दूरदर्शन के सुनहरे दौर की एक अनमोल याद
अस्सी के दशक का वो दौर आज भी भारतीय टेलीविजन इतिहास का सबसे स्वर्णिम काल माना जाता है। उस समय मनोरंजन के साधन सीमित हुआ करते थे, लेकिन जो कुछ भी परोसा जाता था, उसकी गुणवत्ता बेजोड़ होती थी। दूरदर्शन का छोटा पर्दा उस दौर में हर भारतीय परिवार की शाम का मुख्य केंद्र हुआ करता था। लोग अपने सारे काम छोड़कर तय समय पर टीवी के सामने बैठ जाते थे। इन धारावाहिकों की लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उनके किरदार और कहानियां आज भी लोगों के जेहन में तरोताजा हैं।
इसी सुनहरे दौर में दूरदर्शन के पर्दे पर एक ऐसा धारावाहिक उतरा, जिसने छोटे परदे की कॉमेडी की परिभाषा ही बदल दी। इस शो का नाम था 'ये जो है जिंदगी', जिसे साल 1984 में पहली बार प्रसारित किया गया था। इस शो की कहानी, इसके संवाद और इसमें काम करने वाले कलाकार इतने शानदार थे कि इसने दर्शकों के दिलों पर गहरी छाप छोड़ी। शो की सफलता में इसकी पटकथा के साथ-साथ इसके संगीत का भी बहुत बड़ा योगदान था, जिसकी गूंज आज भी लोगों के कानों में सुनाई देती है।
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जब पहली बार छोटे पर्दे के लिए गाए थे किशोर दा
भारतीय संगीत जगत में अपनी अनूठी गायिकी और मस्तीभरे अंदाज के लिए पहचाने जाने वाले महान गायक किशोर कुमार ने अपने लंबे और शानदार करियर में हजारों गानों को अपनी आवाज दी थी। फिल्मी पर्दे के लिए उन्होंने एक से बढ़कर एक सुपरहिट गाने गाए, जो आज भी लोगों की जुबान पर हैं। लेकिन अपने पूरे करियर में यह पहला मौका था जब किशोर कुमार ने किसी फिल्म के लिए नहीं, बल्कि दूरदर्शन के एक टीवी शो के लिए अपनी आवाज का जादू बिखेरा था।
जब 'ये जो है जिंदगी' शो के निर्माताओं ने टाइटल ट्रैक के लिए किशोर दा से संपर्क किया, तो उन्होंने इस अनोखे प्रोजेक्ट के लिए तुरंत हामी भर दी। उनके गाए इस टाइटल सॉन्ग ने धारावाहिक में चार चांद लगा दिए। गाने के बोल और किशोर कुमार की खिलखिलाती हुई आवाज ने दर्शकों को पहले ही एपिसोड से मंत्रमुग्ध कर दिया था। यह गाना उस दौर का इतना बड़ा एंथम बन गया कि बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक इसकी धुन पर गुनगुनाने लगे थे।
दिग्गज कलाकारों से सजा था 'ये जो है जिंदगी' धारावाहिक
केवल टाइटल सॉन्ग ही नहीं, बल्कि इस टीवी शो की स्टार कास्ट भी बेहद मजबूत और अनुभवी थी। उस दौर के मंझे हुए फिल्म और थिएटर कलाकार इस धारावाहिक का हिस्सा बने थे। शो में राकेश बेदी, सतीश शाह, फारूख जलाल, स्वरूप संपत और शफी इनामदार जैसे दिग्गज कलाकारों ने अपनी बेहतरीन कॉमिक टाइमिंग और अभिनय से घर-घर में अपनी खास पहचान बनाई थी। हर हफ्ते प्रसारित होने वाले इस शो के किरदारों की नोंकझोंक दर्शकों को हंसने पर मजबूर कर देती थी।
शो की पटकथा इतनी सहज और आम आदमी के जीवन के करीब थी कि दर्शक खुद को इन किरदारों से जुड़ा हुआ महसूस करते थे। मध्यमवर्गीय परिवारों की रोजमर्रा की परेशानियों और हास्य के तड़के ने इसे उस समय का सबसे पसंदीदा पारिवारिक धारावाहिक बना दिया था। इस शो के हर एक एपिसोड का लोग बेसब्री से इंतजार किया करते थे।
"दूरदर्शन के शुरुआती दौर के धारावाहिकों की खूबी यह थी कि वे सीधे जनता के दिलों से जुड़ते थे। 'ये जो है जिंदगी' और किशोर कुमार का वह जादुई गाना इस बात का सबसे बड़ा सबूत है कि सच्ची कला समय की सीमाओं से परे होती है।" — वरिष्ठ मीडिया विश्लेषक
42 साल बाद भी उतनी ही ताजा है इस पुरानी धुन की खनक
आज के इस डिजिटल युग में जहां हर हफ्ते नए शोज़ और वेब सीरीज आते और जाते हैं, वहीं चार दशक पहले बने इस शो और उसके गाने की लोकप्रियता आज भी कम नहीं हुई है। 42 साल बीत जाने के बाद भी जब कभी 'ये जो है जिंदगी' का वह पुराना टाइटल ट्रैक कानों में पड़ता है, तो अस्सी के दशक की तमाम सुनहरी यादें ताजा हो जाती हैं। यह इस बात का प्रमाण है कि बेहतरीन संगीत और मजबूत कहानी कभी पुरानी नहीं होती।
आज की पीढ़ी भले ही आज के आधुनिक ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर कंटेंट देखने की आदी हो चुकी है, लेकिन पुराने दौर की उन कलात्मक रचनाओं का जादू आज भी अपनी जगह कायम है। किशोर कुमार की वह अनूठी शैली और दूरदर्शन का वह सरल दौर हमेशा-हमेशा के लिए भारतीय टेलीविजन इतिहास के पन्नों में अमर हो चुका है।








