कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर तीखा हमला
देश की राजनीति में इन दिनों मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर (SIR) को लेकर घमासान मचा हुआ है। इसी बीच कांग्रेस पार्टी की सर्वोच्च नीति निर्धारण इकाई कांग्रेस वर्किंग कमेटी यानी सीडब्ल्यूसी की एक अहम बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने केंद्र की मोदी सरकार और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए। खड़गे का यह आक्रामक रुख ऐसे समय में सामने आया है जब विपक्षी दल लगातार चुनावी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर मुखर बने हुए हैं।
बैठक को संबोधित करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मौजूदा समय में देश के संविधान और लोकतांत्रिक ताने-बाने की रक्षा करने का बहुत बड़ा दायित्व फिर से कांग्रेस पार्टी के कंधों पर आ गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले एक दशक से अधिक समय में केंद्र सरकार ने देश की मजबूत लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने का सुनियोजित प्रयास किया है। पार्टी का मानना है कि यदि चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर ही दाग लग जाए, तो लोकतंत्र का मूल ढांचा ही खतरे में पड़ जाएगा।
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मुख्य चुनाव आयुक्त पर मनमाने रवैया अपनाने और कठपुतली बनने का आरोप
मल्लिकार्जुन खड़गे ने मुख्य चुनाव आयुक्त की कार्यशैली पर सीधा निशाना साधते हुए उन्हें पद से हटाने की मांग कर डाली। उन्होंने दावा किया कि चुनाव आयोग के दो अन्य आयुक्तों ने खुद मुख्य चुनाव आयुक्त की गतिविधियों को अनुचित और मनमाना करार दिया है। खड़गे के अनुसार, आयोग के भीतर ही अंदरूनी मतभेद इस बात की गवाही दे रहे हैं कि शीर्ष पद पर बैठा व्यक्ति सत्तापक्ष को लाभ पहुंचाने के लिए काम कर रहा है।
कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग जैसी स्वतंत्र संवैधानिक संस्था का इस तरह से इस्तेमाल किया जाना लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक संकेत है। उन्होंने कहा कि हर पात्र नागरिक के वोट की रक्षा करना और उसकी निष्पक्ष गिनती सुनिश्चित करना आयोग का संवैधानिक कर्तव्य है, लेकिन मौजूदा हालात में ऐसा प्रतीत होता है कि आयोग अपनी इस जिम्मेदारी से पीछे हट रहा है। खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी नैतिकता का हवाला देते हुए अपने पद से इस्तीफा देने की मांग की।
फॉर्म-6 के नियमों में बदलाव और युवाओं के मताधिकार पर सवाल
युवाओं के मताधिकार का मुद्दा उठाते हुए कांग्रेस अध्यक्ष ने सरकार पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने इतिहास का हवाला देते हुए याद दिलाया कि कैसे तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने देश के युवाओं को बड़ी सौगात देते हुए मतदान की आयु 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष की थी ताकि वे देश के भविष्य के फैसलों में सीधे भागीदार बन सकें। इसके विपरीत, उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार ने चुपचाप फॉर्म-6 के नियमों में गैरकानूनी तरीके से संशोधन करवाकर युवाओं को उनके इस अधिकार से वंचित करने की साजिश रची है।
अपने संबोधन में खड़गे ने तंज कसते हुए कहा कि सरकार ने युवाओं को रोजगार तो दिया नहीं, और अब उनसे वोट देने का अधिकार भी छीना जा रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि मताधिकार किसी भी सरकार की तरफ से दी जाने वाली कोई खैरात नहीं है, बल्कि इसके पीछे देश के स्वतंत्रता सेनानियों और आम नागरिकों के अनगिनत संघर्ष तथा बलिदान जुड़े हुए हैं।
"देश के लोकतंत्र और संविधान की रक्षा की जिम्मेदारी एक बार फिर कांग्रेस के कंधों पर है। मोदी सरकार ने पिछले 12 वर्षों में देश की मजबूत लोकतांत्रिक नींव को योजनाबद्ध तरीके से खोखला किया है। चुनाव आयोग के भीतर दो आयुक्तों ने खुद मुख्य चुनाव आयुक्त की गतिविधियों को मनमाना बताया है।" — मल्लिकार्जुन खड़गे, कांग्रेस अध्यक्ष
राहुल गांधी के बयानों का समर्थन और 'वोटबंदी' की तुलना
बैठक के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा पहले उठाए गए सवालों को भी प्रमुखता से रेखांकित किया गया। खड़गे ने कहा कि राहुल गांधी ने विभिन्न राज्यों के चुनावी आंकड़ों और मतदाता सूचियों का विश्लेषण कर डुप्लीकेट मतदाताओं, संदिग्ध पतों और फॉर्म-6 की प्रविष्टियों से जुड़े गंभीर आंकड़े देश के सामने रखे थे। यदि चुनाव आयोग ने उन शिकायतों पर समय रहते निष्पक्ष और गंभीर कदम उठाए होते, तो आज उसकी विश्वसनीयता पर इस तरह के बड़े सवाल खड़े नहीं होते।
उन्होंने नोटबंदी और मौजूदा हालात की तुलना करते हुए इसे 'वोटबंदी' करार दिया। खड़गे ने कहा कि नोटबंदी के दौरान देश के गरीब नागरिकों को लाइनों में खड़ा होना पड़ा था, जबकि इस नई व्यवस्था के तहत गरीबों और वंचितों को मतदाता सूची की लाइनों से ही पूरी तरह बाहर किया जा रहा है। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं का आह्वान किया कि आने वाले चुनावी राज्यों को देखते हुए इस मुद्दे को सड़क से लेकर संसद तक पुरजोर तरीके से उठाया जाना चाहिए।
चुनाव आयोग के सामने कांग्रेस पार्टी की पांच मुख्य मांगें
सीडब्ल्यूसी की बैठक के अंत में कांग्रेस पार्टी की ओर से चुनाव आयोग के समक्ष पांच सूत्रीय मांगपत्र रखा गया, जिसमें पूरी चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने पर जोर दिया गया है। पार्टी ने मांग की है कि मतदाता सूची में किए गए बड़े बदलावों का पूरा डेटा सार्वजनिक किया जाए ताकि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को छिपाया न जा सके।
- मतदाता सूची से हटाए गए सभी मतदाताओं को इसकी आधिकारिक सूचना दी जाए और उन्हें अपील करने का उचित अवसर मिले।
- सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को आवश्यक और प्रासंगिक चुनावी डेटा सरल तथा सुलभ फॉर्मेट में समय पर मुहैया कराया जाए।
- मतदाता सूचियों और चुनाव संचालन से जुड़ी गंभीर विसंगतियों की एक स्वतंत्र और समयबद्ध न्यायिक या उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।
- पूरी चुनाव प्रक्रिया से जुड़े महत्वपूर्ण डेटा और प्रशासनिक फैसलों में पूर्ण पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जाए।
निष्कर्ष तौर पर, कांग्रेस पार्टी ने स्पष्ट कर दिया है कि वह इस लड़ाई को केवल राजनीतिक हार-जीत तक सीमित नहीं मानती है, बल्कि यह देश के संविधान और नागरिक अधिकारों को बचाने की एक लंबी वैचारिक और जनतांत्रिक लड़ाई है। पार्टी आने वाले दिनों में समान विचारधारा वाले विपक्षी दलों को साथ लेकर इस मुद्दे पर दबाव और अधिक तेज करने की रणनीति बना रही है।










