नई दिल्ली से द फ्रीलान्स की ग्राउंड रिपोर्ट — देश की राजधानी दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों का केंद्र रहे जंतर-मंतर को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा और कड़ा कदम उठाया है। अदालत ने जंतर-मंतर को अधिकारिक प्रदर्शन स्थलों की सूची से चुपचाप हटाए जाने के मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस से कड़ा जवाब तलब किया है। पिछले कुछ समय से जंतर-मंतर पर धरने और रैलियों पर रोक लगाने या पाबंदियां बढ़ाने की खबरें लगातार सामने आ रही थीं। अब इस मामले के सुप्रीम कोर्ट पहुँचने के बाद प्रशासनिक महकमे में हलचल तेज हो गई है और हर कोई अदालत की अगली सुनवाई का इंतजार कर रहा है।
मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के जजों ने सख्त टिप्पणी करते हुए साफ कहा है कि यदि सरकार और पुलिस के जवाब से अदालत संतुष्ट नहीं होती है, तो कानून अपना कड़ा काम करेगा। अदालत ने यह जानना चाहा है कि बिना किसी स्पष्ट और पारदर्शी नीति के दिल्ली के इस ऐतिहासिक प्रदर्शन स्थल को कैसे और किस नियम के तहत सूची से बाहर कर दिया गया। देश के नागरिकों के शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने के लोकतांत्रिक अधिकार और सुरक्षा के नाम पर प्रशासनिक पाबंदियों के बीच चल रहे इस विवाद में अब शीर्ष अदालत के दखल से नया मोड़ आ गया है।
जंतर-मंतर को सूची से बाहर करने पर कोर्ट की दो टूक
दिल्ली के जंतर-मंतर पर लंबे समय से किसान, मजदूर, छात्र, राजनीतिक दल और विभिन्न संगठन अपनी मांगों को लेकर धरना-प्रदर्शन करते आए हैं। लेकिन पिछले कुछ महीनों में यहाँ प्रदर्शन करने वालों पर कई तरह की बंदिशें लगा दी गईं और कई बार आयोजकों को अन्य तय की गई नई जगहों पर भेज दिया गया। जब इस बदलाव के खिलाफ मामला सुप्रीम कोर्ट की चौखट पर पहुँचा, तो अदालत ने इसे बेहद गंभीरता से लिया। जजों ने साफ शब्दों में कहा कि लोकतांत्रिक देश में लोगों को अपनी बात रखने के लिए एक निश्चित और सुलभ जगह मिलना जरूरी है, और इस तरह अचानक पाबंदियां लगाना न्यायसंगत नहीं है।
शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस कमिश्नर को नोटिस जारी कर यह स्पष्ट करने को कहा है कि जंतर-मंतर के विकल्प के रूप में जो नई जगहें तय की गई हैं, वहाँ बुनियादी सुविधाएं और सुरक्षा के क्या इंतजाम हैं। अदालत ने यह भी पूछा है कि क्या बिना आम जनता और प्रदर्शनकारियों से चर्चा किए इस तरह का एकतरफा फैसला लिया जा सकता है। पुलिस अधिकारियों और प्रशासनिक अमले को अब तय समय सीमा के भीतर अपना जवाब अदालत में दाखिल करना होगा, जिसके बाद इस पूरे प्रकरण की अगली सुनवाई की तारीख तय की जाएगी।
विरोध प्रदर्शन के बुनियादी अधिकारों पर मंडराता संकट
जंतर-मंतर को लेकर चल रहे इस विवाद ने एक बार फिर देश में नागरिकों के विरोध प्रदर्शन के अधिकारों और पुलिस प्रशासन के सुरक्षा प्रबंधों के बीच संतुलन पर बड़ी बहस छेड़ दी है। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और वकीलों का कहना है कि सरकारें अक्सर असंतोष की आवाज को दबाने के लिए जंतर-मंतर जैसी जगहों को शहर के बाहरी इलाकों में धकेलने की कोशिश करती हैं। रामलीला मैदान या जंतर-मंतर जैसी ऐतिहासिक जगहों पर प्रदर्शन करना आम आदमी की पहुंच में होता है, लेकिन दूर-दराज के इलाकों में जाकर आवाज उठाना कमजोर वर्गों के लिए बेहद मुश्किल साबित होता है।
द फ्रीलान्स की टीम ने जब जमीनी हकीकत जानने के लिए जंतर-मंतर के आसपास के इलाकों का दौरा किया, तो वहाँ सन्नाटा पसरा हुआ था और भारी पुलिस बल तैनात नजर आया। स्थानीय दुकानदारों और वेंडर्स का कहना है कि धरने-प्रदर्शन बंद होने से उनके कारोबार पर भी असर पड़ा है, क्योंकि पहले यहाँ रोज किसी न किसी मुद्दे पर भीड़ जुटती थी। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जब केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस सुप्रीम कोर्ट में अपना जवाब दाखिल करेंगी, तो अदालत का अगला रुख क्या होगा।
कानून और व्यवस्था के नाम पर पाबंदियों का नया दौर
राजधानी दिल्ली में वीआईपी सुरक्षा और यातायात व्यवस्था का हवाला देकर पिछले कुछ वर्षों में कई पारंपरिक धरना स्थलों को धीरे-धीरे सीमित कर दिया गया है। जंतर-मंतर के अलावा भी कई ऐसी जगहें थीं जहाँ लोग आसानी से अपनी बात सरकार तक पहुँचाने पहुँचते थे, लेकिन अब हर आंदोलन को अनुमति लेना एक टेढ़ी खीर बन गया है। सुप्रीम कोर्ट के इस ताजा नोटिस से उन तमाम संगठनों और आम नागरिकों को थोड़ी राहत की उम्मीद बंधी है जो लोकतांत्रिक अधिकारों के हनन के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं।
द फ्रीलान्स अपनी इस खोजी रिपोर्ट के जरिए लगातार इस बात पर नजर बनाए हुए है कि प्रशासनिक तंत्र नागरिकों के मौलिक अधिकारों और सुरक्षा के बीच कैसे संतुलन बिठाता है। आने वाले दिनों में जैसे ही केंद्र और पुलिस की तरफ से हलफनामा दाखिल होगा, इस मामले की सुनवाई और अधिक दिलचस्प हो जाएगी। हमारी कोशिश रहेगी कि इस पूरे कानूनी संघर्ष से जुड़ी हर एक बारीक जानकारी और अपडेट सबसे पहले और सबसे सटीक रूप से आप तक पहुँचाई जाए।










