भारतीय शेयर बाजार में कोहराम: साल 2026 में क्यों आ रही है ऐतिहासिक गिरावट
भारतीय शेयर बाजार के लिए साल 2026 अब तक बेहद उठापटक और निराशाजनक दौर लेकर आया है। निवेशकों की गाढ़ी कमाई पर इस साल लगातार ग्रहण लगता दिख रहा है। देश के प्रमुख शेयर सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी अपने सर्वकालिक उच्च स्तर से काफी नीचे आ चुके हैं, जिससे देश भर के खुदरा निवेशकों की नींद उड़ गई है। शेयर बाजार के जानकारों का मानना है कि पिछले कुछ महीनों से बाजार में जिस तरह की बिकवाली हावी है, उसने निवेशकों के भरोसे को तगड़ा झटका दिया है।
बाजार के आंकड़ों पर नजर डालें तो निवेशकों की संपत्ति में भारी सेंध लगी है। दलाल स्ट्रीट पर छाई मायूसी इस बात से साफ जाहिर होती है कि दिग्गज कंपनियों के शेयर भी लगातार दबाव में कारोबार कर रहे हैं। अर्थव्यवस्था के जानकारों का कहना है कि वैश्विक मोर्चे पर चल रहे घटनाक्रमों और भू-राजनीतिक तनावों का सीधा असर भारतीय बाजार की चाल पर पड़ रहा है, जिससे निवेशकों के लिए रणनीति बनाना बेहद कठिन हो गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, जब तक वैश्विक स्तर पर आपूर्ति श्रृंखला और कच्चे तेल की कीमतों को लेकर स्थिति पूरी तरह साफ नहीं होती, तब तक बाजार में बड़ी और टिकाऊ तेजी की उम्मीद करना जल्दबाजी होगी। फिलहाल बाजार के हर एक कदम पर घरेलू और विदेशी निवेशकों की पैनी नजर बनी हुई है ताकि वे किसी भी बड़े नुकसान से खुद को बचा सकें।
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सेंसेक्स और निफ्टी का रिकॉर्ड पतन: कहां तक आ पहुंचे शेयर बाजार के आंकड़े
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स पिछले साल 1 दिसंबर को अपने अब तक के सबसे ऊंचे शिखर यानी 86,159 अंकों के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा था। लेकिन उसके बाद से बाजार में जो गिरावट का सिलसिला शुरू हुआ, उसने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए। अपने उस रिकॉर्ड हाई से सेंसेक्स अब तक 13,630 अंक यानी लगभग 16 फीसदी की बड़ी गिरावट दर्ज कर चुका है।
इसी तरह, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी-50 इंडेक्स भी 5 जनवरी को बने अपने सर्वकालिक उच्च स्तर 26,373 अंकों से 3,714 अंक यानी करीब 14 फीसदी नीचे फिसल चुका है। इन दोनों बड़े सूचकांकों में आई इस भारी गिरावट ने निवेशकों के पोर्टफोलियो को बुरी तरह प्रभावित किया है। बाजार के जानकारों का कहना है कि बिकवाली का यह दबाव केवल चुनिंदा शेयरों तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यापक बाजार इसकी चपेट में है।
शेयर बाजार की इस बड़ी मंदी का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि निफ्टी का वोलटिलिटी इंडेक्स यानी 'इंडिया विक्स' एक साल के भीतर 22 फीसदी तक उछल चुका है। इंडिया विक्स को बाजार में डर और अस्थिरता का पैमाना माना जाता है। जब यह इंडेक्स ऊपर चढ़ता है, तो इसका साफ मतलब होता है कि आने वाले दिनों में बाजार में और अधिक उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
पश्चिम एशिया का जंग और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें: बाजार टूटने की असली वजह
