होम/देश/जम्मू-कश्मीर विधानसभा में गूंजा ग्रेटर ऑटोनॉमी का मुद्दा: स्पीकर के इस्तीफे को लेकर भिड़े सत्तापक्ष और बीजेपी
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जम्मू-कश्मीर विधानसभा में गूंजा ग्रेटर ऑटोनॉमी का मुद्दा: स्पीकर के इस्तीफे को लेकर भिड़े सत्तापक्ष और बीजेपी

जम्मू-कश्मीर विधानसभा के भीतर ग्रेटर ऑटोनॉमी प्रस्ताव को लेकर जबरदस्त राजनीतिक घमासान देखने को मिला। मुख्य विपक्षी दल भाजपा ने विधानसभा अध्यक्ष अब्दुल रहीम राथर के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए उनके इस्तीफे की मांग की और सदन के वेल में धरना दिया।
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नेशनल डेस्क, द फ्रीलांस
राष्ट्रीय संपादकीय ब्यूरो•28 सितंबर 2026 • अपडेटेड
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जम्मू-कश्मीर विधानसभा में गूंजा ग्रेटर ऑटोनॉमी का मुद्दा: स्पीकर के इस्तीफे को लेकर भिड़े सत्तापक्ष और बीजेपी
📷 जम्मू-कश्मीर विधानसभा में गूंजा ग्रेटर ऑटोनॉमी का मुद्दा: स्पीकर के इस्तीफे को लेकर भिड़े सत्तापक्ष और बीजेपी — मुख्य घटनाक्रमफोटो साभार: रॉयटर्स / एजेंसीज़ / सोशल मीडिया

खबर की बड़ी बातें (Key Highlights)

  • जम्मू-कश्मीर विधानसभा में ग्रेटर ऑटोनॉमी (अधिक स्वायत्तता) से जुड़े प्रस्ताव पर छिड़ी तीखी बहस।
  • भारतीय जनता पार्टी के विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष अब्दुल रहीम राथर को हटाने के लिए औपचारिक नोटिस सौंपा।
  • सदन के भीतर 'स्पीकर साहब इस्तीफा दें' के नारों के साथ भाजपा विधायकों ने वेल में बैठकर समानांतर कार्रवाई का किया ऐलान।
  • स्पीकर अब्दुल रहीम राथर ने स्पष्ट किया कि फिलहाल सदन में किसी विधेयक के बजाय केवल एक प्रस्ताव पर चर्चा चल रही है।

जम्मू-कश्मीर विधानसभा में ग्रेटर ऑटोनॉमी प्रस्ताव पर गरमाई सियासत

केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर की विधानसभा में राजनीतिक पारा उस समय अचानक सातवें आसमान पर पहुंच गया जब ग्रेटर ऑटोनॉमी यानी अधिक स्वायत्तता से जुड़ा एक अहम प्रस्ताव सदन के पटल पर आया। इस प्रस्ताव के सामने आते ही सत्तापक्ष और मुख्य विपक्षी दल आमने-सामने आ गए। सदन के भीतर का माहौल पूरी तरह से गर्मा गया और दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई। स्थिति इतनी तेजी से बदली कि कुछ ही पलों में सदन का सामान्य कामकाज बाधित हो गया और हंगामा मुख्य खबर बन गया।

विधानसभा के भीतर विपक्षी विधायकों ने इस बात पर कड़ी आपत्ति जताई कि इस तरह के संवेदनशील और दूरगामी परिणामों वाले प्रस्ताव को किस प्रक्रिया के तहत लाया जा रहा है। विपक्षी खेमे का तर्क था कि इस कदम से राज्य और केंद्र के संबंधों पर गंभीर असर पड़ सकता है, जिस पर सदन के भीतर व्यापक और पारदर्शी चर्चा होनी बेहद जरूरी थी। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अनुच्छेद 370 के बाद बदले हुए राजनीतिक परिदृश्य में स्वायत्तता का यह मुद्दा घाटी की राजनीति में एक नया भूचाल लाने की पूरी क्षमता रखता है।

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भाजपा विधायकों का आक्रामक रुख: स्पीकर के इस्तीफे की उठी मांग

विवाद का मुख्य केंद्र उस समय बना जब भारतीय जनता पार्टी के विधायकों ने आक्रामक रुख अपनाते हुए विधानसभा अध्यक्ष अब्दुल रहीम राथर के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। भाजपा के जनप्रतिनिधियों ने सदन के भीतर 'स्पीकर साहब इस्तीफा दें, अपनी कुर्सी छोड़ें' के जोरदार नारे लगाने शुरू कर दिए। पार्टी का आरोप था कि अध्यक्ष का रवैया इस पूरे मामले में निष्पक्ष नहीं रहा है और वे एकतरफा तरीके से सदन की कार्यवाही को संचालित करने की कोशिश कर रहे हैं।

