कालिंदीपुरम फ्लाईओवर के नीचे बदहाली की दास्तान
उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहर प्रयागराज के कालिंदीपुरम इलाके में बना नया फ्लाईओवर जनता की सुविधा के लिए खड़ा किया गया था, लेकिन मौजूदा हालात इसके बिल्कुल उलट तस्वीर पेश कर रहे हैं। यातायात को सुगम बनाने के उद्देश्य से तैयार इस आधुनिक ढांचे के ठीक नीचे अब अराजकता और कुव्यवस्था ने अपनी जड़ें जमा ली हैं। फ्लाईओवर के विशाल पिलरों के पास और मुख्य सड़क के किनारों पर अनगिनत रेहड़ी-पटरी वालों और ठेले वालों ने अनधिकृत रूप से कब्जा कर रखा है, जिससे रोजमर्रा का सफर बेहद मुश्किल हो गया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह अतिक्रमण सिर्फ ट्रैफिक जाम की वजह नहीं बन रहा, बल्कि पूरे इलाके की सुंदरता और मूल स्वरूप को भी बिगाड़ रहा है। सुबह से लेकर देर रात तक लगने वाली इन अस्थाई दुकानों के कारण पैदल चलने वालों के लिए सड़क पार करना या रास्ते से गुजरना किसी चुनौती से कम नहीं रह गया है। जिला प्रशासन और स्थानीय नगर निगम की उदासीनता के चलते यह अवैध कब्जा दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है, और इसका खामियाजा सीधे तौर पर आम नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है।
स्थिति यह है कि फ्लाईओवर के नीचे गुजरने वाली सड़कों पर से गुजरते वक्त वाहन चालकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। दोपहिया वाहन चालक अक्सर असंतुलित होकर यहां दुर्घटनाओं का शिकार हो जाते हैं। इसके बावजूद संबंधित विभागों के अधिकारियों की नींद नहीं टूट रही है, और वे इस गंभीर समस्या पर आंखें मूंदकर बैठे हुए हैं। नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते इस पर कड़े कदम नहीं उठाए गए, तो स्थिति और भी अधिक भयावह हो सकती है।
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सड़क पर बने गहरे गड्ढे और कचरे का अंबार
अतिक्रमण की समस्या के साथ-साथ इस इलाके की सड़कों की हालत भी बेहद दयनीय हो चुकी है। फ्लाईओवर के नीचे और उसके आसपास की सड़कों पर बड़े-बड़े और गहरे गड्ढे बन गए हैं, जो बरसात के दिनों में जलभराव के मुख्य केंद्र बन जाते हैं। इन गड्ढों की सुध लेने वाला कोई नहीं है, जिसके कारण इनमें महीनों से गंदा पानी भरा हुआ है। पानी की निकासी का कोई उचित प्रबंध न होने के कारण यह बदरंग पानी सड़ रहा है और उससे आसपास के पूरे इलाके में भयंकर बदबू फैल रही है।
इन गड्ढों में सिर्फ बारिश का पानी ही नहीं, बल्कि आसपास के नालों का ओवरफ्लो पानी और घरेलू कचरा भी आकर जमा हो रहा है। प्लास्टिक की थैलियों, सड़े हुए खाद्य पदार्थों और गंदे पानी के मिलने से एक जहरीला माहौल तैयार हो गया है। राहगीरों का वहां एक पल भी खड़े रहना मुश्किल हो जाता है। इस कचरे के ढेर पर सुअर, आवारा कुत्ते और मक्खी-मच्छर बड़ी संख्या में मंडराते रहते हैं, जो स्वच्छता अभियानों के दावों की पोल खोल रहे हैं।
नगर निगम के स्वच्छता कर्मी शायद ही कभी इस हिस्से की सुध लेते हैं। फ्लाईओवर के नीचे का यह क्षेत्र अब कचराघर में तब्दील हो चुका है। स्थानीय दुकानदारों और निवासियों ने कई बार इस गंदगी को लेकर अपनी शिकायतें दर्ज कराई हैं, लेकिन कागजी आश्वासनों के सिवा धरातल पर कोई ठोस कार्रवाई देखने को नहीं मिली है। शहर के विकास के नाम पर बने इन आधुनिक पुलों के नीचे की यह हकीकत प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
