लगातार आठ हफ्तों के तूफानी दौर के बाद शेयर बाजार को मिली राहत
भारतीय शेयर बाजार के इतिहास में पिछले कुछ हफ्ते निवेशकों के लिए बेहद तनावपूर्ण रहे हैं। पिछले करीब आठ हफ्तों से दलाल स्ट्रीट पर लगातार मंदी का काला साया मंडरा रहा था, जिससे निवेशकों की गाढ़ी कमाई का बड़ा हिस्सा डूब गया। बीते शुक्रवार को आखिरी कारोबारी सत्र के दौरान भी दोनों प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी बुरी तरह धराशायी हो गए थे, जिससे बाजार का पूरा मूड बिगड़ गया था। हालांकि, सप्ताह के पहले कारोबारी दिन यानी सोमवार को तस्वीर पूरी तरह बदल गई और घरेलू बाजार में खरीदारी का नया दौर देखने को मिला।
विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले 25 सालों में यह एक दुर्लभ अवसर था जब भारतीय शेयर बाजार लगातार आठ हफ्तों तक बिना किसी बड़े सुधार के लगातार नीचे गिरता चला गया। इस लंबी मंदी की अवधि में एनएसई निफ्टी में लगभग 9 प्रतिशत तक की भारी गिरावट दर्ज की जा चुकी थी। विदेशी संस्थागत निवेशकों द्वारा लगातार की जा रही भारी बिकवाली और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव ने बाजार के मनोबल को बुरी तरह तोड़ दिया था। पिछले शुक्रवार को बीएसई सेंसेक्स 570 अंक से अधिक लुढ़ककर 71,909 के स्तर पर बंद हुआ था, जबकि निफ्टी भी करीब 200 अंक टूटकर 22,421 के आसपास सिमट गया था।
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वैश्विक बाजारों से मिले पॉजिटिव संकेतों ने बदला बाजार का रुख
सोमवार को बाजार में आई इस अचानक तेजी के पीछे मुख्य रूप से वैश्विक बाजारों का मजबूत समर्थन रहा। अमेरिकी शेयर बाजारों में पिछले हफ्ते के आखिरी दिनों में अच्छी खासी बढ़त दर्ज की गई थी, जिसका सीधा असर एशियाई बाजारों पर भी दिखाई दिया। जापान का निक्केई इंडेक्स, दक्षिण कोरिया का कोस्पी और यूरोपीय बाजार के प्रमुख सूचकांक हरे निशान में कारोबार करते हुए नजर आए। इन सभी अंतरराष्ट्रीय कारकों ने भारतीय निवेशकों में फिर से थोड़ा विश्वास जगाने का काम किया है।
इसके अलावा, भारतीय बाजार की चाल का प्रमुख पैमाना माने जाने वाले 'गिफ्ट निफ्टी' ने भी कारोबार की शुरुआत में ही मजबूत बढ़त के संकेत दे दिए थे। गिफ्ट निफ्टी में जोरदार उछाल ने यह साफ कर दिया था कि इस बार घरेलू बाजार मंदी के इस चक्र को तोड़ने के लिए तैयार है। विदेशी बाजारों से आ रही इन सकारात्मक हवाओं ने घरेलू निवेशकों को खरीदारी का एक बेहतरीन मौका उपलब्ध कराया, जिसका असर आज के क्लोजिंग आंकड़ों पर साफ तौर पर दिखाई दिया।
कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी से निवेशकों की लौटी हिम्मत
शेयर बाजार की चाल को प्रभावित करने वाले सबसे बड़े कारकों में से एक 'क्रूड ऑयल' यानी कच्चे तेल की कीमतें हैं। पिछले कुछ हफ्तों से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम आसमान छू रहे थे, जिससे देश की अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार पर अतिरिक्त दबाव बन रहा था। लेकिन हाल ही में ब्रेंट क्रूड की कीमतों में थोड़ी नरमी देखने को मिली है और यह घटकर 101 से 102 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गई है। हालांकि कीमत अभी भी सौ डॉलर के पार है, फिर भी इसमें आई हल्की गिरावट ने बाजार को थोड़ी सांस लेने की जगह दी है।
