राजनीतिक गलियारों में भूचाल: उपमहापौर चुनाव से कांग्रेस ने बनाई दूरी
स्थानीय निकायों के चुनावी रण में घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा है। हाल ही में संपन्न हुए नगर निगम के महापौर पद के चुनाव के बाद राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर चरम पर पहुंच गया है। चुनाव परिणामों के दौरान सामने आए समीकरणों और अप्रत्याशित उलटफेर के बाद विपक्षी खेमे में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। इसी क्रम में कांग्रेस पार्टी ने बड़ा कदम उठाते हुए आगामी उपमहापौर चुनाव का पूरी तरह से बहिष्कार करने की घोषणा कर दी है। पार्टी का साफ कहना है कि जब चुनावी प्रक्रिया की गरिमा और पार्षदों के अधिकारों की रक्षा ही सुरक्षित नहीं है, तो ऐसी दौड़ में शामिल होने का कोई औचित्य नहीं बनता है।
इस फैसले के पीछे मुख्य वजह महापौर चुनाव के दौरान हुई क्रॉस वोटिंग और कथित तौर पर सत्ता पक्ष द्वारा अपनाए गए दबाव के हथकंडे बताए जा रहे हैं। कांग्रेस संगठन के शीर्ष स्तर पर इस बात को लेकर गहरी मंथन बैठकें हुईं, जिसके बाद यह कठोर निर्णय लिया गया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बहिष्कार से स्थानीय निकाय की राजनीति में एक नया मोड़ आ गया है और आने वाले दिनों में सत्ता पक्ष तथा विपक्ष के बीच टकराव और अधिक बढ़ सकता है.
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क्रॉस वोटिंग पर आंतरिक कलह और अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी
महापौर के चुनाव परिणाम ने कांग्रेस पार्टी के भीतरखाने चल रही अंतर्कलह को सबके सामने ला कर रख दिया है। पार्टी समर्थित पार्षदों के एक धड़े द्वारा क्रॉस वोटिंग किए जाने के कारण कांग्रेस प्रत्याशी को पराजय का सामना करना पड़ा था। इस हार से आहत पार्टी नेतृत्व ने अब अनुशासनहीनता के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने का मन बना लिया है। जिला संगठन ने स्पष्ट कर दिया है कि जिन लोगों ने पार्टी के साथ गद्दारी की है, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा।
संगठन की प्रमुख ने मीडिया के सामने इस बात की पुष्टि की है कि क्रॉस वोटिंग करने वाले प्रत्येक पार्षद की पहचान की जा रही है। मतदान के दौरान किस-किस ने पार्टी व्हिप का उल्लंघन किया और विरोधियों के पाले में जाकर वोट डाला, इसकी आंतरिक जांच शुरू कर दी गई है। जांच रिपोर्ट के आते ही सभी दोषियों को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाने के साथ-साथ अन्य कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जाएगी। यह कदम पार्टी के भीतर भविष्य में इस तरह की अनुशासनहीनता को रोकने के लिए उठाया जा रहा है.
सत्ता पक्ष पर डराने-धमकाने और लोकतंत्र की हत्या का गंभीर आरोप
कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि भारतीय जनता पार्टी ने अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए सभी लोकतांत्रिक मर्यादाओं को ताक पर रख दिया। विपक्षी पार्षदों को विभिन्न माध्यमों से प्रताड़ित किया गया, उन्हें प्रशासनिक तंत्र का भय दिखाया गया और उनकी निष्ठा को तोड़ने के कुत्सित प्रयास किए गए। पार्टी का यह भी तर्क है कि यदि जनप्रतिनिधियों को ही स्वतंत्र रूप से अपने मताधिकार का प्रयोग करने से रोका जाएगा, तो यह लोकतंत्र की मूल भावना पर सीधा प्रहार है।
संगठन के पदाधिकारियों ने कड़े शब्दों में निंदा करते हुए कहा कि सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग कर चुनावी नतीजों को प्रभावित किया गया है। जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों को यदि भय के साये में जीने पर मजबूर किया जाए, तो यह स्वस्थ लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत है। कांग्रेस ने दो टूक शब्दों में कहा है कि वे इस तरह के अलोकतांत्रिक दबावों के आगे कभी नहीं झुकेंगे और जनता के अधिकारों की लड़ाई सड़क से लेकर सदन तक पूरी मजबूती के साथ लड़ते रहेंगे.
लोकतांत्रिक मूल्यों से कोई समझौता नहीं: पार्टी का कड़ा रुख
स्थानीय राजनीति में शुचिता और सिद्धांतों की बात करते हुए कांग्रेस नेतृत्व ने दोहराया है कि पार्टी किसी भी कीमत पर अपने बुनियादी मूल्यों से समझौता नहीं करेगी। जब चुनाव की निष्पक्षता पर ही गहरे सवालिया निशान लग चुके हों, तब औपचारिकता निभाने के लिए चुनाव प्रक्रिया में शामिल होना जनता के साथ विश्वासघात के समान होगा। यही कारण है कि पार्टी ने लोकतांत्रिक विरोध दर्ज कराने का यह अनोखा और सख्त तरीका चुना है।
"महापौर चुनाव के दौरान हमारे पार्षदों को सत्ता के बल पर डराया और धमकाया गया, जिसके कारण क्रॉस वोटिंग जैसी घटनाएं हुईं। हम इस अलोकतांत्रिक कृत्य और सत्ता के दुरुपयोग का पुरजोर विरोध करते हैं, और इसी के विरोधस्वरूप हमारी पार्टी उपमहापौर के चुनाव का पूरी तरह बहिष्कार करती है।" — राखी गौतम, कांग्रेस शहर जिला अध्यक्ष
इस बहिष्कार के फैसले से स्थानीय प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में खलबली मच गई है। निर्वाचन से जुड़े अधिकारियों और सत्ता पक्ष के नेताओं पर भी इस विरोध का नैतिक दबाव बनता दिख रहा है। हालांकि, चुनाव प्रक्रिया तय समय के अनुसार आगे बढ़ाई जा रही है, लेकिन विपक्षी दल के इस रुख ने चुनावी जीत के जश्न को फीका जरूर कर दिया है.
निष्कर्ष और आगे की राजनीतिक राह
कोटा नगर निगम चुनाव के इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर स्थानीय निकायों की राजनीति में अनुशासन, वफादारी और नैतिक मूल्यों के ह्रास पर बहस छेड़ दी है। एक तरफ जहां भाजपा अपनी जीत का जश्न मना रही है, वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस ने इस जीत को 'छल' और 'दबाव की राजनीति' करार दिया है। उपमहापौर चुनाव का बहिष्कार और आंतरिक जांच का ऐलान आने वाले दिनों में स्थानीय राजनीति को किस दिशा में ले जाएगा, यह तो वक्त ही बताएगा, लेकिन इतना तय है कि इस तकरार की गूंज लंबे समय तक राजनीतिक गलियारों में सुनाई देती रहेगी.








