कोलकाता ब्यूरो — पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में इन दिनों सियासत का पारा तेजी से चढ़ रहा है। स्थानीय निकाय चुनावों से लेकर राजनीतिक दलों के दफ्तरों तक, हर मोर्चे पर नए घटनाक्रम सामने आ रहे हैं। राज्य में चुनावी तैयारियों के बीच राजनीतिक दलों ने अपनी रणनीति बदल दी है। एक तरफ भारतीय जनता पार्टी ने जनता और जमीनी कार्यकर्ताओं से सीधे जुड़ने के लिए एक नया तरीका निकाला है, तो वहीं दूसरी तरफ सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस यानी टीएमसी के सामने एक नया संकट खड़ा हो गया है। शहर के अलग-अलग कोनों से आ रही इन खबरों ने राज्य की राजनीति को गर्मा दिया है।
राज्य में राजनीतिक दलों की गतिविधियों के बीच बुनियादी ढांचे से जुड़े प्रोजेक्ट्स की रफ्तार भी चर्चा में है। वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट पर मुआवजे के विवाद को लेकर काम कुछ समय के लिए रुका हुआ है। हालांकि इसके साथ ही राजगीर और डोभी को इस एक्सप्रेसवे से जोड़ने की नई योजनाएं भी बनाई जा रही हैं। बोधगया को आमस-दरभंगा हाईवे से जोड़ने की तैयारी भी चल रही है। इन तमाम विकास कार्यों के बीच स्थानीय राजनीति में पुराने नामों को बदलने की मांगें भी उठने लगी हैं, जिससे शहर का सियासी माहौल और अधिक सरगर्मी से भर गया है।
पार्षद बनने के लिए भाजपा कार्यालय में जमा करना होगा बायोडाटा
आगामी कोलकाता नगर निकाय चुनावों को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपनी चुनावी प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है। बंगाल भाजपा के नेताओं ने साफ कर दिया है कि अगर किसी को पार्टी की तरफ से पार्षद का चुनाव लड़ना है, तो उसे अपना बायोडाटा सीधे पार्टी कार्यालय में बने ड्रॉप बॉक्स में जमा करना होगा। पार्टी का यह कदम उम्मीदवारों के चयन में पारदर्शिता लाने और जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं को मौका देने के लिए उठाया गया है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि इस व्यवस्था से सही और सक्रिय लोगों तक टिकट पहुंच सकेगा।
इस नई व्यवस्था के तहत शहर के कई हिस्सों से लोग अपने बायोडाटा लेकर पार्टी दफ्तर पहुंच रहे हैं। सुकांत मजूमदार और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने इस पूरी प्रक्रिया की रूपरेखा स्पष्ट कर दी है। पार्टी का मकसद उन चेहरों को आगे लाना है जो जनता के बीच सक्रिय रहते हैं और स्थानीय समस्याओं को अच्छे से समझते हैं। इस तरीके से टिकट वितरण की पुरानी परंपराओं को तोड़ने की कोशिश की जा रही है, जिस पर राजनीतिक गलियारों में खासी चर्चा हो रही है।
टीएमसी मुख्यालय के मकान मालिक पहुंचे थाने, प्रॉपर्टी खाली कराने की मांग
दूसरी तरफ सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस यानी टीएमसी के लिए एक बड़ी मुसीबत सामने आ गई है। कोलकाता में स्थित तृणमूल कांग्रेस के पार्टी मुख्यालय के मकान मालिक ने सीधे थाने का रुख कर लिया है। मकान मालिक ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराते हुए टीएमसी से अपनी प्रॉपर्टी तुरंत खाली कराने की मांग की है। इस घटना के सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में खलबली मच गई है और विरोधी दलों को सरकार पर निशाना साधने का मौका मिल गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मकान मालिक और पार्टी के बीच कुछ मुद्दों को लेकर विवाद चल रहा था, जो अब थाने तक पहुंच गया है। यदि यह मामला कानूनी रूप लेता है या मकान मालिक कड़ा रुख अपनाता है, तो टीएमसी को अपना मुख्य कार्यालय बदलना पड़ सकता है। विपक्षी दल इस मुद्दे पर लगातार सवाल उठा रहे हैं और सत्तारूढ़ दल की कार्यप्रणाली पर तंज कस रहे हैं। पार्टी के भीतर भी इस बात को लेकर सुगबुगाहट तेज हो गई है कि इस संकट से कैसे निपटा जाए।
बड़ाबाजार की नवाब लेन का नाम बदलने की उठी मांग
राजधानी कोलकाता के ऐतिहासिक इलाकों में भी राजनीतिक और सामाजिक बदलाव की मांगें जोर पकड़ रही हैं। ताजा मामले में शहर के व्यस्त इलाके बड़ाबाजार की नवाब लेन का नाम बदलने की पुरजोर मांग उठी है। इस संबंध में एक स्थानीय भाजपा नेता ने आगे आकर प्रसिद्ध संत कार्तिक महाराज को एक औपचारिक पत्र सौंपा है। पत्र में मांग की गई है कि इस गली का नाम बदला जाए और इसके पीछे सांस्कृतिक व ऐतिहासिक तर्क दिए गए हैं।
स्थानीय स्तर पर इस मांग के समर्थन और विरोध में चर्चाएं शुरू हो गई हैं। ऐतिहासिक गलियों और सड़कों के नाम बदलने का यह सिलसिला नया नहीं है, लेकिन कोलकाता जैसे शहर में ऐसे मुद्दों पर सियासत हमेशा संवेदनशील रही है। प्रशासन और स्थानीय निकाय इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं। द फ्रीलान्स की टीम इस मामले में आगे भी जमीनी अपडेट आप तक पहुंचाती रहेगी, क्योंकि कोलकाता की इन बदलती राजनीतिक हवाओं का असर आने वाले चुनावों पर साफ तौर पर दिखाई देगा।