कमोडिटी और वित्तीय जानकारों का मानना है कि तेल की कीमतों में इस स्थिरता का सीधा फायदा भारत जैसी अर्थव्यवस्थाओं को मिलता है, क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बहुत बड़ा हिस्सा आयात करता है। डॉलर की फंडिंग आसान होने और बॉन्ड यील्ड में राहत मिलने के कारण भी घरेलू और विदेशी निवेशकों ने जोखिम भरे शेयरों में फिर से पैसा लगाना शुरू किया है। इस सुधार के चलते निफ्टी के मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी सकारात्मक कारोबार देखा गया है।
दिग्गज शेयरों में खरीदारी से सेंसेक्स और निफ्टी में जोरदार उछाल
सोमवार को बाजार बंद होने पर जो आंकड़े सामने आए, उन्होंने मायूस निवेशकों के चेहरे पर थोड़ी मुस्कान ला दी है। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 472.77 अंकों की जोरदार छलांग लगाते हुए 72,382.47 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं दूसरी ओर, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 50 भी 133.80 अंकों की मजबूती के साथ 22,555.75 के स्तर पर बंद होने में कामयाब रहा। बाजार में सबसे ज्यादा खरीदारी एफएमसीजी, सरकारी बैंकों और मीडिया सेक्टर के शेयरों में देखने को मिली।
एफएमसीजी सेक्टर की दिग्गज कंपनी आईटीसी लिमिटेड के शेयरों में पांच प्रतिशत से अधिक की शानदार तेजी दर्ज की गई, जो आज के सत्र में सबसे बड़े गेनर्स में शामिल रही। इसके अलावा बजाज फाइनेंस, श्रीराम फाइनेंस और एनटीपीसी जैसे बड़े शेयरों में भी निवेशकों ने जमकर खरीदारी की। हालांकि, इस बीच इंडिया विक्स यानी वोलैटिलिटी इंडेक्स में थोड़ी बढ़त दर्ज की गई है, जो यह इशारा करती है कि बाजार में अभी भी पूरी तरह से जोखिम टला नहीं है और निवेशकों को फूंक-फूंक कर कदम रखने की जरूरत है।
विशेषज्ञों की राय और आगे की राह: क्या यह तेजी टिक पाएगी?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले कुछ हफ्तों में बाजार 'ओवरसोल्ड' यानी अत्यधिक बिकवाली के जोन में चला गया था, जिसके बाद यह तकनीकी रिकवरी स्वाभाविक थी। हालांकि, अभी भी बाजार पूरी तरह से सुरक्षित नहीं कहा जा सकता है और निवेशकों को आने वाले दिनों में कुछ उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ सकता है। जानकारों के मुताबिक, जब तक वैश्विक स्तर पर आर्थिक अनिश्चितताएं पूरी तरह खत्म नहीं होतीं, तब तक बहुत बड़ी तेजी की उम्मीद करना जल्दबाजी होगी।
"सोमवार को निफ्टी और बैंक निफ्टी में जरूर सुधार देखा गया है, लेकिन तकनीकी संकेतों के मुताबिक बाजार में कमजोरी और उतार-चढ़ाव का दौर अभी बना हुआ है। निफ्टी के लिए 22,400 का दायरा बेहद अहम सपोर्ट है, जबकि ऊपर की तरफ 22,700 की बाधा पार करने पर ही बड़ी तेजी संभव है।" — सुदीप शाह, वाइस प्रेसिडेंट (टेक्निकल एंड डेरिवेटिव रिसर्च, एसबीआई सिक्योरिटीज)
इसके साथ ही, बाजार की निगाहें अब भारतीय रिजर्व बैंक यानी आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठकों और आने वाले नीतिगत फैसलों पर टिकी हुई हैं। विश्लेषकों का यह भी कहना है कि कंपनियों के तिमाही वित्तीय नतीजे और वैश्विक आर्थिक नीतियां ही यह तय करेंगी कि शेयर बाजार की यह राहत भरी सांस आगे भी जारी रहेगी या मंदी का दौर फिर से लौट सकता है। निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी बड़े निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों की राय अवश्य लें।