आखिर भारतीय शेयर बाजार में इस कदर गिरावट क्यों आ रही है? इसके पीछे सबसे बड़ी वजह पश्चिम एशिया में लंबे समय से जारी संघर्ष और तनाव को माना जा रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता के रास्ते में अचानक आई रुकावट ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में खलबली मचा दी है। इस अनिश्चितता के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए होने वाली तेल की आपूर्ति को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा हो गई हैं।
इस संकट का सीधा असर ब्रेंट क्रूड की कीमतों पर पड़ा है, जो उछलकर 108 डॉलर प्रति बैरल के ऊंचे स्तर को छू गई हैं। भारत अपनी कुल ऊर्जा जरूरतों का 80 फीसदी से अधिक हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है और वह दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक देश है। ऐसे में क्रूड ऑयल के दाम बढ़ने से देश का आयात बिल तेजी से बढ़ता है, जिसका असर राजकोषीय घाटे और घरेलू महंगाई दोनों पर पड़ता है।
"बाजार इस समय बेहद सतर्क रुख अपना रहा है। निवेशक कच्चे तेल की कीमतों, बॉन्ड यील्ड और वैश्विक नीतिगत फैसलों के संभावित प्रभावों पर बारीक नजर रखे हुए हैं। जब तक व्यापक आर्थिक मोर्चे पर तस्वीर साफ नहीं होती, तब तक निवेशक मजबूत और स्थिर आय वाली कंपनियों में ही पैसा लगाने में समझदारी समझ रहे हैं।" — विनोद नायर, रिसर्च हेड, जियोजित इन्वेस्टमेंट्स
महामारी के बाद की सबसे लंबी मंदी: क्या कहते हैं तकनीकी विशेषज्ञ
शेयर बाजार के इतिहास में यह दौर एक अलग ही रिकॉर्ड बना रहा है। पिछले सप्ताह सेंसेक्स और निफ्टी ने लगातार सातवें हफ्ते लाल निशान में कारोबार बंद किया। साल 2020 में कोरोना महामारी के दौर के बाद यह शेयर बाजार में लगातार गिरावट का सबसे लंबा दौर माना जा रहा है। पिछले हफ्ते के आखिरी कारोबारी सत्र में सेंसेक्स मामूली गिरावट के साथ 72,480 के स्तर पर और निफ्टी 22,620 के आसपास बंद हुआ था।
तकनीकी विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा समय में बाजार का ढांचा कमजोर नजर आ रहा है। एसबीआई सिक्योरिटीज के डेरिवेटिव एक्सपर्ट सुदीप शाह के अनुसार, निफ्टी के लिए 22,550 से 22,500 का स्तर एक अहम सपोर्ट का काम कर सकता है। अगर बाजार इस स्तर को भी तोड़कर नीचे फिसलता है, तो बिकवाली का नया दौर आ सकता है और यह 22,350 के स्तर तक भी जा सकता है। वहीं ऊपर की तरफ 22,790-22,810 के दायरे में तगड़ी रुकावट बनी हुई है।
आम निवेशकों के लिए क्या है सलाह: कैसे बचाएं अपनी जमा पूंजी
बाजार के इस मौजूदा उथल-पुथल भरे माहौल में वित्तीय विशेषज्ञों ने छोटे और खुदरा निवेशकों को बेहद सूझबूझ के साथ कदम उठाने की सलाह दी है। पीएल कैपिटल के मुख्य व्यवसाय अधिकारी विक्रम कसाट का कहना है कि निवेशकों को इस समय शॉर्ट-टर्म की अस्थिरता और उतार-चढ़ाव से घबराने की जरूरत नहीं है। इसके बजाय उन्हें कंपनियों की आय की स्पष्टता, घरेलू तरलता और मजबूत फंडामेंटल वाले सेक्टरों पर अपना पूरा ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
विशेषज्ञों की यह साफ सलाह है कि इस चुनौतीपूर्ण समय में केवल वही निवेशक सुरक्षित रह सकते हैं जो लंबी अवधि के नजरिए से निवेश करते हैं और मजबूत बैलेंस शीट वाली कंपनियों पर भरोसा बनाए रखते हैं। साथ ही, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली के आंकड़ों और वैश्विक आर्थिक संकेतों पर भी निवेशकों को लगातार नजर रखनी चाहिए ताकि किसी भी बड़े जोखिम से वक्त रहते बचा जा सके।








