वंदे भारत यात्रियों के लिए सफर होगा और भी आसान, सातों दिन चलाने की तैयारी
भारतीय रेलवे की सेमी-हाई स्पीड ट्रेन वंदे भारत एक्सप्रेस ने देश में रेल यात्रा के अनुभव को पूरी तरह से बदलकर रख दिया है। अपनी आधुनिक सुविधाओं, तेज रफ्तार और आरामदायक इंटीरियर की वजह से यह ट्रेन यात्रियों की पहली पसंद बन चुकी है। अब उन यात्रियों के लिए एक बेहद सुखद खबर सामने आ रही है, जो अक्सर प्रीमियम रूटों पर सफर करते हैं। रेलवे प्रशासन ने यात्रियों की बढ़ती मांग को देखते हुए इस बात की योजना बनाई है कि वंदे भारत ट्रेनों को सप्ताह में छह दिन के बजाय सातों दिन संचालित किया जाए।
वर्तमान समय में देश के विभिन्न हिस्सों में कुल 162 वंदे भारत रैक यात्रियों को उनकी मंजिल तक पहुंचा रहे हैं। ये ट्रेनें करीब 79 अलग-अलग रूट्स पर अपनी सेवाएं दे रही हैं। हालांकि, अभी तक की व्यवस्था के अनुसार हर ट्रेन के लिए हफ्ते में एक दिन रखरखाव यानी मेंटेनेंस के लिए तय होता है, जिस वजह से उस विशेष दिन ट्रेन का संचालन बंद रखना पड़ता है। लेकिन अब इस समस्या का एक व्यावहारिक समाधान निकालते हुए रेलवे ने एक नया खाका तैयार किया है, जिससे यात्रियों को कभी भी असुविधा का सामना न करना पड़े।
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क्यों पड़ी अतिरिक्त रैक की जरूरत, क्या है रेलवे का पूरा प्लान?
आम तौर पर हर ट्रेन को लंबे सफर के बाद उसकी तकनीकी जांच, साफ-सफाई और जरूरी मरम्मत के लिए समय की आवश्यकता होती है। इसी तकनीकी जरूरत के चलते वंदे भारत ट्रेनों को भी हफ्ते में एक दिन सेवा से बाहर रखा जाता था। उदाहरण के तौर पर, खजुराहो और नई दिल्ली के बीच चलने वाली प्रीमियम ट्रेन फिलहाल मंगलवार से रविवार तक चलती है और सोमवार को इसका मेंटेनेंस किया जाता है। इस एक दिन के विराम के कारण कई बार यात्रियों को अपनी यात्रा की योजना बदलने में परेशानी उठानी पड़ती थी।
इस चुनौती से पार पाने के लिए उत्तर रेलवे ने एक ठोस और व्यावहारिक प्रस्ताव तैयार किया है। इसके तहत प्रत्येक चिन्हित रूट पर एक अतिरिक्त रैक की व्यवस्था की जाएगी। जब किसी मुख्य रैक को रखरखाव के लिए वर्कशॉप भेजा जाएगा, तब उस अतिरिक्त रैक को सेवा में लगा दिया जाएगा। इससे यह सुनिश्चित होगा कि यात्रियों को सप्ताह के सातों दिन लगातार ट्रेन की सुविधा मिलती रहे और साथ ही ट्रेनों की तकनीकी सुरक्षा और मेंटेनेंस का काम भी समय पर बिना किसी बाधा के पूरा होता रहे।
किन-किन पांच प्रमुख रूट्स पर लागू होगी नई व्यवस्था?
उत्तर रेलवे की ओर से रेलवे बोर्ड को भेजे गए इस नए प्रस्ताव के दायरे में फिलहाल देश के पांच अत्यंत महत्वपूर्ण और व्यस्त मार्ग शामिल किए गए हैं। इन चुनिंदा रूट्स पर भारी यात्री दबाव को देखते हुए सबसे पहले इस नई व्यवस्था को प्रायोगिक तौर पर लागू करने की तैयारी चल रही है। यदि बोर्ड से इस प्रस्ताव को हरी झंडी मिल जाती है, तो आने वाले दिनों में यात्रियों को जबरदस्त राहत मिलने वाली है।
प्रस्ताव के अनुसार, खजुराहो से नई दिल्ली के बीच चलने वाली लोकप्रिय वंदे भारत एक्सप्रेस (संख्या 22469/22470) के साथ-साथ चार अन्य प्रमुख रूट भी इस योजना का हिस्सा होंगे। इन रूटों में नई दिल्ली से अंदौरा, वैष्णो देवी कटरा, वाराणसी और अयोध्या (प्रयागराज) जाने वाली वंदे भारत सेवाएं शामिल हैं। इन सभी मार्गों पर रोजाना सफर करने वाले यात्रियों की संख्या काफी अधिक है, इसलिए सातों दिन ट्रेन उपलब्ध होने से पर्यटन और व्यापारिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।
"उत्तर रेलवे द्वारा वंदे भारत एक्सप्रेस के संचालन को सातों दिन सुचारू रखने के लिए अतिरिक्त रैक उपलब्ध कराने का प्रस्ताव रेलवे बोर्ड को भेजा गया है। इस योजना के मूर्त रूप लेने से यात्रियों को मेंटेनेंस के दिनों में भी परेशानी नहीं होगी।" — मनोज कुमार सिंह, जनसंपर्क अधिकारी, झांसी रेल मंडल
देशभर में किस स्थिति में दौड़ रही हैं वंदे भारत की अलग-अलग श्रेणियां
भारतीय रेलवे लगातार वंदे भारत के नेटवर्क को मजबूत और विस्तारित करने में जुटा हुआ है। मौजूदा समय में देश के विभिन्न रेल खंडों पर तीन अलग-अलग कोच कॉन्फिगरेशन या वेरिएंट्स में ये ट्रेनें पटरियों पर दौड़ रही हैं। इन श्रेणियों में 8 कोच वाली 45 ट्रेनें, 16 कोच वाली 34 ट्रेनें और 20 कोच क्षमता वाली 38 वंदे भारत एक्सप्रेस शामिल हैं। रेलवे की यह विविधता अलग-अलग रूट्स पर यात्रियों की संख्या और मांग को ध्यान में रखकर तय की गई है।
फिलहाल अतिरिक्त रैक का यह प्रस्ताव प्रारंभिक चरण में इन पांच विशेष रूट्स पर केंद्रित है। रेलवे बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारी इस प्रस्ताव के सभी तकनीकी और आर्थिक पहलुओं का बारीकी से अध्ययन कर रहे हैं। जानकारों का मानना है कि यदि यह पायलट प्रोजेक्ट अपने उद्देश्यों में पूरी तरह सफल रहता है, तो आने वाले समय में देश के अन्य महत्वपूर्ण और अधिक यात्री भार वाले रूट्स पर भी इसी तर्ज पर सातों दिन वंदे भारत चलाने का निर्णय लिया जा सकता है, जिससे आम जनता को और अधिक सुगम यात्रा का विकल्प मिल सकेगा।



