नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — भारतीय क्रिकेट के गलियारों में इन दिनों एक नाम फिर से सबसे ज्यादा गूंज रहा है और वह नाम है करुण नायर का। टेस्ट क्रिकेट में तिहरा शतक लगाने वाले इस बल्लेबाज ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि उनका बल्ला अभी शांत नहीं हुआ है। रणजी ट्रॉफी के एक अहम मुकाबले में 34 साल के इस खिलाड़ी ने मैदान के चारों तरफ शानदार शॉट्स लगाते हुए 155 रनों की यादगार पारी खेली। घरेलू क्रिकेट में लगातार आ रहे इन रनों ने उन चयनकर्ताओं को कड़ा जवाब दिया है जो उन्हें लंबे समय से अनदेखा कर रहे थे। पिछले कुछ महीनों में करुण नायर का प्रदर्शन घरेलू सर्किट में बेहद शानदार रहा है और उन्होंने हर मौके पर रन बनाकर अपनी उपयोगिता साबित की है।
करुण नायर के इस शानदार सफर के पीछे हाल ही में हुए कई बड़े टूर्नामेंट्स की कहानी भी जुड़ी है। कुछ समय पहले महाराजा ट्रॉफी के ऑक्शन में वह सबसे महंगे खिलाड़ी के रूप में बिके थे, जहां फ्रेंचाइजी ने उनके अनुभव पर बड़ा दांव खेला था। इसके उलट, आईपीएल या अन्य बड़ी लीग्स में कई बड़े नाम नीलामी में पीछे छूट गए, लेकिन करुण नायर की मांग बाजार में लगातार बनी रही। हालांकि, आईपीएल के पिछले सीजन में दिल्ली कैपिटल्स के लिए खेलते हुए कुछ मैचों में उनसे रणनीतिक चूक भी हुई थी, जिसकी चर्चा सोशल मीडिया पर खूब हुई थी। लेकिन नायर ने अपनी पुरानी गलतियों से सीख ली और अपना पूरा ध्यान सिर्फ और सिर्फ अपनी बल्लेबाजी पर केंद्रित किया।
घरेलू क्रिकेट में रनों का अंबार और चयनकर्ताओं को संदेश
दलीप ट्रॉफी के फाइनल मुकाबले से ठीक बाहर होने के बाद करुण नायर का गुस्सा और उनका जुनून उनके बल्ले से निकला। टीम से बाहर किए जाने के बाद उन्होंने रणजी मैदान पर उतरकर जिस अंदाज में शतक जड़ा, उसने क्रिकेट पंडितों को भी हैरान कर दिया। आज के दौर में जब युवा खिलाड़ी टी-20 क्रिकेट के पीछे भाग रहे हैं, करुण नायर लाल गेंद के क्रिकेट में अपनी तकनीक और धैर्य का बेहतरीन नमूना पेश कर रहे हैं। उन्होंने पिछले कुछ घरेलू सत्रों में अपनी तकनीक में कुछ बदलाव किए हैं जिनका फायदा उन्हें साफ नजर आ रहा है। पिच पर टिककर खेलना और गेंदबाजों को सेट होने का मौका न देना उनकी इस पारी की सबसे बड़ी खासियत रही।
क्रिकेट विश्लेषकों का मानना है कि करुण नायर जैसे अनुभवी खिलाड़ी का घरेलू सर्किट में इस तरह रन बनाना युवा खिलाड़ियों के लिए भी एक बड़ी सीख है। करियर के इस पड़ाव पर आकर जहां ज्यादातर खिलाड़ी संन्यास के बारे में सोचने लगते हैं, नायर का यह संघर्ष और जुनून उनके भीतर की आग को साफ दिखाता है। उत्तर प्रदेश और अन्य टीमों के खिलाफ खेले गए मैचों में उनकी पारियों ने न केवल उनकी टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाया है, बल्कि विरोधी गेंदबाजों के मन में भी खौफ पैदा किया है। टीम इंडिया के मौजूदा मध्य क्रम में जिस तरह की प्रतिस्पर्धा चल रही है, उसे देखते हुए नायर का यह फॉर्म चयनकर्ताओं के लिए एक सिरदर्द जरूर बन गया है।
टीम इंडिया में वापसी की उम्मीद और आगे की राह
भारतीय टेस्ट टीम में मध्य क्रम के लिए इन दिनों कई युवा दावेदार कतार में खड़े हैं, लेकिन अनुभव का कोई विकल्प नहीं होता है। करुण नायर के पास अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का अनुभव है और वह दबाव के क्षणों में खेलना अच्छी तरह जानते हैं। यदि वह आगामी मैचों में भी इसी तरह का निरंतर प्रदर्शन जारी रखते हैं, तो राष्ट्रीय टीम के दरवाजे उनके लिए एक बार फिर खुल सकते हैं। क्रिकेट प्रेमी और उनके फैंस सोशल मीडिया पर लगातार मांग कर रहे हैं कि इस अनुभवी बल्लेबाज को एक और मौका मिलना चाहिए।
द फ्रीलान्स की ग्राउंड पड़ताल बताती है कि करुण नायर ने अपनी फिटनेस और मानसिक मजबूती पर बहुत काम किया है। मैदान पर उनकी एकाग्रता और विकेट के बीच उनकी दौड़ यह साबित करती है कि वह अभी अंतरराष्ट्रीय स्तर की चुनौतियों के लिए पूरी तरह तैयार हैं। आने वाले हफ्तों में रणजी ट्रॉफी के अन्य मुकाबले यह तय करेंगे कि क्या चयनकर्ता इस 34 साल के अनुभवी खिलाड़ी को फिर से भारतीय जर्सी पहनने का मौका देते हैं या नहीं। फिलहाल, करुण नायर ने अपने बल्ले से वो तमाम बातें कह दी हैं जो कोई भी कप्तान और कोच सुनना चाहता है।




