब्रेक पूरी तरह से खुल चुका है और हवा का प्रेशर सामान्य हो गया है।
यदि सफर के दौरान इंजन के लोड मीटर में किसी भी प्रकार का उतार-चढ़ाव दिखाई देता है, इंजन पर सामान्य से ज्यादा जोर पड़ता है, या फिर अचानक ट्रेन की रफ्तार धीमी होने लगती है, तो चालक को तुरंत गाड़ी रोककर उसकी गहन जांच करनी होगी। इस त्वरित और अनिवार्य जांच से आग लगने या धुएं की घटनाओं को शुरुआती स्तर पर ही दबाया जा सकेगा।
"ट्रेनों में तकनीकी खामियों, ब्रेक बाइंडिंग और धुएं की घटनाओं को जड़ से समाप्त करने के लिए रेलवे बोर्ड ने कड़े निर्देश जारी किए हैं। पाइपलाइन में नमी रोकने के लिए इंजन का एयर ड्रायर लगातार चालू रखना होगा और इंजन बदलते समय वाल्व से पूरा प्रेशर खाली करना अनिवार्य कर दिया गया है। डिपो स्तर पर एलएचबी डिब्बों के ब्रेक प्रेशर की सख्त मानक जांच सुनिश्चित की जा रही है, ताकि यात्रियों का सफर पूरी तरह सुरक्षित और सुगम बन सके।" — वी. वेंकटसुब्रमण्यम, कार्यपालक निदेशक (विद्युत इंजीनियरिंग), रेलवे बोर्ड
अनधिकृत रूप से चेन खींचने वालों पर आरपीएफ की कड़ी कार्रवाई
एक तरफ जहां रेलवे तकनीकी रूप से ट्रेनों को सुरक्षित करने में जुटा है, वहीं दूसरी तरफ अराजक तत्वों द्वारा बेवजह चेन खींचने (चेन पुलिंग) की घटनाओं पर भी शिकंजा कसा जा रहा है। हाल ही में बिहार के खगड़िया जिले के मानसी रेलवे स्टेशन के पास ऐसा ही एक मामला सामने आया, जहां बिना किसी ठोस वजह के ट्रेन में चेन खींचने वाले दो लोगों के खिलाफ रेलवे सुरक्षा बल (RPF) ने सख्त कानूनी कार्रवाई की है।
आरपीएफ इंस्पेक्टर ज्ञानेश झा के अनुसार, गाड़ी संख्या 15654 डाउन में गैर-कानूनी तरीके से चेन पुलिंग करने के आरोप में टुनटुन यादव और गुड्डू कुमार के खिलाफ औपचारिक प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की हरकतें न केवल ट्रेन के समय को प्रभावित करती हैं, बल्कि पीछे आ रही अन्य गाड़ियों के लिए भी गंभीर खतरा पैदा करती हैं। रेलवे प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि बिना वैध कारण के चेन खींचने वालों के खिलाफ आगे भी धरपकड़ जारी रहेगी।
यात्रियों के लिए सार्वजनिक उपयोग और सुरक्षा का संदेश
भारतीय रेलवे का यह नया सुरक्षा कदम सीधे तौर पर आम नागरिकों और यात्रियों के जीवन से जुड़ा हुआ है। अक्सर लोग छोटी-छोटी बातों पर या बिना किसी आपातकाल के चेन खींच देते हैं, जिससे पूरी ट्रेन की ब्रेक प्रणाली पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। रेलवे अधिकारियों ने यात्रियों से अपील की है कि वे केवल वास्तविक आपात स्थिति में ही अलार्म चेन का उपयोग करें। आधुनिक तकनीकी बदलावों और कड़े प्रशासनिक निर्देशों के समन्वय से अब भारतीय रेल का सफर पहले से कहीं अधिक सुरक्षित, भरोसेमंद और समयबद्ध होने की उम्मीद है। सभी जोनल कार्यालयों को इन नए नियमों का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित कर रेलवे बोर्ड को अनुपालन रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए गए हैं।




