हाल ही में उत्तरी अरब सागर से एक बड़ी खबर सामने आई थी, जहां भारतीय नौसेना के युद्धपोत और पाकिस्तान नौसेना के जहाज 'पीएनएस हुनैन' के बीच आमना-सामना हुआ था। इस रोमांचक और संवेदनशील घटना का एक सिम्युलेटर आधारित रीक्रिएशन अब सामने आया है, जो यह दिखाता है कि समंदर के बीच में कैसे पलक झपकते ही फैसले लेने पड़ते हैं। हालांकि यह असली फुटेज नहीं है, लेकिन इसके जरिए नौसेना के ब्रिज के अंदर का माहौल और अधिकारियों की कार्यशैली को बेहद बारीकी से समझाया गया है।
उत्तरी अरब सागर में क्या हुआ था उस दिन?
भारतीय सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, जब भारतीय युद्धपोत अपने नियमित निगरानी मिशन पर था, तब पाकिस्तानी जहाज अचानक तेज गति से उसके करीब आ गया था। इस सिमुलेशन वीडियो में युद्धपोत के ब्रिज के माहौल को बिल्कुल वैसा ही तैयार किया गया है, जहां कैप्टन और उनकी पूरी टीम दुश्मन या दूसरे जहाज की हर हरकत पर पैनी नजर रखती है। समंदर की लहरों के बीच जब कोई खतरनाक स्थिति बनती है, तो किस तरह से तुरंत प्रतिक्रिया देनी होती है, यह इस रीक्रिएशन में साफ-साफ दिखाई देता है।
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अधिकारियों को दी जाती है बेहद कठिन ट्रेनिंग
जेन Technologies के निदेशक और रिटायर्ड कैप्टन संजय कुमार बताते हैं कि नौसेना के जवानों को हर तरह की जटिल परिस्थितियों का सामना करने के लिए बार-बार अभ्यास कराया जाता है। इस तरह के सिमुलेशन का मुख्य मकसद अधिकारी को असल हालात के बिल्कुल करीब लाकर खड़ा करना होता है, ताकि वे भारी दबाव के बावजूद सही और सटीक निर्णय ले सकें। समंदर में किसी के पास भी घबराने या उलझन में पड़ने का समय नहीं होता, इसलिए अभ्यास ऐसा होना चाहिए कि सही कदम अपने आप उठ जाएं।
धैर्य और मानसिक मजबूती क्यों है सबसे जरूरी?
जेन टेक्नोलॉजीज से जुड़े पूर्व पनडुब्बी अधिकारी रिटायर्ड कमांडर अंकित रावल ने इस ट्रेनिंग के एक बेहद अहम पहलू पर रोशनी डाली है। उनका कहना है कि जब कोई आपको उकसाता है या चुनौती देता है, तब भी आपका दिमाग पूरी तरह शांत और संयमित रहना चाहिए।
"चुनौतीपूर्ण या उत्तेजक स्थितियों में भी धैर्य बनाए रखना बेहद जरूरी है। कोई आपको उकसाए तो भी शांत, संयमित और अपने मिशन पर पूरी तरह केंद्रित रहना होता है। जल्दबाजी में लिए गए फैसलों के समंदर में बहुत गंभीर परिणाम हो सकते हैं।" — रिटायर्ड कमांडर अंकित रावल, पूर्व पनडुब्बी अधिकारी
सिमुलेटर तकनीक से बिना जोखिम मिलती है ट्रेनिंग
यह खास सिम्युलेटर तकनीक 'एआरआई सिमुलेशन' की है, जो जेन टेक्नोलॉजीज की ही एक सहायक कंपनी है। यह तकनीक पिछले कई दशकों से रक्षा क्षेत्र के लिए आधुनिक सिमुलेटर और सामरिक प्रशिक्षण प्रणालियां तैयार करती आ रही है। इसके माध्यम से नौसेना कर्मियों को बिना किसी वास्तविक जोखिम के बार-बार खतरनाक और जटिल परिदृश्यों का अनुभव कराया जाता है, जिससे उनकी दक्षता कई गुना बढ़ जाती है।
सालों की तैयारी आती है कुछ सेकंड के काम
यह रीक्रिएशन इस बात का सबसे बड़ा सबूत है कि समंदर में आने वाली किसी भी अचानक और मुश्किल चुनौती के पीछे नौसेना की सालों की कड़ी मेहनत और ट्रेनिंग छिपी होती है। चाहे ब्रिज का नेविगेशन हो या फिर अचानक दिशा बदलने वाले जहाज से निपटना, भारतीय नौसेना का हर एक जवान हर परिस्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार रहता है। आधुनिक दौर में ऐसे सिमुलेशन नौसेना की ताकत को और अधिक धार दे रहे हैं।





