मासिक धर्म यानी पीरियड्स हर महिला के जीवन का एक प्राकृतिक और नियमित हिस्सा है। इस दौरान शरीर कई तरह की शारीरिक और मानसिक प्रक्रियाओं से गुजरता है। अधिकांश महिलाओं को इन दिनों में पेट दर्द, ऐंठन और मूड स्विंग्स जैसी समस्याएं तो होती ही हैं, साथ ही एक बेहद आम शिकायत यह भी देखने को मिलती है कि उन्हें सामान्य दिनों से काफी ज्यादा नींद आने लगती है। कई बार महिलाएं खुद से यह सवाल करती हैं कि आखिर इस अवस्था में उन्हें हर वक्त सुस्ती और थकान क्यों महसूस होती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पीछे कई वैज्ञानिक और शारीरिक कारण छिपे होते हैं, जिन्हें समझना हर महिला के लिए जरूरी है।
विशेषज्ञों के अनुसार, पीरियड साइकिल के विभिन्न चरणों में शरीर के भीतर रासायनिक और हॉर्मोनल बदलाव होते रहते हैं। ये बदलाव सीधे तौर पर हमारे स्लीप पैटर्न, ऊर्जा के स्तर और शरीर के तापमान को प्रभावित करते हैं। इसलिए, यदि किसी महिला को इन दिनों में अपने भीतर भारीपन या अत्यधिक सुस्ती का अहसास हो, तो इसे केवल आलस मानकर नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि इसके मूल कारणों को समझने का प्रयास करना चाहिए।
हार्मोन्स का खेल और शरीर की बदलती हुई लय
पीरियड्स शुरू होने से पहले और इस दौरान महिलाओं के शरीर में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे प्रमुख हार्मोन्स का स्तर ऊपर-नीचे होता रहता है। ये दोनों ही हॉर्मोन शरीर की ऊर्जा और मानसिक स्थिति को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाते हैं। जब इन हार्मोन्स का स्तर अचानक गिरता है, तो इसका सीधा असर तंत्रिका तंत्र पर पड़ता है। परिणामस्वरूप, मस्तिष्क और शरीर को तरोताजा रखने वाली ऊर्जा में कमी आ जाती है और महिला को बार-बार नींद का अहसास होने लगता है।
शोधकर्ताओं और चिकित्सा विज्ञान के कई अध्ययनों में भी इस बात की पुष्टि हो चुकी है कि मासिक धर्म के दौरान महिलाओं की सर्कैडियन रिदम यानी आंतरिक घड़ी प्रभावित होती है। रात के समय नींद की गुणवत्ता बिगड़ जाने के कारण दिनभर थकान बनी रहती है। पेट में ऐंठन, बदन दर्द और बेचैनी जैसी दिक्कतें रात की नींद में खलल डालती हैं, जिसकी भरपाई शरीर अगले दिन ज्यादा नींद लेकर करने की कोशिश करता है।
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खून की कमी और हीमोग्लोबिन का गिरता स्तर
मासिक धर्म के दौरान होने वाला रक्तस्राव भी शरीर की ताकत को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करता है। यदि किसी महिला को पीरियड्स में बहुत ज्यादा ब्लीडिंग होती है या यह चक्र सामान्य से अधिक दिनों तक चलता है, तो उसके शरीर में आयरन की भारी कमी हो सकती है। लंबे समय तक यह स्थिति बने रहने पर एनीमिया यानी रक्ताल्पता की शिकायत हो सकती है, जिसके मुख्य लक्षणों में लगातार थकान, चक्कर आना, सिरदर्द और ध्यान केंद्रित करने में परेशानी शामिल हैं।
जब शरीर के ऊतकों तक पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती, तो ऊर्जा का स्तर तेजी से नीचे गिरने लगता है। ऐसे में शरीर खुद को बचाने और आराम देने के लिए सुस्त हो जाता है, जिससे हर समय लेटे रहने या सोने का मन करता है। महिलाओं को इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि अत्यधिक ब्लीडिंग को कभी भी सामान्य समझकर अनदेखा न किया जाए।
"मासिक धर्म के दौरान थकान और नींद का बढ़ना बहुत आम है, लेकिन अगर यह समस्या रोजमर्रा के कामकाज को प्रभावित करने लगे या इसके साथ अन्य गंभीर लक्षण दिखें, तो डॉक्टर से परामर्श करना बेहद जरूरी है ताकि किसी अंदरूनी स्वास्थ्य समस्या का समय रहते पता लगाया जा सके।" — डॉ. अरविंद एस.एन., इंटरनल मेडिसिन विशेषज्ञ
बदलते तापमान और जीवनशैली की अनियंत्रित आदतें
पीरियड्स के दौरान शरीर के आंतरिक तापमान में भी उतार-चढ़ाव देखा जाता है। कई महिलाओं को इस चक्र के दौरान शरीर में अधिक गर्मी या रात में बेचैनी महसूस होती है, जिससे गहरी नींद में बाधा उत्पन्न होती है। जब रात की नींद पूरी नहीं होती, तो दिन के समय अत्यधिक तंद्रा और सुस्ती घेर लेती है। इसके अलावा, हमारी दैनिक जीवनशैली की आदतें भी इस समस्या को बढ़ाने या घटाने में बड़ा योगदान देती हैं।
खान-पान में लापरवाही, पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन, अत्यधिक तनाव और शारीरिक गतिविधि का बिल्कुल न होना थकान को कई गुना बढ़ा देता है। जंक फूड और अत्यधिक कैफीन के सेवन से शरीर का आंतरिक संतुलन बिगड़ जाता है, जिससे ऊर्जा का स्तर स्थिर नहीं रह पाता। इन छोटी-छोटी आदतों में सुधार लाकर इस समस्या से काफी हद तक निपटा जा सकता है।
बचाव के उपाय और डॉक्टर से कब मिलें
इस प्रकार की थकान और अत्यधिक नींद की समस्या से राहत पाने के लिए कुछ आसान और प्रभावी उपायों को अपनाया जा सकता है। सबसे पहले अपने सोने और जागने के समय को नियमित करें। शरीर को हाइड्रेट रखने के लिए भरपूर मात्रा में पानी पिएं और अपने आहार में आयरन, विटामिन्स और अन्य जरूरी पोषक तत्वों से भरपूर खाद्य पदार्थों को शामिल करें। हल्की शारीरिक गतिविधियां या योग करने से भी शरीर में रक्त संचार बेहतर होता है और ऊर्जा बनी रहती है।
हालांकि, यदि थकान सामान्य सीमा से अधिक हो, पूरे महीने बनी रहे या इसके साथ सांस फूलने, दिल की धड़कन तेज होने जैसी समस्याएं भी जुड़ी हों, तो इसे हल्के में न लें। यह किसी अन्य चिकित्सीय स्थिति, जैसे थायराइड या गंभीर एनीमिया का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में तुरंत किसी योग्य चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए और उनकी सलाह के अनुसार आवश्यक जांच करवानी चाहिए।