भाजपा विधायक दल की ओर से विधानसभा सचिव को विधिवत रूप से एक नोटिस सौंपा गया, जिसमें अध्यक्ष पद से अब्दुल रहीम राथर को हटाने की मांग की गई। सदन में इस नोटिस के जिक्र के बाद राजनीतिक सरगर्मी और अधिक तेज हो गई। विपक्षी नेताओं का कहना था कि यदि ग्रेटर ऑटोनॉमी से जुड़ा यह प्रस्ताव पारित होता है, तो ऐसी स्थिति में अध्यक्ष पद पर राथर के बने रहने की वैधानिक पात्रता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं, क्योंकि उनका रुख इस विषय पर पहले से ही संदेहास्पद प्रतीत होता है।

"आप बहुत अच्छे वकील हैं, लेकिन आपको नियमों की जानकारी नहीं है। यह बेहद दुखद है कि आप सदन की कानूनी स्थिति को सही परिप्रेक्ष्य में नहीं समझ पा रहे हैं।" — अब्दुल रहीम राथर, विधानसभा अध्यक्ष, जम्मू-कश्मीर

अध्यक्ष और विपक्ष के बीच तीखी कानूनी और कायदे की बहस

हंगामे के बीच जब सदन की कार्यवाही को संभालने की कोशिश की गई, तो विधानसभा अध्यक्ष अब्दुल रहीम राथर ने भाजपा विधायक आर.एस. पठानिया के तर्कों का कड़ा प्रतिवाद किया। अध्यक्ष ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सदन में इस वक्त किसी नए विधेयक पर नहीं बल्कि महज एक सामान्य प्रस्ताव पर चर्चा चल रही है, और नियमों के मुताबिक पहले इस प्रस्ताव पर ही बात होगी। अध्यक्ष ने तंज कसते हुए कहा कि कानूनी पृष्ठभूमि से होने के बावजूद कुछ सदस्यों को सदन के आंतरिक नियमों और प्रक्रियाओं की बुनियादी समझ का अभाव है।

इस तीखी बहस के दौरान सदन में मौजूद अन्य वरिष्ठ भाजपा नेताओं ने भी मोर्चा संभाला। विधायक श्याम लाल शर्मा ने अपनी बात रखते हुए कहा कि यह हमारी अपनी विधानसभा है और हमारे चुने हुए सदस्यों को अपनी आवाज उठाने का पूरा लोकतांत्रिक अधिकार है। वहीं, शक्ति राज परिहार समेत कई अन्य नेताओं ने भी आसन के समक्ष खड़े होकर अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं, जिससे सदन के भीतर का तनाव और अधिक गहरा गया।

वेल में धरना और समानांतर कार्यवाही का ऐलान

बहस और तीखी तकरार जब किसी नतीजे पर नहीं पहुंची, तो भाजपा विधायकों ने अपनी नाराजगी जताने के लिए एक अनोखा और आक्रामक तरीका चुना। पार्टी के सभी विधायक सदन के बीचों-बीच यानी 'वेल' में आ गए और वहां बैठकर धरना शुरू कर दिया। स्थिति तब और दिलचस्प हो गई जब भाजपा सदस्यों ने सदन के भीतर ही अपनी एक 'समानांतर विधानसभा' चलाने का औपचारिक ऐलान कर डाला।

विपक्षी सदस्यों का आरोप था कि उन्हें सदन के अंदर अपनी बात पूरी करने का पर्याप्त समय नहीं दिया जा रहा है और उनके लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन किया जा रहा है। इस समानांतर विरोध प्रदर्शन के कारण सदन की आधिकारिक कार्यवाही को कुछ समय के लिए भारी व्यवधान का सामना करना पड़ा। मार्शल और सुरक्षा कर्मियों को भी स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सतर्क रहना पड़ा।

राजनीतिक विश्लेषकों की राय और आगे की राह

इस पूरे घटनाक्रम पर टिप्पणी करते हुए राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जम्मू-कश्मीर विधानसभा का यह सत्र बेहद तूफानी रहने वाला है। स्थानीय स्तर पर स्वायत्तता या ग्रेटर ऑटोनॉमी जैसे संवेदनशील मुद्दों पर राजनीतिक दलों का यह टकराव आने वाले दिनों में और अधिक व्यापक रूप ले सकता है। एक तरफ जहां सत्ताधारी दल इन प्रस्तावों के जरिए अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की कोशिश में है, वहीं विपक्ष हर कदम पर सरकार को घेरने और संवैधानिक प्रक्रियाओं का हवाला देकर विरोध दर्ज कराने की रणनीति पर काम कर रहा है।

आने वाले दिनों में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि विधानसभा अध्यक्ष के खिलाफ लाए गए इस नोटिस पर क्या कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई होती है। क्या सदन के भीतर इस प्रस्ताव पर मतदान की नौबत आएगी या फिर यह मामला महज राजनीतिक बयानों और हंगामे तक ही सीमित रहकर शांत हो जाएगा। फिलहाल, इस हाई-वोल्टेज ड्रामे ने जम्मू-कश्मीर की सियासत को पूरी तरह से गरमा दिया है और हर किसी की निगाहें विधानसभा के अगले घटनाक्रम पर टिकी हुई हैं।

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