नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश की राजधानी का ऐतिहासिक जंतर-मंतर एक बार फिर सुलग उठा है। मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर आज कई राजनीतिक और सामाजिक संगठन सड़कों पर उतर आए हैं। हालात को देखते हुए जंतर-मंतर से लेकर संसद मार्ग तक सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। पुलिस ने इलाके को छावनी में बदल दिया है और किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए आसमान से ड्रोन कैमरों से नजर रखी जा रही है।
प्रदर्शन की अगुवाई कर रहे नेताओं और समूहों ने तीखे तेवर अपनाए हैं। कॉकरोच जनता पार्टी और वाम दलों के नेताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर साफ कर दिया है कि वे अपनी मांगों को लेकर पीछे नहीं हटने वाले हैं। आयोजकों की तरफ से सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों पर आक्रामक अपीलें की जा रही हैं। इन अपीलों के बाद प्रशासन की चिंताएं और बढ़ गई हैं, क्योंकि कानून-व्यवस्था बनाए रखना पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
महिला पत्रकारों पर हमले के आरोप और क्राइम ब्रांच की एंट्री
इस आंदोलन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प के अलावा गंभीर आरोप भी सामने आए हैं। जंतर-मंतर पर कवरेज के दौरान महिला पत्रकारों पर कथित तौर पर यौन हमले और अभद्रता के मामले ने तूल पकड़ लिया है। इस गंभीर शिकायत पर त्वरित कार्रवाई करते हुए दिल्ली पुलिस ने मामले की जांच क्राइम ब्रांच को सौंप दी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वीडियो फुटेज खंगाले जा रहे हैं और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
दूसरी ओर, विरोध प्रदर्शन स्थल के पास सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और यूट्यूबरों की हरकतें भी चर्चा का विषय बनी हुई हैं। कुछ सोशल मीडिया चेहरों द्वारा पुलिस की गाड़ियों को रोकने और ड्रामेबाजी करने के वीडियो सामने आने के बाद उन्हें सोशल मीडिया पर तीखी ट्रोलिंग का सामना करना पड़ रहा है। पुलिस प्रशासन का साफ निर्देश है कि विरोध प्रदर्शन के नाम पर कानून हाथ में लेने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
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प्रशासन की कड़ी चौकसी और ड्रोन से निगरानी
जंतर-मंतर और आसपास के रास्तों पर भारी पुलिस बल के साथ अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई है। आने-जाने वाले हर व्यक्ति और वाहन की सघन तलाशी ली जा रही है ताकि कोई संदिग्ध तत्व भीड़ का फायदा न उठा सके। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने खुद मोर्चा संभाल रखा है और लगातार मार्च कर रहे हैं। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण दायरे में ही होना चाहिए, अन्यथा सख्त बल प्रयोग किया जा सकता है।
द फ्रीलान्स की ग्राउंड टीम ने पाया कि आम जनता और स्थानीय दुकानदारों में इस बार के प्रदर्शन को लेकर काफी नाराजगी और डर का माहौल है। बार-बार होने वाले इन धरना-प्रदर्शनों से रोजमर्रा का जनजीवन प्रभावित हो रहा है और यातायात जाम की समस्या से लोग परेशान हैं। प्रशासनिक अमला पूरी तरह मुस्तैद है, लेकिन आने वाले घंटों में स्थिति किस करवट बैठेगी, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि राजनीतिक दल और प्रदर्शनकारी कितना संयम बरतते हैं।
राजनीतिक सरगर्मी और आगे की रणनीति
सीईसी के खिलाफ उठी इस मांग ने राष्ट्रीय राजनीति में भी हलचल पैदा कर दी है। विपक्षी दलों और असंतुष्ट समूहों का आरोप है कि चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए बड़े बदलाव जरूरी हैं। वहीं, सरकार समर्थक हलकों का कहना है कि संवैधानिक संस्थाओं पर इस तरह का दबाव बनाना और अनियंत्रित भीड़ जुटाना लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ है।
आने वाले दिनों में यह विवाद और गहरा सकता है क्योंकि विभिन्न संगठनों ने देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी दी है। द फ्रीलान्स इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी पैनी नजर बनाए रखेगा और आपको पल-पल की जमीनी हकीकत से अवगत कराता रहेगा। कानून और व्यवस्था की इस जंग में आम नागरिक की सुरक्षा हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता है।