संक्रामक बीमारियों के फैलने का मंडराता गंभीर खतरा
कालिंदीपुरम फ्लाईओवर के नीचे जमे इस गंदे पानी और कचरे ने अब एक बड़े स्वास्थ्य संकट को जन्म दे दिया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, रुके हुए पानी में खतरनाक किस्म के मच्छर और बैक्टीरिया तेजी से पनपते हैं, जो कई जानलेवा बीमारियों का कारण बनते हैं। वर्तमान में इस इलाके में डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया और टायफाइड जैसी संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा चरम पर पहुंच चुका है। आसपास की घनी बस्तियों में रहने वाले बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर इसका सीधा असर पड़ रहा है।
अनेक घरों में लोग पहले से ही वायरल बुखार और पेट से जुड़ी बीमारियों से पीड़ित पाए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि प्रशासन ने जल्द ही फॉगिंग और ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव नहीं कराया, तो यह समस्या एक महामारी का रूप ले सकती है। गंदे पानी से उठने वाली सीलन और दुर्गंध के कारण लोगों का अपने घरों की खिड़कियां तक खोलना दूभर हो गया है। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम की टीमें अभी तक इस क्षेत्र में मुआयना करने तक नहीं पहुंची हैं।
"प्रशासन की इस लापरवाही ने हम सबका जीना मुहाल कर दिया है। फ्लाईओवर के नीचे फैली गंदगी और मच्छरों के आतंक से हमारे बच्चे बीमार पड़ रहे हैं। अगर जल्द ही इस जलभराव और अतिक्रमण को नहीं हटाया गया, तो हम लोग सड़कों पर उतरकर बड़ा विरोध प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे।" — स्थानीय निवासी, कालिंदीपुरम
प्रशासनिक अनदेखी और नागरिकों का बढ़ता आक्रोश
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा विमर्श प्रशासनिक सुस्ती को लेकर है। प्रयागराज विकास प्राधिकरण और नगर निगम के अधिकारी एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालकर पल्ला झाड़ते नजर आते हैं। स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी चुनाव के समय किए गए विकास के वादों को भुला दिया है। जनता का टैक्स का पैसा बड़े-बड़े प्रोजेक्ट्स पर खर्च तो होता है, लेकिन उनके रखरखाव और साफ-सफाई के प्रति विभाग पूरी तरह लापरवाह बने रहते हैं।
नागरिकों का यह भी आरोप है कि जब वे अपनी शिकायत लेकर संबंधित कार्यालयों में जाते हैं, तो उन्हें केवल आश्वासन की घुट्टी पिलाकर वापस भेज दिया जाता है। इस तरह की उदासीनता जनता और प्रशासन के बीच की खाई को और चौड़ा कर रही है। एक ओर जहां शहर को स्मार्ट बनाने के दावे किए जा रहे हैं, वहीं शहर के भीतर की ऐसी तस्वीरें विकास के दावों की पोल खोलकर रख देती हैं।
अब देखना यह होगा कि मीडिया में इस खबर के प्रमुखता से आने के बाद क्या कुंभ नगरी का प्रशासन हरकत में आता है या फिर जनता को यूं ही बीमारियों के साए में जीने के लिए छोड़ दिया जाता है। स्थानीय लोग लगातार यह मांग कर रहे हैं कि फ्लाईओवर के नीचे का अतिक्रमण तुरंत हटाया जाए, सड़कों की री-सर्फेसिंग हो और जलभराव का स्थायी समाधान किया जाए ताकि एक बड़ी जनहानि को टाला जा सके।








