झारखंड कैबिनेट की आगामी बैठक पर टिकी निगाहें, विकास कार्यों को मिल रही गति
झारखंड की प्रशासनिक राजधानी रांची में राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल एक बार फिर तेज हो गई है। राज्य सचिवालय यानी झारखंड मंत्रालय में आगामी 7 अक्टूबर को मंत्रिपरिषद की एक और महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है। इस प्रस्तावित बैठक से पहले प्रशासनिक गलियारों में इस बात की गहन समीक्षा की जा रही है कि चालू वर्ष के दौरान अब तक सरकार ने जनता के हित में कौन-कौन से बड़े और कड़े फैसले लिए हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय से प्राप्त आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, इस साल जनवरी महीने से लेकर अगस्त के अंतिम सप्ताह तक कुल नौ बार कैबिनेट की बैठकें हो चुकी हैं, जिनमें अनगिनत वित्तीय और नीतिगत प्रस्तावों को हरी झंडी दिखाई गई है।
इन सभी बैठकों का मुख्य उद्देश्य आम नागरिकों के जीवन स्तर को ऊंचा उठाना, स्वास्थ्य सेवाओं को दुरुस्त करना, शिक्षा के स्तर को आधुनिक बनाना और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित करना रहा है। राज्य सरकार के इन फैसलों का सीधा असर दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले आदिवासियों, पिछड़ों और आम जनमानस की बुनियादी सुविधाओं पर पड़ रहा है। आने वाली 7 अक्टूबर की बैठक को लेकर भी यह कयास लगाए जा रहे हैं कि कुछ और नई कल्याणकारी योजनाओं पर मुहर लग सकती है, जिससे राज्य के विकास को और अधिक गति मिलेगी।
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रिम्स 2.0 और सड़कों के कायाकल्प के लिए हजारों करोड़ के बजट को मंजूरी
राज्य के स्वास्थ्य ढांचे को पूरी तरह से बदलने की दिशा में सरकार ने इस साल जुलाई के महीने में एक ऐतिहासिक कदम उठाया था। दो जुलाई को आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में चिकित्सा क्षेत्र की रीढ़ माने जाने वाले राजेंद्र इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेज यानी रिम्स के आधुनिकीकरण के लिए 'रिम्स 2.0' परियोजना को आधिकारिक रूप से मंजूरी प्रदान की गई। इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट पर 4,189 करोड़ रुपये से अधिक की भारी-भरकम राशि खर्च की जाएगी, जिसका उद्देश्य राज्य के मरीजों को विश्वस्तरीय मेडिकल सुविधाएं उनके अपने गृह राज्य में ही उपलब्ध कराना है ताकि उन्हें इलाज के लिए महानगरों का रुख न करना पड़े।
इसी विशेष बैठक के दौरान सड़क मार्ग के आधारभूत ढांचे को मजबूत करने के लिए भी 500 करोड़ रुपये से अधिक के बजट को स्वीकृति दी गई थी। इसके अलावा, राज्य के अत्यंत पिछड़े जनजातीय समूहों यानी पीवीटीजी के लिए विशेष रोजगार योजनाओं का ताना-बाना बुना गया है ताकि इन समुदायों के आर्थिक उत्थान का मार्ग प्रशस्त हो सके। प्रशासनिक कसावट लाने के वास्ते बीडीओ और सीओ की पदस्थापना की पुरानी व्यवस्था में भी आवश्यक बदलाव किए गए हैं ताकि ग्रामीण स्तर पर सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी प्रकार की कोताही न बरती जाए।
"सरकार का मुख्य संकल्प राज्य के सुदूर इलाकों तक बुनियादी सुविधाएं पहुंचाना और हर नागरिक के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना है। स्वास्थ्य और शिक्षा हमारे प्राथमिकता वाले क्षेत्र हैं।" — प्रशासनिक सूत्र, झारखंड सरकार
राजधानी रांची के ट्रैफिक सुधार और शिक्षा क्षेत्र में तकनीकी क्रांति की पहल
राजधानी रांची में लगातार बढ़ती गाड़ियों की संख्या और ट्रैफिक जाम की समस्या से शहरवासियों को राहत दिलाने के लिए सरकार ने बुनियादी संरचनाओं के विकास पर जोर दिया है। इसी कड़ी में अरगोड़ा चौक से हरमू और करमटोली चौक से साइंस सिटी तक दो आधुनिक फ्लाईओवरों के निर्माण के प्रस्ताव को प्रशासनिक स्वीकृति दी गई। इन दोनों बड़ी परियोजनाओं पर क्रमशः 469 करोड़ और 351 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है, जिससे भविष्य में रांची का आवागमन काफी सुगम और व्यवधान मुक्त हो जाएगा।
शिक्षा के क्षेत्र में डिजिटल क्रांति लाने के उद्देश्य से जुलाई के अंत में एक और बड़ा फैसला लिया गया, जिसके तहत राज्यभर के एक हजार सरकारी विद्यालयों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई आधारित कक्षाएं और वर्चुअल क्लासरूम स्थापित किए जाने का निर्णय लिया गया। इसके साथ ही, गंभीर रूप से बीमार और दुर्घटना के शिकार मरीजों को दुर्गम व पहाड़ी इलाकों से तुरंत नजदीकी चिकित्सा केंद्रों तक पहुंचाने के लिए हेलीकॉप्टर एंबुलेंस सेवा को भी कैबिनेट की मंजूरी मिल चुकी है, जो आपातकालीन स्थिति में वरदान साबित हो रही है।
दुमका में खेल प्रतिभाओं का महाकुंभ: जूनियर तीरंदाजी चैंपियनशिप का आगाज
एक तरफ जहां प्रशासनिक और ढांचागत सुधारों पर जोर दिया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ खेल के मैदानों से भी झारखंड के लिए उत्साहजनक खबरें सामने आ रही हैं। उपराजधानी दुमका के कमारदुधानी इलाके में 17वीं झारखंड राज्यस्तरीय जूनियर तीरंदाजी प्रतियोगिता का भव्य आयोजन शुरू हो चुका है। इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट में राज्य के विभिन्न जिलों से आए 240 से अधिक युवा और प्रतिभावान तीरंदाज हिस्सा ले रहे हैं, जो राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के लिए अपना दावा ठोक रहे हैं।
खेल विशेषज्ञों और राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय स्तर के प्रशिक्षकों का मानना है कि झारखंड के ग्रामीण अंचलों में प्राकृतिक रूप से तीरंदाजी की अद्भुत क्षमता मौजूद है। प्रतिष्ठित कोच बीएस राव ने भी राज्य की खेल प्रतिभाओं की जमकर सराहना करते हुए कहा है कि यदि इन खिलाड़ियों को सही समय पर उच्च कोटि का प्रशिक्षण और सुविधाएं मिल जाएं, तो वे देश और दुनिया के मंच पर झारखंड का नाम रोशन कर सकते हैं। आगामी कैबिनेट बैठकों में खेल और खिलाड़ियों के प्रोत्साहन से जुड़े कुछ और अहम प्रस्तावों पर मुहर लगने की पूरी संभावना जताई जा रही है।








