एआई के बढ़ते दुरुपयोग पर भड़कीं अभिनेत्री जान्हवी कपूर
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और आधुनिक तकनीक जितनी तेजी से आगे बढ़ रही है, उसके नकारात्मक पहलू भी उतनी ही तेजी से सामने आ रहे हैं। फिल्मी सितारों से लेकर आम लोगों तक, हर कोई अब डीपफेक तकनीक का शिकार हो रहा है। हाल ही में अभिनेत्री जान्हवी कपूर अपनी फिल्म 'देवरा: पार्ट 1' के सुपरहिट गाने 'चुट्टामल्ले' पर बने एक मॉर्फ्ड और आपत्तिजनक एआई वीडियो के वायरल होने के बाद बेहद गुस्से में नजर आईं। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक विस्तृत नोट साझा करते हुए इस गंभीर अपराध के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की है।
जान्हवी कपूर ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर लिखा कि बिना किसी महिला की मर्जी और सहमति के उसकी तस्वीरों या वीडियो के साथ छेड़छाड़ करना और उन्हें एडिटेड रूप में प्रसारित करना बेहद शर्मनाक है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि यह आपराधिक कृत्य किसी भी लिहाज से यौन उत्पीड़न से कम नहीं है। फिल्म इंडस्ट्री में काम करने वाली महिलाओं को लंबे समय से इस तरह की मानसिकता का सामना करना पड़ा है, लेकिन अब डिजिटल युग में यह समस्या और भी ज्यादा खतरनाक रूप ले चुकी है.
एक्ट्रेस ने आगे कहा कि इंटरनेट और सोशल मीडिया पर महिलाओं की सहमति के बिना उनकी गरिमा को ठेस पहुंचाई जा रही है। उन्होंने साफ किया कि यदि कोई महिला किसी स्थान पर अपनी सहजता के अनुसार कपड़े पहनती है या कोई फैसला लेती है, तो इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि किसी को भी उसकी निजता में दखल देने या उसकी तस्वीरों को मॉर्फ करने का अधिकार मिल जाता है। महिलाओं की सीमाएं और उनकी मर्जी सर्वोपरि हैं और उनका हर हाल में सम्मान होना चाहिए।
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जूनियर एनटीआर और चिरंजीवी समेत कई सितारों ने की कड़ी निंदा
इस पूरे विवाद के दौरान फिल्म जगत के कई बड़े कलाकारों ने जान्हवी कपूर का समर्थन किया और एआई के इस खतरनाक दुरुपयोग के खिलाफ एकजुटता दिखाई। 'देवरा: पार्ट 1' में जान्हवी के को-स्टार रहे जूनियर एनटीआर ने सबसे पहले इस मामले पर सख्त रुख अपनाते हुए वीडियो बनाने और फैलाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की बात कही। अभिनेता ने साफ कर दिया कि इस तरह की हरकतें किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएंगी और दोषियों को सजा दिलाई जाएगी।
साउथ सिनेमा के मेगास्टार चिरंजीवी ने भी इस मामले में अपनी तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक लंबा संदेश साझा करते हुए लिखा कि एआई का इस्तेमाल करके किसी भी महिला का अपमानजनक और मॉर्फ्ड वीडियो तैयार करना बेहद डरावनी और अस्वीकार्य बात है। उन्होंने कहा कि यह केवल एक व्यक्ति या फिल्म का मामला नहीं है, बल्कि समाज की सुरक्षा से जुड़ा एक गंभीर विषय है। यदि इस पर समय रहते रोक नहीं लगाई गई, तो यह किसी के भी साथ हो सकता है।
"एआई का इस्तेमाल कर किसी महिला का अपमानजनक वीडियो बनाना बेहद परेशान करने वाली बात है। यह क्रूर, शर्मनाक और पूरी तरह अस्वीकार्य है। ऐसे मामलों पर चुप रहने के बजाय सभी को इसके खिलाफ आवाज उठानी चाहिए।" — चिरंजीवी, मेगास्टार
यामी गौतम ने भी एआई और डीपफेक के खिलाफ उठाई आवाज
जान्हवी कपूर के इस विवाद के सामने आने के तुरंत बाद नेशनल अवॉर्ड विनिंग अभिनेत्री यामी गौतम ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से एक महत्वपूर्ण अपील जारी की। उन्होंने मीडिया और तमाम सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से अनुरोध किया कि उनकी सार्वजनिक कार्यक्रमों और अपीयरेंस की तस्वीरों के साथ एआई के जरिए किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ या सुधार न किया जाए।
यामी ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर लिखा कि किसी भी व्यक्ति की तस्वीर या उसके रूप-रंग में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग करके बदलाव करना पूरी तरह गलत है। तस्वीरों का इस्तेमाल हमेशा उनके मूल और वास्तविक रूप में ही किया जाना चाहिए। सेलेब्रिटी जगत में लगातार बढ़ रहे इन मामलों ने यह साबित कर दिया है कि डिजिटल सुरक्षा और प्राइवेसी को लेकर कड़े नियम बनाए जाने की सख्त जरूरत है, ताकि कोई भी तकनीक का दुरुपयोग कर किसी की प्रतिष्ठा को नुकसान न पहुंचा सके।
कंसेंट और डिजिटल सुरक्षा पर क्यों छिड़ी है बड़ी बहस?
जान्हवी कपूर और यामी गौतम के इन बयानों के बाद मनोरंजन जगत से लेकर आम जनता के बीच 'कंसेंट' यानी सहमति और डिजिटल सुरक्षा को लेकर एक बार फिर बड़ी बहस छिड़ गई है। जान्हवी ने अपने नोट में इस बात पर जोर दिया कि समाज की उस मानसिकता को बदलने की जरूरत है जो यह मानती है कि किसी की सीमाओं को आसानी से तोड़ा जा सकता है। महिलाओं को हर कदम पर अपनी सुरक्षा को लेकर समझौते करने पड़ते हैं, और तकनीक इन खतरों को और अधिक बढ़ावा दे रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि डीपफेक और एआई जनरेटेड फर्जी कंटेंट से निपटने के लिए न केवल कड़े कानूनी प्रावधानों की आवश्यकता है, बल्कि लोगों में नैतिक जागरूकता पैदा करना भी उतना ही जरूरी है। जब तक समाज में महिलाओं की सहमति और उनके सम्मान को सर्वोच्च प्राथमिकता नहीं दी जाएगी, तब तक इस तरह के मामलों पर पूरी तरह से लगाम लगाना मुमकिन नहीं होगा। फिल्मी सितारों का इस तरह खुलकर आगे आना इस दिशा में एक बड़ा और सकारात्मक कदम माना जा रहा है।








